फोनोफ़ोबिया, जिसे लीगीरोफोबिया अथवा सोनोफोबिया ऊँची ध्वनि से घृणा अथवा डर है—जिसे एक तरह का विशिष्ट भय कह सकते हैं। यह खुद की आवाज अथवा किसी अन्य की आवाज का डर भी हो सकता है।[1] यह बहुत ही कम पाया जाने वाला रोग का लक्षण है जिसे अक्सर ह्यपेराक्सिस के रोगी लक्षण के रूप में भी देखा जाता है। सोनोफोबिया किसी रोगी की ध्वनि के प्रति अति संवेदनशीलता को कहा जाता है जो अधकपारी के निदान का भाग हो सकता है। कभी कभी इसे अकॉस्टिकोफोबिया भी कहा जाता है।[2]