बांग्लादेश का संविधान

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बांग्लादेश का संविधान
গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশের সংবিধান
संविधान का मुखपृष्ठ
संविधान का मुखपृष्ठ
सृजन ८ नवंबर १९७२
अनुमोदित १६ दिसंबर १९७२
स्थान राष्ट्रीय संग्रहालय, ढाका
लेखक गणपरिषद (संविधान सभा)
हस्ताक्षरकर्ता गणपरिषद के सदस्य
(एकमत)


गणप्रजातंत्र बांग्लादेश का संविधान(बांग्ला: গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশের সংবিধান, सीधा लिप्यांतरण:गणप्रजातंत्री बांलादेशेर संविधान, उच्चारण:गाॅनोप्रोजातोन्त्री बांलादेशेर् शाॅम्बिधान्) स्वतंत्र, स्वतः स्वाधीनसर्वसंप्रभुतासम्पन्न बांग्लादेशी राष्ट्र की सर्वोच्च विधि संहिता है। यह एक लिखित दस्तावेज़ है। सन १९७२ के नवंबर मास की 8 तारीख को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद में यह संविधान अपनी गई एवं उसी वर्ष के १६ दिसंबर को अर्थात् बांग्लादेश की विजय दिवस की प्रथम वर्षगाँठ होते यह कार्यान्वित हुई। मूल संविधान अंग्रेज़ी भाषा में रचित है एवं इसका बंगाली में अनुवाद कराया गया है। तभी यह बांग्ला व अंग्रेज़ी दोनो भाषाओं में विद्यमान है। अंग्रेज़ी व बंगाली के मध्य अर्थगत विरोध दृश्यमान होने पर बंगाली संस्करण अनुसरणीय होगी।[1]

१७ सितंबर; वर्ष २०१४ के सोलहवें संशोधन सहित यह संविधान सर्वमत १६ बार संशोधित हुई है। यह संविधान के संशोधन हेतु राष्ट्रीय संसदीय सदस्यों की कुल संख्या की दो तिहाई भाग के मतों का प्रावधान है। हालाँकि, तेरहवें संशोधन रद्द करने के आदेश में बांग्लादेश की सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया है की, संविधान की मूल ढाँचा परिवर्तित हो, ऐसी संशोधन नहीं किया जाएगा; लाने पर यह अधिकार क्षेत्र से परे होगा अतः अमान्य होगा।[2]

बांग्लादेश का संविधान केवल बांग्लादेश की सर्वोच्च विधि संहिता ही नहीं है; संविधान में बांग्लादेश की नामक राष्ट्रीय चरित्र वर्णित की गई है। इसमें बांग्लादेश की भौगोलिक सीमारेखा विस्तृत है। इस संविधान में दिये गए मूल ढाँचे के अनुसार: देश प्रजातांत्रिक होगा, गणतंत्र होगी इसकी प्रशासनिक नींव, जनगणन होंगे देश के सर्व शक्तियों के स्रोत और न्यायपालिका स्वतंत्रत होगी। गनगण सर्व शक्तियों के स्रोत होने पर भी देश में विधि शासन(कानून का शासन होगा)। बांग्लादेश के संविधान में राष्ट्रवाद, समाजवाद, गणतंत्रधर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र परिचालन के मूल सिद्धांतों के रूप में अपनाया गया है।

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

National emblem of Bangladesh.svg
बांग्लादेश
की राजनीति और सरकार

पर एक श्रेणी का भाग

संविधान की रचना व मुद्रण का इतिहास[संपादित करें]

चित्र:Sheikh Mujib Bangladesh Constitution.jpg
संविधान के मसौदे पर हस्ताक्षर करते हुए शेख मुजीबुर्रहमान

