बहुध्रुव प्रसार

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बहुध्रुव प्रसार (multipole expansion) से आशय किसी क्षेत्र (विद्युत क्षेत्र, चुम्बकीय क्षेत्र आदि) को द्विध्रुव, चतुर्ध्रुव, षड्ध्रुव आदि के योग के रूप में देखना, न किसी एक विशेष ध्रुव के 'शुद्ध' रूप में। गणितीय दृष्टि से, यह किसी फलन को एक गणितीय श्रेणी के रूप में प्रदर्शित करता है जो कोण पर निर्भर करता है। ये श्रेणिया बहुत उपयोगी हैं क्योंकि इनके कुछ ही पदों को लेकर (तथा अन्य पदों को त्याग कर) भी मूल फलन पर्याप्त परिशुद्धता से निरूपित किया जा सकता है। जिस फलन का प्रसार किया जाता है वह अपने सर्वसामान्य रूप में समिश्र (कम्प्लेक्स) होता है।

बहुध्रुव प्रसार का उपयोग बहुधा विद्युतचुम्बकीय क्षेत्रों और गुरुत्वीय क्षेत्रों के अध्ययन और विश्लेषण में किया जाता है। अनेक स्थितियों में पाया जाता है कि किसी लघु क्षेत्र में स्थित स्रोतों के कारण किसी सुदूर बिन्दु पर उत्पन्न क्षेत्र की गणना करनी होती है। ऐसी स्थितियों में बहुध्रुवी प्रसार एक उपयोगी तकनीक सिद्ध होती है।