प्लुस उल्त्रा

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स्पेन का शाही कुलचिह्न, जिसके दोनों ओर हरक्यूलिस के स्तंभ हैं जिन पर प्लुस उल्त्रा लिखा हुआ है।
अल हम्रा में चार्ल्स पंचम के महल में लकड़ी का चौखटा

प्लुस उल्त्रा (Plus ultraलातिन भाषा में "यहाँ से और परे") स्पेन का राष्ट्रवाक्य है। इसे चार्ल्स पंचम, पवित्र रोम सम्राट और स्पेन के राजा, के निजी ध्येयवाक्य से लिया गया है। यह "नोन प्लुस उल्त्रा" ("यहाँ से परे कुछ नहीं") वाक्यांश का विपरीत है। कह जाता है कि यह जिब्राल्टर जलसन्धि में मौजूद हरक्यूलिस के स्तंभ में चेतावनी के रूप में लिखा गया था, जो उस समय पूर्वजगत का छोर था। चार्ल्स ने इस ध्येयवाक्य को कोलम्बस द्वारा नवजगत के खोज के बाद अपनाया था, और इसमें जोख़िम लेने और उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के मायने हैं।

चार्ल्स पंचम[संपादित करें]

इस ध्येयवाक्य का सुझाव १५१६ में चार्ल्स के चिकित्सक और सलाहकार लुइजी मारलियानो ने दिया था। [1] यह मारलियानो के सम्पूर्ण पूर्वजगत पर राज करने वाले एक ईसाई साम्राज्य के सपने का प्रतीक था। इसका संबंध ख़ास तौर पर रीकोन्कीसता को जिब्राल्टर के पार उत्तर अफ़्रीका में ले जाने के चाह से था। १५२० में चार्ल्स के बुरगोस में जीत के बाद प्रवेश करने के अवसर पर एक विजय चाप का निर्माण हुआ जिसके एक तरफ़ प्लुस उल्त्रा और दूसरी तरफ़ "पूरा अफ़्रीका रो रहा है क्योंकि वह जानता है कि आप के पास चाबी (जिब्राल्टर) है और आप उसके स्वामी हैं"।

ध्येयवाक्य को पहली बार ब्रुसेल्स के संत गुदूल के गिरिजाघर में चार्ल्स के कुर्सी पर लिखा गया था। मूल फ़्रांसीसी वाक्यांश को लातिन में अनुवादित किया गया क्योंकि स्पेनी लोग चार्ल्स के फ़्रांसीसी सलाहकारों और मंत्रियों से नाख़ुश थे। 

स्पेन[संपादित करें]

चार्ल्स के मौत के बाद भी यह ध्येयवाक्य स्पेन में प्रसिद्ध रहा। इसे हैब्सबर्ग प्रचार में इस्तेमाल किया जाता था और स्पेनी खोजियों को स्तंभ पर लिखे चेतावनी को न मानकर जिब्राल्टर के परे जाने के प्रोत्साहित किया जाता था। आज यह स्पेन के ध्वज और कुलचिह्न दोनों पर मौजूद है।

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Ferer, Mary Tiffany (2012). Music and Ceremony at the Court of Charles V. The Boydell Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781843836995.