फाइलाइट
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फाइलाइट चट्टान का एक प्राकृतिक नमूना, जिसमें इसकी विशिष्ट लहरदार सतह और रेशमी चमक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। | |
| बनावट | |
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| क्वार्ट्ज, सेरीसाइट (माइका) और क्लोराइट |
फाइलाइट एक प्रकार की पत्रित रूपांतरित शैल है। इसका निर्माण मुख्य रूप से स्लेट नामक चट्टान के उच्च-स्तरीय रूपांतरण से होता है। इस भूवैज्ञानिक प्रक्रिया में अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण चट्टान के भीतर मौजूद बहुत बारीक सफेद माइका (अभ्रक) के कण एक निश्चित दिशा में संरेखित हो जाते हैं।[1] मुख्य रूप से यह चट्टान क्वार्ट्ज, सेरीसाइट (एक प्रकार का माइका) और क्लोराइट खनिजों के सूक्ष्म क्रिस्टलों से मिलकर बनी होती है।[2]
भौतिक विशेषताएँ और भूवैज्ञानिक वर्गीकरण
[संपादित करें]रूपांतरित चट्टानों के वर्गीकरण में, फाइलाइट मेटामॉर्फिज्म (रूपांतरण) की डिग्री के मामले में स्लेट और शिस्ट के बीच की एक अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है:
- स्लेट: इसमें माइका के कण अत्यंत बारीक होते हैं।
- फाइलाइट: इसमें माइका के कण स्लेट से थोड़े बड़े होते हैं, लेकिन फिर भी नंगी आँखों से आसानी से नहीं देखे जा सकते।
- शिस्ट: इसमें माइका के कण काफी बड़े होते हैं और स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
फाइलाइट की विखंडन सतहों पर ग्रेफाइट, सेरीसाइट, क्लोराइट या पारभासी सफेद माइका के सूक्ष्म क्रिस्टलों के कारण एक विशिष्ट रेशमी या सुनहरी चमक दिखाई देती है। भूविज्ञान में इस विशिष्ट चमक को "फाइलाइटिक लस्टर" कहा जाता है। इस चट्टान का नाम ग्रीक शब्द फाइलोन से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ "पत्ता" होता है।[3]
भूवैज्ञानिक उत्पत्ति
[संपादित करें]फाइलाइट का प्रोटोलिथ यानी इसकी मूल चट्टान 'शेल' या 'पेलाइट' होती है। कई बार यह सीधे स्लेट से भी बनती है (जो स्वयं शेल से बनी होती है)। आमतौर पर इसे निम्न-श्रेणी के क्षेत्रीय मेटामॉर्फिज्म के माध्यम से बनी चट्टान के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
इस चट्टान में उत्कृष्ट विखंडनीयता होती है, जिसका अर्थ है कि यह आसानी से पतली चादरों या परतों में टूट सकती है। इसका रंग आमतौर पर काला, धूसर या हल्का हरा-धूसर होता है। इसकी सतह पूरी तरह से सपाट होने के बजाय अक्सर झुर्रीदार या लहरदार दिखाई देती है।
व्यावसायिक उपयोग और वैश्विक उपस्थिति
[संपादित करें]वास्तुशिल्प और औद्योगिक उपयोग: अपनी परतों में टूटने की क्षमता और सुंदर चमक के कारण फाइलाइट का उपयोग सजावटी पत्थरों, आंतरिक साज-सज्जा, भवन निर्माण, और बगीचों की सजावट (लैंडस्केपिंग) के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग कब्रों के पत्थर, स्मारक पट्टिकाएं, कलाकृतियां उकेरने और लिखने वाली स्लेट बनाने में भी होता है।
वैश्विक वितरण:
- यूरोप: यह चट्टान स्कॉटलैंड के उत्तर-पश्चिमी आइल ऑफ अरान के डालराडियन मेटासेडिमेंट्स में आम रूप से पाई जाती है। इसके अलावा उत्तरी कॉर्नवॉल (इंग्लैंड) में इसके ट्रेडोर्न फाइलाइट्स और वूलगार्डन फाइलाइट्स नामक विशेष भंडार मौजूद हैं।[4]
- उत्तरी अमेरिका: संयुक्त राज्य अमेरिका में 'कैरोलिना स्लेट' अक्सर ज्वालामुखीय फाइलाइट होती है। इसका एक विशिष्ट और प्रसिद्ध प्रकार 'ड्यूक स्टोन' है। यह एक डेसिटिक फाइलाइट है जिसका उपयोग ड्यूक विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में किया गया है। आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण इसमें विशिष्ट रंग उभर कर आते हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Marshak, Stephen. Essentials of Geology (3rd ed.).
- ↑ Mottana, Annibale; Crespi, Rodolfo; Liborio, Giuseppe (1978). Simon & Schuster's Guide to Rocks and Minerals. New York: Simon & Schuster Inc.
- ↑ Schumann, Walter (1993). Handbook of Rocks, Minerals, & Gemstones. Boston & New York: Houghton Mifflin Company.
- ↑ Barton, R. M. (1964). An Introduction to the Geology of Cornwall. Truro: D. Bradford Barton; p. 89.