प्रभु चावला

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प्रभु चावला इंडिया टुडे के संपादक व इंडिया टुडे समूह के संपादकीय निदेशक हैं। रिपोर्टर और संपादक के तौर पर 25 साल में इन्‍होंने ऐसी घटनाओं पर व्‍यापक ढंग से लिखा, जिसने भारतीय राजनीति और इसे संचालित करने वालों की दिशा बदल कर रख दी।

प्रभु ने इंडिया टुडे के प्रादेशिक संस्‍करणों को हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और बंगाली भाषाओं में आरंभ किया। इसके अलावा प्रभु 'आज तक' पर प्रसारित होने वाले साप्‍ताहिक टॉक शो 'सीधी बात' के एंकर भी हैं। प्रभु द्वारा राजनीति, व्‍यापार और संस्‍कृति के क्षेत्र में खबर बनाने वालों का अनोखे तरीके से किए गए एनकाउंटर के चलते यह भारतीय टेलीविजन में सबसे अधिक देखा जाने वाला कार्यक्रम बन गया है।

इंडिया टुडे में शामिल होने से पहले प्रभु चावला दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में अर्थशास्‍त्र के व्याख्याता थे। ये 'द इंडियन एक्‍सप्रेस' और 'फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस' के संपादक भी रह चुके हैं। इन्‍होंने समसामयिक घटनाओं व खोजी रिपोर्टिग में 'जीके रेड्डी मेमोरियल अवॉर्ड' और पत्रकारिता में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिए 'फिरोज गांधी मेमोरियल अवॉर्ड' समेत कई राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों को अपने नाम किया है। इन्‍हें 2003 में 'पद्मभूषण' पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया जा चुका है।

प्रभु चावला का जन्म लाहौर, पंजाब, ब्रिटिश भारत में १९४६ में हुआ था। वह देशबंधु कॉलेज यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अर्थसास्त्र के प्रोफ़ेसर के तौर पर की। वह चेन्नई के अखबार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के संपादक हैं। पहले वो इसे अखबार के मुख्य संपादक थे।

अखबार पत्रकारिता[संपादित करें]

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में काम से पहले वो इंडिया टुडे न्यूज़ मैगज़ीन के भासा प्रकाशन के संपादक थे। यह पोस्ट से पहले वो इस मैगज़ीन कंपनी के संपादक निर्देशक थे और उन्होंने यह स्थान पर 24 साल तक थे। चावला इस देश के एकमात्र ऐसे पत्रकार हैं जिसके न्यूज़ से दिल्ली की सरकार गिर गयी। उन्होंने राजीव गाँधी की मृत्यु पर विवादास्पद जैन कमीशन रिपोर्ट पर परताल की। इसके मैगज़ीन में प्रकाशान के बाद कांग्रेस ने संयुक्त डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार से समर्थन वापस ले लिया जिससे 1997 में इन्दर कुमार गुजराल की सरकार गिर गयी।

इंडिया टुडे में रहते हुए उन्होंने सीधी बात नाम का लोकप्रिय शो आजतक पर होस्ट किया जहाँ पर वो जानी मानी हस्तियों से सवाल जबाब किया करते थे। लकिन ग्रुप को छोड़ने के बाद उनके जगह मज अकबर को लाया गया। फिर उन्होंने ibn7 पर तीखी बात नाम का सो होस्ट किया जिस काफी सराहा गया। अभी वो नेशनल वौइस् पर सची बात नाम का शो होस्ट कर रहे हैं।

पुरस्कार[संपादित करें]

प्रभु चावला को २००३ में भारत सरकार के द्वारा पद्मा भूषण का पुरस्कार दिया गया।

  1. 2016: पंजाबी आइकन पुरस्कार
  2. 2016: लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड - 5 वीं IMWA 2016 पुरस्कार
  3. 2010: ग्लोबल पंजाबी सोसाइटी अचीवर्स अवार्ड
  4. 2009: भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ समाचार और वर्तमान मामलों के लिए लंगर Seedhi Baat कार्यक्रम है कि विशेष रूप से प्रदर्शित में लोगों से समाचार, राजनीति, संस्कृति के लिए खेल
  5. 2008: भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ टॉक शो होस्ट
  6. 2008: Sansui टेलीविजन बेस्ट टीवी एंकर अवार्ड
  7. 2005 : हीरो होंडा-भारतीय टेलीविजन अकादमी (आईटीए) बेस्ट एंकर अवार्ड `के लिए Seedhi Baat' (प्रसारण पर Aajtak)
  8. 2003: पद्म भूषण भारत के राष्ट्रपति द्वारा
  9. 2003: टेली पुरस्कार टीवी समाचार एंकर के वर्ष
  10. 1998: टीएसआर Kalapeetham लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  11. 1989 : जीके रेड्डी मेमोरियल पुरस्कार "के लिए मान्यता में प्रवीणता के बारे में लिखित रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं. एक पावती की सीमा और गहराई के राजनीतिक रिपोर्टिंग में भारत आज."
  12. 1985-86: फिरोज गांधी मेमोरियल अवॉर्ड के लिए "सावधानीपूर्वक रिपोर्टिंग के राष्ट्रीय मामलों और खोजी कहानियों".
  13. 1984: VEERESALINGAM NVESTIGATIVE पत्रकारिता पुरस्कार की शुरूआत की डॉ Vasireddi मालथी विश्वास Hithakarini समाज, राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश

विवाद[संपादित करें]

प्रभु चावला का नाम कुख्यात रादिया टेप्स कोन्त्रोवेर्स्य में आया। चावला ने यह माना की वो मिस निरा रादिया को जानते थे और उनका उनसे बात हुआ था। यह कहा जाता है कि उन्होंने मुकेश अम्बानी को मुंबई हाई कोर्ट से जुड़े एक एक फैसले के बारे में पहले से ही आगाह कर दिया था। विवाद के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप से इस्तीफा दे दिया।

सन्दर्भ[संपादित करें]