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ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को कालका से जोड़ने के लिए 1896 में दिल्ली अंबाला कंपनी को इस रेलमार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समुद्र तल से 656 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालका (हरियाणा) रेलवे स्टेशन को छोड़ने के बाद ट्रेन शिवालिक की पहाड़ियों के घुमावदार रास्ते से गुजरते हुए 2,076 मीटर ऊपर स्थित शिमला तक जाती है।

दो फीट छह इंच की इस नैरो गेज लेन पर नौ नवंबर, 1903 से आजतक रेल यातायात जारी है।कालका-शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगों और 869 पुल बने हुए हैं। इस मार्ग पर 919 घुमाव आते हैं, जिनमें से सबसे तीखे मोड़ पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है।

वर्ष १९0३ में अंग्रेजों द्वारा कालका-शिमला रेल सेक्शन बनाया गया था। रेल विभाग ने ७ नवंबर २00३ को धूमधाम से शताब्दी समारोह भी मनाया था। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में दार्जीलिंग तथा नीलगिरि रेलमार्गो के साथ अब कालका-शिमला रेलमार्ग भी शामिल हो गया है। कनाडा में विश्व धरोहर संबंधी समिति ने इसकी घोषणा की।

कनाडा की क्यूबेक सिटी में वल्र्ड हेरिटेज कमेटी की बैठक में 19 वीं सदी में बने और वर्तमान में भी चालू 96.6 किलोमीटर लंबे कालका-शिमला रेलमार्ग को विश्व पहाड़ी रेल मार्गो की धरोहरों में शामिल करने की मंजूरी दी गई। कालका-शिमला मार्ग को अतिरिक्त विश्व धरोहर का दर्जा न देकर दार्जीलिंग व नीलगिरि रेलमार्गो के साथ रखा गया है। [पूरा पढ़ें]