संविधान रचना के उद्देश्य से वर्ष १९७२ के अप्रैल मास की ११ तारीख को डाॅ. कमाल हुसैन की अध्यक्षता में ३४ सदस्यों की एक समिति गठित की गई। उसमें, डॉक्टर कमाल हुसैन (ढाका-९, राष्ट्रीय परिषद), मो. लुत्फर रहमान (रंगपुर-४, राष्ट्रीय परिषद), प्रोफेसर अबू सईद(पाबना-५, राष्ट्रीय परिषद), एम अब्दुर रहीम (दिनाजपुर-७, प्रांतीय परिषद), एम आमिर-उल इस्लाम(कुश्तिया-1,राष्ट्रीय परिषद), मोहम्मद नुरुल इस्लाम मंजूर(बाकेरगंज ३, राष्ट्रीय परिषद), अब्दुल मुनतकीम चौधरी(सिलहट ५, राष्ट्रीय परिषद), डाॅ क्षितिश चंद्र(बाकेरगंज-१५ प्रांतीय परिषद), सेनगुप्ता(सिलहट-२, प्रांतीय विधानसभा), सैयद नजरूल इस्लाम(जमालपुर-१७, राष्ट्रीय परिषद), ताजुद्दीन अहमद(ढाका-५, राष्ट्रीय परिषद), खन्दकार मुश्ताक अहमद(कोमिल्ला-८, नेशनल असेंबली), ए एच एम मुस्तफा (रंगपुर -६, राष्ट्रीय परिषद), अब्दुल मोमिन तालुकदार (पाबना-३, राष्ट्रीय परिषद), अब्दुर रऊफ(रंगपुर-११, दोमार राष्ट्रीय परिषद), मोहम्मद बायतुल्लाह(राजशाही-३ राष्ट्रीय परिषद), बादल राशिद, बार-एट-लॉ, खन्दकार अब्दुल हाफिज(जेस्सोर ७, राष्ट्रीय परिषद), शौकत अली खान(तांगली २, राष्ट्रीय परिषद), डाॅ हुमायूं खालिद, अचादुज्जमान खान(जेस्सोर-१०, प्रांतीय परिषद), एके खन्दकार मुशर्रफ हुसैन अखंड(जमालपुर-६, राष्ट्रीय परिषद), अब्दुल मोमिन, शम्सुद्दीन मोल्ला(फरीदपुर -४, राष्ट्रीय परिषद), शेख अब्दुर रहमान(खुलना -२, प्रांतीय परिषद), फकीर शहाब उद्दीन अहमद, प्रो खुर्शिद आलम(कोमिल्ला -५, राष्ट्रीय परिषद), एडवोकेट सिराजुल हक(कोमिल्ला -४, राष्ट्रीय परिषद), दीवान अबू अब्बास(कोमिल्ला-५ राष्ट्रीय परिषद), हाफ़िज़ हबीबुर रहमान(कोमिल्ला-१२, राष्ट्रीय परिषद), अब्दुर राशिद, नुरुल इस्लाम चौधरी(चटगांव-६, राष्ट्रीय परिषद), मोहम्मद खालिद (डिवीजन-५, राष्ट्रीय परिषद) और बानो बेगम रजिया(महिलाओं का आसन, राष्ट्रीय परिषद) शामिल थे।[3]

उसी वर्ष १७ अप्रैल से ३ अक्टूबर के बीच इस समिति ने विभिन्न पर्यायों पर कई बैठकें करती है। जनता की राय व विचारों को संग्रहित करने के लिए विचारों का आमंत्रण किया गया। संग्रहित विचारों में से 98 सिफारिशों को अपनाया भी गया। वर्ष १९७२, १२ अक्टूबर को गणपरिषद(संविधानसभा) के द्वितीय अधिवेशन में तत्कालीन कानून मंत्री डॉक्टर कमाल हुसैन ने संविधान के प्रारूप को विधायक के रूप में सभा के समक्ष पेश किया। गणपरिषद(संविधान सभा) में जनप्रजातंत्री बांग्लादेश की संविधान अपनायई गई एवं १६ दिसंबर १९७२ (विजय दिवस) के से परवर्तित हुई।

गणपरिषद में संविधान के ऊपर वक्तव्य देते हुए बंगबंधु मुजीबुर्रहमान में ने कहा था:

यह संविधान शहीदों के रक्त लिखित है, ये संविधान समस्त जनगण के आशा-आकांक्षाओं का मूर्त प्रतीक बनकर बचा रहेगा
এই সংবিধান শহিদের রক্তে লিখিত, এ সংবিধান সমগ্র জনগণের আশা-আকাঙ্ক্ষার মূর্ত প্রতীক হয়ে বেঁচে থাকবে।
एई शाॅम्बिधान शोहिदेर राॅक्तो लिखितो, ए शाॅम्बिधान शॉमोग्रो जॉनोगॉनेर् आशा-आकांख्खार मूर्तो प्रोतीक होए बेंचे थाकबे।[4]

