फ़ारस की खाड़ी नाम से सम्बंधित दस्तावेज़ें: एक प्राचीन व अनन्त विरासत

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फ़ारस की खाड़ी नाम से सम्बंधित दस्तावेज़ें: एक प्राचीन व अनन्त विरासत ‘मोहम्मद अजम’ द्वारा लिखी और संकलित की गई किताब और एटलस है।[1] पहली बार साल 2004 में प्रकाशित इस किताब का दूसरा संस्करण साल 2008 में डाक्टर पीरोज़ मुजतहिदज़ादेह और डाक्टर मोहम्मद हसन गंजी की निगरानी में प्रकाशित किया गया। वर्ष 2010 में यह किताब सर्वश्रेष्ठ किताब का उम्मीदवार बनी थी। यह फ़ारस की खाड़ी के नाम से संबंधित विवाद के बारे में ईरान में पिछले पचास वर्षों में प्रकाशित की गई श्रेष्ठ किताबों में से एक मानी जाती है।

इस किताब का पहला अध्याय ‘’फ़ारस की खाड़ी ’’ के नाम से संबंधित राजनीतिक व भौगोलिक विवादों, फ़ारस का खाड़ी के नाम से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेजों और फ़ारस की खाड़ी के नामकरण के बारे में कुछ दिनों पहले उठने वाले विवाद पर आधारित है।

  • 1-1 मुसलमान पर्यटकों और यूरोपीय भूगोलविदों सहित, प्राचीन पर्यटकों और भूगोलविदों के फ़ारस की खाड़ी से संबंधित अभिलेख और विवरण।

अध्याय दो, भाग छ:, ईरान के नाम अध्याय दो भाग 1 नक़्शों, एटलसों और नक़्शों के इतिहास के बारे में चर्चा करता है।

  • फ़ारस की खाड़ी और इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ऐटलसों में से कुछ इस प्रकार हैं।

फ़ारस की खाड़ी

Persian gulf documents
  • [2]
  • 1 ऐटलस आफ़ दी अरेबिया पैनिनसुला इन ओल्ड यूरोपीयन मैप्स (253 नक़्शे) ख़ालिद अलअंबारी, इंस्टीट्यूट डू मौण्डे अरबे, पेरिस और तूनिशिया विश्वविध्यालय 2001

इस ऐटलस के समस्त 253 नक़्शे तीन भाषाओं में रंगीन छापे गए हैं और इन सब में फ़ारस की खाड़ी का सही नाम लिखा गया है। इस के अलावा प्रष्ठ संख्या 141,226,323,322,331,345,347,363 और 355 पर जो नक़्शे दिए गए हैं उनमें खाड़ी की जगह फ़ारस की खाड़ी नाम का उपयोग किया गया है और अरब सागर व ओमान की खाड़ी के पानी के मौजूदा क्षेत्र को फ़ारस का सागर लिखा गया है। उदाहरण के तौर पर एच. एस. बंटिग का नक़्शा संख्या 34/24 सी. एम. हनोवर 1620.

  • 2 ऐटलस आफ़ हिस्टोरिकल मैप्स आफ़ दी गल्फ़, सुल्तान मोहम्मद अलकसीमी शारजाह। इस में फ़ारस की खाड़ी के 500 नक़्शे सम्मिलित हैं।
  • 3 ऐटलस आफ़ इराक़ इन ओल्ड मैप्स, अहमद सूसा। इस किताब में अरब व इस्लामी स्त्रोतों से 39 नक़्शे लिए गए हैं और इन सब में फ़ारस की खाड़ी के सही नाम अर्थात फ़ारस का सागर का उपयोग किया गया है।
  • 4 दुनिया के नक़्शे में कुवैत 1992. इस में 80 नक़्शे सम्मिलित किए गए हैं जिन सब में फ़ारस की खाड़ी का नाम उपयोग किया गया है।
  • 5 ऐतिहासिक नक़्शे में कुवैत, 200 नक़्शे, 1994
  • 6 रूट्स आफ़ कुवैत, 15 नक़्शे, 1991

.[2]

  • 7 ईरानोलोजी फाउण्डेशन द्वारा ऐतिहासिक नक़्शों में फ़ारस की खाड़ी का विवरण। इस में इस्लामी विद्वानों द्वारा तैयार किए गए 40 नक़्शे और साल 1500 से 1900 तक के युग से संबंधित प्रसिद्ध यूरोपीय मानचित्रकारों द्वारा तैयार किए गए 120 नक़्शे सम्मिलित हैं। डाक्टर हसन हबीबी, 2007, तेहरान। इन समस्त नक़्शों में फ़ारस की खाड़ी नाम का उपयोग किया गया है।

बहुत से और भी ऐटलस प्रकाशित किए गए हैं जिन सब का विवरण इस किताब: फ़ारस की खाड़ी नाम से संबंधित दस्तावेज़ में दिया गया है।

