प्रेमजोगिनी

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भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित् प्रेम्जोगिनी का काशी के छायाचित्र या दो भले बुरे फोटोग्राफ नाम से प्रथम संस्करण प्रकाशित हुआ था। हरश्चिंद्र चंद्रिका नामक पत्रिका में इसका प्रकाशन 1874 ई. से आरम्भ हुआ था। प्रस्तुत पाठ ‘चंद्रिका’ के अनुसार है।

कथानक[संपादित करें]

यह नाटक उस समय के काल का ठीक नमूना दिखाता है। यह नाटक उस समय की नई और् पुरानी दोनों रीतियों के दर्शन् कराता है।


बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]