संविधान के लेखन पश्चात इसका बंगाली संस्करण की रचना के लिये, डाॅ. अनीसुज्जमान, संयोजक एवं सॆयद अली अहसान और मईहरुल्लाह् इस्लाम, को बतौर, भाषा विशेषज्ञ, सहित एक समिति गठित हुई। गणपरिषद भवन, जो वर्तमान में प्रधानमंत्री का राजआवास है, में संविधान प्रणयन समिति की बैठक में ब्रिटिश संसद के प्रारूपण सांसद आई गैथरील भी शरीक हुए। संविधान को छापने में कुल १४ हजार टाका व्यय हुए थे।हसीम खान अलंकरण के दायित्वपति थे। १९४८ में निर्मित "क्र्याबटी ब्रांड" के दो ऑफ़सेट मशीनों पर संविधान छपा। मूल संविधान को बांग्लादेश के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित रखा गया है।[5]

मुख्य विशेषताएँ[संपादित करें]

अंश[संपादित करें]

यह संविधान एक अच्छी-खासी वर्गीकृत दस्तावेज़ है, इसमें कुल १५३ अनुच्छेद हैं, जिन्हें ११ भागों और २७ अनुसूचियों में विभाजित किया गया है। साथ ही, इस संविधान में संशोधन का भी प्रावधान भी है और इसमें २०१६ की स्थिति अनुसार १६ संशोधन भी हैं। इसके १५३ अनुछेधों को जिन ११ भागों में विभाजित किया गया है, वे किसी विशेष विशय से संबंधित व्याख्या करते हैं। इसके अलावा, सरकार व कानून संबंधित कार्य के लिये इसे २७ अनुसूचियों में भी विभाजित किया गया है।

भाग[संपादित करें]

इस संविधान में कुल ११ भाग हें(+ एक अधिक)। संविधान के भिन्न-भिन्न लेखों को संविधान के निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है:

  • भाग १— गणराज्य [अनुछेद १-७]
  • भाग २— राज्य की नीती के मूल सिद्धांत[अनुछेद ८-२५]
  • भाग ३— मूलाधिकार [अनुछेद २६-४७,४७क]
  • भाग ४— कार्यपालिका [अनुछेद ४८-६४] (५ पाठ)
  • भाग ५— विधानपालिका [अनुछेद ६५-९३] (३ पाठ)
  • भाग ६— न्यायपालिका [अनुछेद ९४-११७] (२ पाठ)
  • भाग ७— निर्वाचन [अनुछेद ११८-१२६]
  • भाग ८— नियंत्रक एवं महा लेखापरीक्षक [अनुछेद १२७-१३२]
  • भाग ९— बांग्लादेश की सेवाएँ [अनुछेद १३३-१४१]
  • भाग ९क— आपातकालीन प्रावधान [अनुछेद १४१क-१४१ग]
  • भाग १०— संविधान का संशोधन [अनुछेद १४२]
  • भाग ११— अन्य [अनुछेद १४३-१५३]

उद्देशिका[संपादित करें]

बांग्लादेश की संविधान की उद्देशिका संविधान की प्रस्तावना है, इसमें बांग्लादेशी राष्ट्र की मूल नीतियाँ व वैचारिक नींव को अंकित किया गया है। हालाँकि, यह संविधान का अंश है, परंतु यह एक न्यायिक लेख नहीं है, अतः किसी भी कानून या अन्य वस्तु को उद्देशिका में लिखी बातों के आधार पर न्यायिक चुनौती नहीं दी जा सकती है।

नीचे उद्देशिका के बंगाली व अंग्रेज़ी संस्करण दिया गया है, एवं उनका हिन्दी अनुवाद भी दिया गया है(अनुवाद बंगला संस्करण के आधार पर है)

