प्रसरकोण

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यह चित्र सूर्य से पृथ्वी की स्थिति का प्रसरकोण (या कोण) दिखाता है I

प्रसरकोण (Elongation), किसी पिंड के लिए वह कोण है जो पृथ्वी पर खड़े प्रेक्षक की दृष्टी मे उस पिंड और सूर्य के बीच बनता है। पिंड का कोणांतर सूर्य के सापेक्ष मापा जाता है इसलिए इसे सूर्यांतर कोण भी कहा जाता है।

बुध और शुक्र[संपादित करें]

शुक्र व बुध हमेशा, चाहे सूर्योदय के पहले अथवा चाहे सूर्यास्त के बाद, सूर्य के नजदीक दांयी ओर देखे गये है | कहने का एक और तरीका है बुध व शुक्र सदा सूर्य के नजदीक नजर आते है क्योंकि उनके प्रसरकोण छोटे है। अधिकतम प्रसरकोण के दौरान उन्हे देखना सबसे आसान होता है | बुध का अधिकतम प्रसरकोण करीब 28° है | शुक्र का बुध की तुलना मे प्रेक्षण ज्यादा आसान है क्योंकि उसका अधिकतम प्रसरकोण लगभग 48° है। बुध और शुक्र के प्रसरकोण 0° के होते है तब उन्हे संयोजन में होना कहा जाता है।[1]

मंगल, बृहस्पति और शनि[संपादित करें]

मंगल, बृहस्पति और शनि को देखना तब सबसे आसान ज्यादा होता है जब वें विमुखता पर होते है अर्थात् उनके प्रसरकोण 180° के होते है। जब यह ग्रह सूर्य के सीध मे (0° का प्रसरकोण) होते है संयोजन मे होते है। जब प्रसरकोण 90° का होता है यह स्थिति पादस्थिति[En] होना कहलाती है |[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]