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Names, routes and locations of the Periplus of the Erythraean Sea.
published2004
फारस की खाड़ी
फारस की खाड़ी - अंतरिक्ष से फारस की खाड़ी का दृश्य
अंतरिक्ष से फारस की खाड़ी का दृश्य
स्थिति मध्य पूर्व एशिया
सागर प्रकार Gulf
प्राथमिक स्रोत ओमान का सागर
तटवर्ती क्षेत्र Iran, Iraq, Kuwait, Saudi Arabia, Qatar, Bahrain, United Arab Emirates and Oman (exclave of Musandam)
अधिकतम लंबाई 989 कि.मी. (615 मील)
अधिकतम चौड़ाई  (min)
सतही क्षेत्र 2,51,000 कि.मी. (97,000 वर्ग मील)
औसत गहराई 50 मी. (160 फुट)
अधिकतम गहराई 90 मी. (300 फुट)

ईरान में 30 अप्रैल का दिन फ़ारस की खाड़ी का राष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन पूरे ईरान में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। फारस की खाड़ी, मध्य पूर्व एशिया क्षेत्र में हिन्द महासागर का एक विस्तार है, जो ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच तक गया हुआ है।[3] [4]

30 अप्रैल 1622 को शाह अब्बास की सेना हुर्मुज़ बंदरगाह में पुर्तगालियों को पराजित करने में सफ़ल हुई। ईरान की ग़ैर सरकारी संस्थाओं ने वर्ष 2004 में 30 अप्रैल के दिन को “फ़ारस की खाड़ी का राष्ट्रीय दिवस” के तौर पर मनाने का निर्णय लिया। ईरान की सरकार ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। वास्तव में 30 अप्रैल को दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुई। एक तो देश से पुर्तगाली उपनिवेशकवाद का निष्कासन हुआ और दूसरे यह कि इस दिन यह निर्णय लिया गया कि फ़ारस की खाड़ी के ऐतिहासिक तथा प्राचीन नाम को देखते हुए हर साल 30 अप्रैल का दिन “फ़ारस की खाड़ी का राष्ट्रीय दिवस” के तौर पर मनाया जाए। यह नाम तथा शब्द विश्व की समस्त भाषाओं में 2400 वर्ष पूर्व से लेकर 1964 तक सरकारी व अंतर्राष्ट्रीय नाम रहा है। किन्तु अरब देशों ने 1964 में गुप्त तौर पर निर्णय लिया कि फ़ारस की खाड़ी का नाम बदल कर अरब की खाड़ी रख दिया जाए।

ईरानी लोग इस निर्णय को अरब भेद भाव व क़ौमपरस्ती के एक नमूने के तौर पर देखते हैं। उन का मानना है कि जमाल अब्दुल नासिर के दौर तक किसी अरबी दस्तावेज़ या पत्र में अरब की खाड़ी शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है और अरब दुनिया की सांस्कृतिक धरोहर कही जाने वाली समस्त महत्वपूर्ण पुस्तकों में “फ़ारस सागर’’ या “फ़ारस की खाड़ी’’ जैसे शब्द ही पाए जाते हैं। इसीलिए ईरानियों ने इस दिन को “फ़ारस की खाड़ी का राष्ट्रीय दिवस” का नाम दिया है ताकि इस ऐतिहासिक तथा प्राचीन नाम को बदलने के लिए की जा रही कोशिशों को रोका जा सके। ईरानियों का कहना है कि यदि सागरों के नाम ही बदले जाने हैं तो फिर अरब सागर का नाम बदल कर मकरान सागर किया जाना चाहिए क्योंकि इस के चारों ओर लगभग सौ करोड़ से अधिक ग़ैर अरब लोग आबाद हैं और इस नाम का उपयोग भी पुर्तगाली उपनिवेशवाद के दौर में ही शुरु हुआ था।

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सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. کتاب اسناد نام خلیج فارس؛ میراثی کهن و جاودان منشر شد
  2. साँचा:یادکرد وب
  3. Working Paper No. 61, UNITED NATIONS GROUP OF EXPERTS ON GEOGRAPHICAL NAMES, dated March 28, April 4, 2006 ([1]); accessed February 09, 2007
  4. IRIB

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

निर्देशांक: 26°54′17″N 51°32′51″E / 26.90472°N 51.54750°E / 26.90472; 51.54750

  • مستند خلیج فارس 1 سیما[4]
  • سمینار خلیج فارس 10 اردیبهشت 1390 در 1390. ؟[5]
  • Documents on the Persian Gulf's name : the eternal heritage of ancient time

Author: Ajam, Muḥammad.]] [6]

  • دریای پارس

[7]

  • [8]
  • Writer of the book titled “Documents on the Persian Gulf's name : the eternal heritage of ancient time” noted that the Iranian president’s travel to Abu Mussa is not contrary to the 1971 Memorandum of Understanding[9]
  • نقشه هاواسنادنام خلیج فارس و جزایر آن- دکتر عجم بنیاد ایران شناسی، 1387[10]