क्रं बंगला संस्करण[6] अंग्रेज़ी संस्करण[7] हिन्दी अनुवाद
প্রস্তাবনা

আমরা, বাংলাদেশের জনগণ, ১৯৭১ খ্রীষ্টাব্দের মার্চ মাসের ২৬ তারিখে স্বাধীনতা ঘোষণা করিয়া ২[ জাতীয় স্বাধীনতার জন্য ঐতিহাসিক যুদ্ধের] মাধ্যমে স্বাধীন ও সার্বভৌম গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশ প্রতিষ্ঠিত করিয়াছি;

PREAMBLE

We, the people of Bangladesh, having proclaimed our Independence on the 26th day of March, 1971 and through a historic war for national independence, established the independent, sovereign People's Republic of Bangladesh;

प्रस्तावना

हम, बांग्लादेश के जनगणन, १९७१ ई. मार्च मास के २६ तारीख को स्वाधीनता धोषणा कर, [राष्ट्रीय स्वाधीनता हेतु ऐतिहासिक युद्ध के] माध्यम से स्वाधीन व सार्वभौमिक गणप्रजातंत्री बांग्लादेश की स्थापना की है;

আমরা অঙ্গীকার করিতেছি যে, যে সকল মহান আদর্শ আমাদের বীর জনগণকে জাতীয় স্বাধীনতার জন্য যুদ্ধে আত্মনিয়োগ ও বীর শহীদদিগকে প্রাণোৎসর্গ করিতে উদ্বুদ্ধ করিয়াছিল সর্বশক্তিমান আল্লাহের উপর পূর্ণ আস্থা ও বিশ্বাস, জাতীয়তাবাদ, গণতন্ত্র এবং সমাজতন্ত্র অর্থাৎ অর্থনৈতিক ও সামাজিক সুবিচারের সেই সকল আদর্শ এই সংবিধানের মূলনীতি হইবে; Pledging that the high ideals of absolute trust and faith in the Almighty Allah, nationalism, democ- racy and socialism meaning economic and social justice, which inspired our heroic people to dedi- cate themselves to, and our brave martyrs to sacrifice their lives in the war for national independ- ence, shall be fundamental principles of the Constitution; हम प्रण लेते हैं की, जो सारे महान आदर्श हमारे वीर गनगण के राष्ट्रीय स्वाधीनता के युद्ध में आत्मसमर्पण व वीर शहीदों को प्राणोत्सर्ग करने के लिये प्रेरित किया था सर्वशक्तिमान अल्लाह [ईश्वर] पर पूर्ण आशा व विश्वास, राष्ट्रवाद, गणतंत्र एवं समाजवाद अर्थात् अर्थनैतिक व सामाजिक न्याय वे सर्व आदर्श इस संविधान की मूलनीतियाँ होंगे;
আমরা আরও অঙ্গীকার করিতেছি যে, আমাদের রাষ্ট্রের অন্যতম মূল লক্ষ্য হইবে গণতান্ত্রিক পদ্ধতিতে এমন এক শোষণমুক্ত সমাজতান্ত্রিক সমাজের প্রতিষ্ঠা- যেখানে সকল নাগরিকের জন্য আইনের শাসন, মৌলিক মানবাধিকার এবং রাজনৈতিক, অর্থনৈতিক ও সামাজিক সাম্য, স্বাধীনতা ও সুবিচার নিশ্চিত হইবে; Further pledging that it shall be a fundamental aim of the State to realise through the democratic process to socialist society, free from exploitation-a society in which the rule of law, fundamental human rights and freedom, equality and justice, political, economic and social, will be secured for all citizens; हम यह भी संकल्प लेते हैं की, हमारे राष्ट्र का अन्यत्म मूल लक्ष होगा गणतांत्रिक पद्धती में ऐसा एक शोषणमुक्त समाजवादी समाज की स्थापना- जहाँ सभी नागरिकों के लिये कानून का शासन, मौलिक मानवाधिकार एवं राजनैतिक, अर्थनैतिक व सामाजिक समता, स्वाधीनता व न्याय निश्चित होगी;
আমরা দৃঢ়ভাবে ঘোষণা করিতেছি যে, আমরা যাহাতে স্বাধীন সত্তায় সমৃদ্ধি লাভ করিতে পারি এবং মানবজাতির প্রগতিশীল আশা-আকাঙ্খার সহিত সঙ্গতি রক্ষা করিয়া আন্তর্জাতিক শান্তি ও সহযোগিতার ক্ষেত্রে পূর্ণ ভূমিকা পালন করিতে পারি, সেইজন্য বাংলাদেশের জনগণের অভিপ্রায়ের অভিব্যক্তিস্বরূপ এই সংবিধানের প্রাধান্য অক্ষুণ্ন রাখা এবং ইহার রক্ষণ, সমর্থন ও নিরাপত্তাবিধান আমাদের পবিত্র কর্তব্য; Affirming that it is our sacred duty to safeguard, protect and defend this Constitution and to main- tain its supremacy as the embodiment of the will of the people of Bangladesh so that we may pros- per in freedom and may make our full contribution towards international peace and co-operation in keeping with the progressive aspirations of mankind; हम दृढ़ रूप से घोषणा करते हैं की, हम जिस प्रकार स्वाधीन सत्ता में समृद्धि लाभ कर पाते हैं एवं मानवजाती की प्रगतिशील आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप रक्षा करके अंतर्राष्ट्रीय शांति व सहयोगिता के क्षेत्र में पूर्ण भूमिका पालन कर पाते हैं, उसी प्रकार बांग्लादेश के लोगों के अभिप्राय में अभव्यक्तिस्वरूप इस संविधान के प्रधान्यता अक्षुण्ण रखने एवं इसकी रक्षा, समर्थन व निरापत्ताविधान हमारा पवित्र कर्तव्य है;
এতদ্বারা আমাদের এই গণপরিষদে, অদ্য তের শত ঊনআশী বঙ্গাব্দের কার্তিক মাসের আঠারো তারিখ, মোতাবেক ঊনিশ শত বাহাত্তর খ্রীষ্টাব্দের নভেম্বর মাসের চার তারিখে, আমরা এই সংবিধান রচনা ও বিধিবদ্ধ করিয়া সমবেতভাবে গ্রহণ করিলাম। In our Constituent Assembly, this eighteenth day of Kartick, 1379 B.S corresponding to the fourth day of November, 1972 A.D., do hereby adopt, enact and give to ourselves this Constitution. एतराज द्वारा हमारे इस गणपरिषद [संविधान सभा] में, अद्य तेरह शत उन्यासी बंगब्द [बंगाली सावंत] के कार्तिक मास की अठारह तारीख, मोतवेक उन्नीस सौ बहत्तर ई. नवंबर मास की चार तारीख को, हम इस संविधान रचना व विधिबद्ध कर संवेदना सहित अपनाते हैं।

