प्रश्नावली

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थाई भाषा में एक सरल प्रश्नावली

प्रश्नावली (Questionnaire) प्रश्नों या कथनों का समूह हैं, जिसके माध्यम से व्यक्ति से पूछकर सूचनाएं एकत्रित की जाती हैं। प्रश्नावली, अनुसन्धान करने का एक औजार है जिसमें लोगों से सूचना एकत्र करने के लिए उनसे बहुत से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस विधि की खोज 1998 में लन्दन सांख्यिकी सोसायटी (Statistical Society of London) ने किया था।

प्रश्नावली, निर्माण में एक आत्मनिष्ठ ( Subjective) तथा प्रयोग में वस्तुनिष्ठ (Objective) विधि है। इसका प्रयोग तब किया जाता है जब तथ्यात्मक (Factual) सूचनाओं की आवश्यकता होती है। प्रश्नावली का निर्माण इस प्रकार किया जाता है जिससे व्यक्ति के वांछित गुणों का मापन हो सके। प्रश्नावली का प्रयोग व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों रूपों में किया जा सकता है। यदि प्रश्नावली का प्रयोग समूह के लिए किया जाता है तो यह समय, धन और श्रम की बचत करने मे सहयोगी होता है।

प्रश्नावली की विशेषताएँ[संपादित करें]

  • यह प्राथमिक सूचना संकलित करने की एक अप्रत्यक्ष विधि है ।
  • प्रश्नावली अध्ययन किए जाने वाले विषय से सम्बंधित प्रश्नों की एक सूची होती है ।
  • प्रश्नावली को डाक द्वारा सूचनादाताओं के पास भेजा जाता है, या स्थानीय स्तर पर वितरित भी किया जा सकता है।
  • सूचनादाता प्रश्नावली को भरकर डाक द्वारा ही लौटाता है। कभी कभी स्थानीय लोगों से इसका संग्रह व्यक्तिगत स्तर पर भी कराया जा सकता है।
  • प्रश्न सरल, स्पष्ट तथा छोटे होने चाहिए एवं प्रश्न निश्चित अर्थ वाले होने चाहिए।
  • प्रश्नों की संख्या आवश्यकता से अधिक न हो।
  • यदि सम्भव हो तो प्रश्न का उत्तर हां/नहीं में होना चाहिए।
  • प्रश्नों का चुनाव ऐसा हो कि इच्छित सूचना स्पष्ट रूप से प्राप्त की जा सके।
  • दुरुह, अस्पष्ट एवं विषय से हटकर प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए।
  • ऐसे प्रश्नों की रचना की जानी चाहिए जिनमें अभिमति की सम्भावना न हो।

प्रश्नावली के गुण या लाभ[संपादित करें]

प्रश्नावली के निम्नलिखित लाभ हैं-[1]

  • (१) कम खर्चीली: प्रश्नावली अन्य प्राथमिक तथ्य संग्रह करने वाला विधियों से कम खर्चीली होती है। क्योंकि इन्हें डाक द्वारा या फिर एक या दो अन्वेषकों के द्वारा क्षेत्र में वितरित किया जाता है। अत: अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं पड़ती। केवल छपाई और डाक खर्च ही होता है।
  • (२) विशाल क्षेत्र एवं अधिक सूचनादाता से तथ्य संकलन : इस प्रविधि द्वारा जहां एक ओर विशाल क्षेत्र में दूर-दूर फैले सूचनादाता से सूचना प्राप्त की जा सकती है वहीं समय परिश्रम तथा धन की बचत भी होती है।
  • (३) समय की बचत : उत्तरदाता भौगोलिक दष्टि से फैले हुए तथा संख्या में अधिक हो सकते हैं। इसलिए प्रश्नावली वापस मंगाने में समय लग सकता है। चूंकि सभी प्रश्नावलियां एक साथ भेजी जाती हैं और अधिकतर उत्तर दस-पन्द्रह दिन में ही वापस आ जाते हैं। इस प्रकार समय की बचत रहती है और प्रश्नावलियां शीघ्र नतीजे देती हैं।
  • (४) साक्षात्कारकर्ता का पूर्वाग्रह नहीं होता : चूंकि साक्षात्कारकर्ता साक्षात्कारदाता के स्थान पर स्वयं उपस्थित नहीं होता इसलिए वह उत्तरों को प्रभावित नहीं कर सकता। ना तो उत्तर बताकर और न अपनी राय देकर ना ही प्रश्न गलत पढ़कर। स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं गुप्त सूचनाएं प्राप्त: चूंकि प्रश्न का उत्तर लिखते समय शोधकर्ता उपस्थित नहीं होता, अत: सूचनादाता स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विविध विषयों पर जानकारी दे सकता है। उसे संकोच, हिचकिचाहट आदि भी नहीं होता। जिससे वह निर्भीक सूचना देता है।
  • (५) सुविधाजनक : जहां एक ओर शोधकर्ता को सूचना के लिए अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ती वहीं दूसरी ओर उत्तरदाता भी अपनी सुविधानुसार खाली समय में प्रश्नावली भरता है तथा एक ही बार में सभी प्रश्नों के उत्तर देने को बाध्य भी नहीं होता वरन पहले आसान प्रश्न तथा बाद में कठिन प्रश्नों के उत्तर दे सकता है। पुनः प्रश्नावली भेजना सम्भवः यदि किसी कारण प्राप्त उत्तरों में कमी रहती है तो पुन: प्रश्नावली भेजकर उत्तर ज्ञात करना सम्भव होता है। अत: प्रभावी शोध के लिए उपयोगी विधि है।
  • (६) मानकीकृत शब्दावली : प्रश्नों का निर्माण एक ही व्यक्ति के द्वारा किया जाता है एवं छपाई के बाद सभी सूचनादाताओं को एक से ही प्रश्नों का उत्तर देना होता है। अतः उत्तरदाता के सामने एक से ही शब्द होते हैं जिससे प्रश्न समझने में कठिनाई नहीं होती तथा उत्तरों की तुलना में सुविधा रहती है।
  • (७) विविधता नहीं होती : प्रश्नावलियां स्थायी, निरन्तर और एक सी होती हैं तथा उनमें कोई विविधता नहीं होती।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]