बर्था वॉन सटनर
| बर्था वॉन सटनर | |
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बर्था वॉन सटनर | |
| जन्म |
9 जून 1843 प्राग, ऑस्ट्रियाई साम्राज्य |
| मौत |
21 जून 1914 वियना, ऑस्ट्रिया-हंगरी |
| नागरिकता | ऑस्ट्रियाई |
| प्रसिद्धि का कारण | शांति आंदोलन, हथियार डाल दो (उपन्यास) |
| पुरस्कार | नोबेल शांति पुरस्कार (1905) |
बर्था सोफी फेलिसिटास वॉन सटनर (9 जून 1843 – 21 जून 1914) एक अत्यंत प्रख्यात ऑस्ट्रियाई लेखिका, उपन्यासकार और शांतिवादी समाज सुधारक थीं, जिन्हें वैश्विक शांति और युद्ध के विरोध में उनके ऐतिहासिक आंदोलनों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है[1]। वर्ष 1905 में उन्हें वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह इस महान और सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने वाली दुनिया की सबसे पहली महिला थीं और वर्ष 1903 में मैरी क्यूरी के बाद नोबेल जीतने वाली दूसरी महिला बनीं[2]। इसके अतिरिक्त वह यह पुरस्कार जीतने वाली पहली ऑस्ट्रियाई नागरिक भी थीं। उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण साहित्य और शांति आंदोलन आधुनिक मानव अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शांति संधियों को स्पष्ट रूप से समझने और स्थापित करने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
[संपादित करें]उनका जन्म 9 जून 1843 को ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के प्राग नामक एक अत्यंत ऐतिहासिक नगर में एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार में हुआ था। उनके पिता एक ऑस्ट्रियाई सेनापति थे, जिनका निधन उनके जन्म से पूर्व ही 75 वर्ष की आयु में हो गया था और उनकी माता उनसे 45 वर्ष छोटी थीं[3]। एक कुलीन सैन्य परिवार में जन्म लेने के बावजूद उनका बचपन अत्यंत आर्थिक कठिनाइयों के दौर में बीता था। बचपन से ही उनकी साहित्य, विदेशी भाषाओं और संगीत को समझने में अत्यधिक रुचि थी। उन्होंने घर पर ही अत्यंत उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त की और कई विदेशी भाषाओं (जैसे फ्रांसीसी, इतालवी और अंग्रेजी) में पूरी तरह से महारत हासिल कर ली थी। किशोरावस्था में उन्होंने एक ओपेरा गायिका बनने का भी गहन प्रयास किया था, परंतु मंच के अत्यधिक डर के कारण उन्हें इसमें सफलता प्राप्त नहीं हुई[4]।
विवाह और साहित्य रचना
[संपादित करें]आर्थिक कठिनाइयों के कारण वर्ष 1873 में उन्हें वियना में सटनर परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक के रूप में कार्य करना पड़ा। यहीं पर उनकी भेंट आर्थर वॉन सटनर से हुई और बाद में दोनों ने परिवार के विरोध के बावजूद गुप्त रूप से विवाह कर लिया[5]। विवाह के पश्चात वे जॉर्जिया चले गए जहाँ उन्होंने अपना जीवन यापन करने के लिए भाषाओं और संगीत की शिक्षा दी। इसी दौरान दोनों ने लेखन कार्य आरंभ किया। उनका सबसे बड़ा योगदान साहित्य के माध्यम से शांति की वकालत करना था। वर्ष 1889 में उन्होंने एक अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी उपन्यास लिखा, जिसे हिंदी में 'हथियार डाल दो' कहा जाता है। उनका यह उपन्यास उस समय यूरोप का सबसे अधिक बिकने वाला और लोकप्रिय साहित्य बन गया था। इस पुस्तक में उन्होंने युद्ध की क्रूरता, अमानवीयता और सैनिकों के परिवारों की पीड़ा का अत्यंत सजीव चित्रण किया था।
अल्फ्रेड नोबेल के साथ मित्रता
[संपादित करें]विवाह से पूर्व वर्ष 1876 में वे पेरिस चली गईं थीं और वहाँ उन्होंने महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की सचिव के रूप में कार्य किया था। हालाँकि उन्होंने यह कार्य केवल कुछ ही सप्ताह के लिए किया था, परंतु दोनों के बीच जीवन भर के लिए एक अत्यंत गहरी मित्रता स्थापित हो गई। वे लगातार एक-दूसरे को पत्र लिखते रहे। उन्होंने अल्फ्रेड नोबेल को शांतिवाद और युद्ध के विनाशकारी प्रभावों के बारे में इतने उत्कृष्ट तर्क दिए कि नोबेल का हृदय परिवर्तन हो गया। यह उन्हीं के विचारों का अत्यंत गहरा प्रभाव था कि अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में विज्ञान और साहित्य के साथ-साथ शांति के लिए भी एक अलग पुरस्कार देने की अत्यंत ऐतिहासिक घोषणा की थी।
पुरस्कार और सम्मान
[संपादित करें]साहित्य और वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 1905 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। वे केवल एक लेखिका नहीं थीं, बल्कि उन्होंने ऑस्ट्रियाई शांति समाज की भी स्थापना की थी और वे अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलनों की एक अत्यंत प्रमुख वक्ता थीं। वर्ष 1907 में हेग शांति सम्मेलन में भाग लेने वाली वे एकमात्र महिला थीं। 21 जून 1914 को 71 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना नगर में कैंसर के कारण उनका शांतिपूर्ण निधन हो गया। उनके निधन के ठीक सात दिन बाद ही प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया था, जिसकी विनाशकारी चेतावनी वे अपने पूरे जीवन काल में देती रही थीं। उनके सम्मान में आज भी यूरोप की कई सड़कों और सिक्कों पर उनका नाम और चित्र अंकित है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ नोबेल पुरस्कार समिति: बर्था वॉन सटनर की जीवनी और तथ्य
- ↑ एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: बर्था वॉन सटनर का प्रामाणिक जीवन परिचय
- ↑ विश्व इतिहास में महिलाएं: उन्नीसवीं सदी की महान सामाजिक कार्यकर्ता
- ↑ हिस्ट्री चैनल: इतिहास की महान महिलाएं और उनके योगदान
- ↑ प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग: हथियार डाल दो उपन्यास का ऐतिहासिक महत्व