प्रेम मन्दिर

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प्रेम मन्दिर
प्रेम मन्दिर का बाहरी दॄश्य
प्रेम मन्दिर का बाहरी दॄश्य
प्रेम मन्दिर स्थित है उत्तर प्रदेश
प्रेम मन्दिर
प्रेम मन्दिर
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 27°34′19″N 77°40′19″E / 27.5719808°N 77.6719344°E / 27.5719808; 77.6719344निर्देशांक: 27°34′19″N 77°40′19″E / 27.5719808°N 77.6719344°E / 27.5719808; 77.6719344
स्थान
देश: भारत
राज्य: उत्तर प्रदेश
जिला: मथुरा
स्थिति: वृंदावन
ऊंचाई: 169.77 मी॰ (557 फीट)
मंदिर का ब्यौरा
प्रमुख देवता: कृष्ण
प्रमुख देवी: राधा
प्रमुख उत्सव: जन्माष्टमी
स्थापत्य शैली एवं संस्कृति
स्थापत्य शैलियाँ: हिन्दू स्थापत्य शैली
इतिहास
निर्माण तिथि: २०१२[1]
सृजनकर्त्ता: जगद्गुरु कृपालु जी महाराज

प्रेम मंदिर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृंदावन में स्थित है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया गया है।[2] प्रेम मन्दिर का लोकार्पण १७ फरवरी को किया गया था। इस मन्दिर के निर्माण में ११ वर्ष का समय और लगभग १०० करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। इसमें इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इसे राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने तैयार किया है। इस मन्दिर का शिलान्यास १४ जनवरी २००१ को कृपालुजी महाराज द्वारा किया गया था।[3] ग्यारह वर्ष के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मन्दिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है।[2] मन्दिर दिल्ली – आगरा – कोलकाता के राष्ट्रीय राजमार्ग २ पर छटीकरा से लगभग ३ किलोमीटर दूर वृंदावन की ओर भक्तिवेदान्त स्वामी मार्ग पर स्थित है। यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का एक नमूना है।

इतिहास[संपादित करें]

प्रेम मन्दिर का मुख्य प्रवेश द्वार

सम्पूर्ण मन्दिर ५४ एकड़ में बना है तथा इसकी ऊँचाई १२५ फुट, लम्बाई १२२ फुट तथा चौड़ाई ११५ फुट है।[3] इसमें फव्वारे, राधा-कृष्ण की मनोहर झाँकियाँ, श्री गोवर्धन लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला की झाँकियाँ उद्यानों के बीच सजायी गयी है। यह मन्दिर वास्तुकला के माध्यम से दिव्य प्रेम को साकार करता है। सभी वर्ण, जाति, देश के लोगों के लिये खुले मन्दिर के लिए द्वार सभी दिशाओं में खुलते है। मुख्य प्रवेश द्वारों पर आठ मयूरों के नक्काशीदार तोरण हैं तथा पूरे मन्दिर की बाहरी दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को शिल्पांकित किया गया है। इसी प्रकार मन्दिर की भीतरी दीवारों पर राधाकृष्ण और कृपालुजी महाराज की विविध झाँकियों का भी अंकन हुआ है। मन्दिर में कुल 94 स्तम्भ हैं जो राधा-कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाये गये हैं। अधिकांश स्तम्भों पर गोपियों की मूर्तियाँ अंकित हैं, जो सजीव जान पड़ती है। मन्दिर के गर्भगृह के बाहर और अन्दर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट पच्चीकारी और नक्काशी की गयी है तथा संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविन्द गीत सरल भाषा में लिखे गये हैं। मंदिर परिसर में गोवर्धन पर्वत की सजीव झाँकी बनायी गयी है।

प्रेम मंदिर वृंदावन समय[संपादित करें]

प्रेम मंदिर उद्घाटन समय 5.30 बजे है और समापन समय 8.30 बजे है। नीचे की मेज के अनुसार मंदिर के अंदर विभिन्न आरती का प्रदर्शन किया जाता है। आरती के समय मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त इकट्ठे होते हैं। मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और प्रवेश सभी के लिए पूरी तरह से नि: शुल्क है। पूरे मंदिर को कवर करने के लिए कम से कम दो घंटे की आवश्यकता है

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. वेब, दुनिया. "राधा-कृष्ण के 'प्रेम मंदिर' का लोकार्पण". अभिगमन तिथि 02-03-2012. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. 1000 कारीगरों ने 11 साल में बनाया 'प्रेम मंदिर'!, भास्कर डॉट कॉम, अभिगमन तिथि: ०२.०३.२०१२
  3. राधा-कृष्ण के ‘प्रेम मंदिर’ का लोकार्पण, वेबदुनिया, अभिगमन तिथि: ०३-०३-२०१२

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]