संशोधन[संपादित करें]

बांग्लादेश के संविधान में संशोधन का प्रावधान भी दिया गया है। संविधान का भाग १०- अनुच्छेद १४२, संविधान में संशोधनों से संबंधित विषय को विस्तृत रूप से अंकित करता है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार संविधान में संशोधन के लिए राष्ट्रीय संसद के सदस्यसमूह के दो तिहाई संख्या के सकारात्मक मत की आवश्यक बताई गई है। अर्थात्, संविधान में संशोधन तभी लाया जा सकता है जब राष्ट्रीय संसद की दो तिहाई बहुमत इसके पक्ष में अपना मत दे। २०१६ की स्थिति अनुसार बांग्लादेश के संविधान में कुल १६ बार संशोधन किए गए हैं[8]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. बांग्लादेशी संविधान का अनुच्छेद १५३।
  2. Samarendra Nath Goshwami (ed), The Constitution (Thirteenth Amendment) Act's Case, Supreme Bar Building, Dhaka-1000, 2012, Page: 208-209.
  3. [1]
  4. পৃষ্ঠা-২৮, অধ্যায়- স্বাধীন বাংলাদেশ, NCTB প্রকাশিত বাংলাদেশ ও বিশ্বপরিচয় বই।
  5. প্রথম আলো ৪ঠা নভেম্বর ২০১০
  6. [2]
  7. [3]
  8. Rahman, Shameema (2014-11-10). "Bangladesh: Sixteenth Amendment to Constitution Empowers Parliament to Impeach Justices". The Library of Congress . http://www.loc.gov/law/foreign-news/article/bangladesh-sixteenth-amendment-to-constitution-empowers-parliament-to-impeach-justices/. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]