बदरुद्दीन तैयबजी

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बदरुद्दीन तैयबजी का जन्म बम्बई अब के मुंबई प्रान्त में8 अक्टूबर1844 को एक धनी इस्लामी परिवार में हुआ था।अपनी प्राम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद क़ानून की शिक्षा प्राप्त करने ये इंग्लैंड गए और वहाँ से बैरिस्टर बन लौटे। उसके पश्चात मुम्बई हाई कोर्ट में वकालत शुरू किया। जब उन्होंने वकालत शुरू की तब मुम्बई हाई कोर्ट में कोई वकील या जज भरतीय नही था।उन्होंने मुंबई में "मुम्बई प्रेसिडेंट एसोसिएशन" था मुसलमानो में शिक्षा का प्रचार करने के लिए"अंजुमने इस्लाम" नामक संस्था बनाई।फिरोज शाह मेहता,दादाभाई नौरोजी, उमेशचंद्र बैनर्जी के संपर्क में आकर उन्होंने सावर्जनिक कार्यो में भी रुचि लेने प्राम्भ कर दिया।बाद में उनकी नियुक्ति के न्यायाधीश पद पर हुई।बल गंगाधर तिलक पर राष्ट्रद्रोह के मुकदमे में तिलक को जमानत पर छोड़ने का साहसिक फैसला तैयबजी ने ही किया।19 अगस्त1909 को उनकी मृत्यु हो गई।मृत्यु के पूर्व वो भरतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर भी आसीन हुए।