प्रा. वासुदेव विष्णुदयाल

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प्रा. वासुदेव विष्णुदयाल ने अकेले ही मारीशस में हिन्दी की इतनी सेवा की जितनी शायद कोई संस्था करती। जमाना के संपादक के अतिरिक्त उन्होंने लगभग ५०० पुस्तकें हिन्दी तथा अन्य भाषाओं में लिखीं। जन आंदोलन द्वारा उन्होंने अपूर्व धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सुधार के कार्य किए। उनके त्यागमय जीवन सा आज भी मारीशस प्रेरणा लेता है। उन्होंने परोक्ष रूप से अपने समय की राजनीति की भी प्रभावित किया। मारीशस में उनके अनेक शिष्य आज भी हिंदी के विकास के कार्य में संलग्न हैं।[1]


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. पांडेय, राकेश (जनवरी अक्टूबर-दिसम्बर २००५). मारीशस में हिन्दी एक सिंहावलोकन. गीता कालोनी, नई दिल्ली: प्रवासी संसार. पृ॰ १३-१९. |year= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)