फोरेंसिक कीटविज्ञानी अपघटन

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न्यायिक कीटविज्ञान, न्यायालयिक कीटविज्ञान की एक शाखा है, जो आपराधिक जांच करने के लिए कीड़ों का अध्ययन करता है। और आमतौर पर पोस्टमार्टम अंतराल के आकलन के लिए मौत की जांच में इस्तेमाल किया जाता है।.[1][2] एक तरीका इस अनुमान को प्राप्त करने का है समय और किट उपनिवेशवाद के पैटर्न का पता करना। इस विधि से एक अनुमान प्रदान होता है कि कीट की गतिविधि जो की सहसंबंधी कर सकता है मृत्यु के समय को।[3]

अपघटन[संपादित करें]

अपघटन एक सतत प्रक्रिया है जो कि आमतौर पर चरणों में विभाजित किया गया है।

अपघटन के ताजा चरण में सुअर शव

[4][5] जब अपघटन का अध्ययन करते है कीटविज्ञानी के दृष्टिकोण से और मानव मृत्यु की जांच करने के लिए डेटा को लागू करने के प्रयोजन के लिए तो घरेलू सुअर का अध्ययन किया जाता है। कीटविज्ञान अध्ययन में अपघटन के पांच चरणों में आमतौर पर वर्णित हैं;

  • ताजा चरण
  • ब्लोट चरण
  • सक्रिय क्षय चरण
  • उन्नत क्षय चरण
  • सूखा क्षय चरण
    अपघटन के ब्लोट चरण मे सूअर शव


  • ताजा चरण
अपघटन के सक्रिय क्षय चरण मे सूअर शव
अपघटन के उन्नत क्षय चरण मे सूअर शव
अपघटन के सूखा क्षय चरण मे सूअर शव

अपघटन के ताजा चरण आम तौर पर मृत्यु के क्षण और जब ब्लोट का पहला लक्षण स्पष्ट और बीच की अवधि के रूप में वर्णन किया जाता है। उसमे शरीर पर कोई भौतिक परिवर्तन नहीं आता है। कोई गंध भी नहीं होती। विघटित अवशेष पर पहुंचने के लिए पहली कीड़े आमतौर पर केल्लीफोरिडी होते है और यह १-२ घंटे मे अपने अंडे जमा कर देती है। चींटिया भी दिखाए देती है कई बार।

  • ब्लोट चरण

ब्लोट चरण के पहले संकेत पेट की मामूली मुद्रास्फीति और नाक पर खून के बुलबुले दिखाई देते हैं। पेट में अनेरोबिक बैक्टीरिया की गतिविधि से गैसों का उत्पन होता हैं। शरीर का रंग भी बदल जाता है। पिओफिलीडी और फन्नीडी ब्लोट चरण के दौरान आती है।

  • सक्रिय क्षय चरण

सक्रिय क्षय चरण की शुरुआत मे डीपटेरन लार्वा पियर्स के रूप में शव की त्वचा को खाता है और आंतरिक गैसे निकलती है। मजबूत गंध फेल जाती है। सेप्सीडै के सदस्यों सक्रिय क्षय चरण मे ही आते हैं।

  • उन्नत क्षय चरण

बहुत सा मांस शरीर से निकल जाता है इस चरण मे। कुछ मांस पेट की गुहा में रह सकता है। अपघटन के मजबूत गंध फीके होने लगते हैं। एडल्ट डरमेसटीड (त्वचा बीटल) के शव पर पहुंचते हैं।

  • सूखा क्षय चरण

अपघटन के अंतिम चरण में शुष्क रहता है। कोई गंध अवशेष नहीं होते है। प्रजातियों में से सबसे बड़ी संख्या में देर से क्षय और सूखी चरणों में पाए जाते हैं। सिर्फ हड्डियो का ढांचा रहे जाता है।

अपघटन प्रभावित करने वाले कारक[संपादित करें]

कई कारक अपघटन पर प्रभाव करते है, जैसे की;

  • तापमान और जलवायु

कम तापमान आम तौर पर झटका-मक्खियों की गतिविधि और एक शरीर के अपने उपनिवेश की स्थापना को धीमा कर देता है। और उच्च तापमान गतिविधि को बड़ा देता है।

  • पहनावा

किसी प्रकार के पहनावा से अपघटन की दर पर प्रभाव पड़ता है क्योंकि वह अवरोध करते है उस पर कुछ होने से।

  • लाश के शरीर में वसा प्रतिशत

शरीर पर अधिक वसा तेजी से अपघटन होती है।


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Catts E.P.; Goff M.L. (1992). "Forensic entomology in criminal investigations". Annual Review of Entomology. 37: 253–272. PMID 1539937. डीओआइ:10.1146/annurev.en.37.010192.001345.
  2. Anderson G.S.; VanLaerhoven S.L. (1996). "Initial studies on insect succession on carrion in southwestern British Columbia". Journal of Forensic Sciences. 41 (4): 617–625. डीओआइ:10.1520/JFS13964J.
  3. Goff, M.L. (1993). "Estimation of postmortem interval using arthropod development and successional patterns" (PDF). Forensic Science Review. 5 (2): 81–94. मूल से 4 मार्च 2016 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 25 अक्तूबर 2016.
  4. Payne, J.A. (1965). "A summer carrion study of the baby pig sus scrofa Linnaeus". Ecology. 46 (5): 511–523. डीओआइ:10.2307/1934999.
  5. Grassberger M.; Frank C. (2004). "Initial study of arthropod succession on pig carrion in a central Europe urban habitat". Journal of Medical Entomology. 41 (3): 511–523. डीओआइ:10.1603/0022-2585-41.3.511.