बकेवर

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बकेवर
Bakewar
बकेवर की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
बकेवर
बकेवर
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 26°39′47″N 79°10′30″E / 26.663°N 79.175°E / 26.663; 79.175निर्देशांक: 26°39′47″N 79°10′30″E / 26.663°N 79.175°E / 26.663; 79.175
ज़िलाइटावा ज़िला
राज्यउत्तर प्रदेश
देशFlag of India.svg भारत
जनसंख्या (2011)
 • कुल14,965
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)

बकेवर (Bakewar) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के इटावा ज़िले में स्थित एक नगर है।[1][2]

नामोत्पत्ति[संपादित करें]

मान्यता है कि हिंदू पुराण महाभारत के अनुसार बकासुर नामक राक्षस इस स्थान पर रहता था। बकासुर की वजह से ही इस स्थान का नाम बकेवर पड़ा।

महत्वपूर्ण स्थान[संपादित करें]

  • वन खंडेश्वर महादेव (भगवान का ऐतिहासिक शिव लिंग) - बकेवर बिजली घर के पीछे राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। मंदिर में स्थापित शिव लिंग पांच हजार वर्ष से अधिक पुराना है। महाभारत के समय मंदिर में भगवान शिव लिंग अस्तित्व में था, जिसकी स्थापना श्री भीम (पांडव के दूसरे पुत्र) ने बकासुर से युद्ध लड़ने से पहले की थी। बकासुर ज्यादा मात्रा में भोजन खाता था। क्षेत्र के ग्रामीण डर एवं भय के कारण राक्षस के लिए भोजन प्रदान करते थे। एक समय के बाद दानव ने भूख के कारण स्थानीय क्षेत्र के लोगों को भी खाना शुरू कर दिया। अज्ञातवास की अवधि में स्थानीय ग्रामीणों के दर्द को देखने के पश्चात कुंती के निर्देश के तहत, उन्होंने अपने पुत्र भीम को भोजन के साथ में बकासुर का वध करने को भेजा। बकासुर से युद्ध लड़ने से पहले श्री भीम ने इस शिवलिंग का पूजन किया। लंबी लड़ाई के बाद श्री भीम ने बकासुर को मार डाला और पास मे चक्रनगरी मे उसे कुएं के अन्दर डाल कर कुएं को ढक दिया।
  • मघई (पुरानी ऐतिहासिक तालाब) - मघई नामक एक विशाल तालाब शहर दो तिहाई हिस्से को घेरता हैं यह तालाब बकेवर के लोगों को असामाजिक तत्वों से सुरक्षा प्रदान करता है। श्री भीम और बकासुर राक्षस के बीच युद्ध लड़ने की वजह से मैदान में बड़ी संख्या में यहाँ गड्ढे हो गये थे,कालान्तर गड्ढों में पानी भरने की वजह से यह एक बड़ा तालाब बन गया है जिसे मघई कहा जाता है। बकेवर के लोग मानते हैं कि मघई श्री भीम और राक्षस बकासुर की लड़ाई का प्रतीक है।
  • देवी सती का मंदिर - भर्थना रोड पर स्थित देवी सती मंदिर बकेवर के लोगों और आसपास के कई अन्य गांवों के विश्वास का प्रतीक है।
  • माँ कालका देवी का मंदिर - लखना रोड पर 3 किमी पर स्थित मां कालका देवी मंदिर पुराना है। नवरात्र में कई लोग दूर दूर से यहां माँ कालका देवी मंदिर की पूजा करने आते हैं। यहां एक तालाब है जिसे पक्का तालाब कहा जाता है। मां कालका देवी लोगों की पूजा करने से पहले यहां स्नान करने की प्रथा है और कुछ लोग पहली बार अपने नवजात शिशु के मुंडन करवाने के लिये आते हैं।

सड़क यातायात[संपादित करें]

राष्ट्रीय राजमार्ग १९ यहाँ से गुज़रता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  2. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance Archived 23 अप्रैल 2017 at the वेबैक मशीन.," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975