प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना

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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना भारत सरकार की एक योजना है जिसमें भ्रष्ट लोगों के बैंकों में जमा कराए जाने वाले काले धन को सरकार गरीबों के विकास में लगाएगी।[1] वास्तव में ये योजना सरकार ने उन (भ्रष्ट) लोगों के लिए शुरू की है जिनके पास अघोषित संपत्ति है। ऐसे लोग इस योजना के तहत गरीब कल्याण योजना में पैसे जमा कर सकते हैं।

अवधि[संपादित करें]

इसकी शुरुआत 2016 में हुई। इसके लिए सरकार ने 31 मार्च 2017 तक का समय दिया था। साथ ही इस योजना के तहत सिर्फ एक बार ही पैसा जमा किया जा सकता है।[2]

परियोजना विफल[संपादित करें]

यह परियोजना को आर्थिक विशेषज्ञ विफल मानते हैं क्योंकि बहुत कम लोगों ने इसे अपनाया और राजस्व सचिव हसमुख आधिया के अनुसार इससे केवल 5,000 करोड़ रुपियों ही की घोषणा हो सकी है।[3]

2020 कोरोनावायरस महामारी[संपादित करें]

भारत सरकार ने कोरोनोवायरस महामारी का मुकाबला करने के लिए देश भर में 80 करोड़ गरीबी रेखा से नीचे लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा स्किम को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा सभी राशन कार्ड धारकों को 3 माह तक मौजूदा राशन के मुकाबले 2 गुना लाभ दिया जाएगा यह अतिरिक्त दिए जाने वाला अनाज बिल्कुल मुफ्त में दिया जाएगा। इसके साथ ही साथ देशवासियों में प्रोटीन की मात्रा की सुनिश्चित करने के लिए 1 किलो दाल भी हर महीने दी जाएगी स्रोतों के मुताबिक गेहूं 2 रुपए किलो तथा चावल 3 रुपए किलो दिया जाएगा।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना नई अपडेट".
  2. "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना: नियम और शर्तें". मूल से 28 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 सितंबर 2018.
  3. "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना क्यों विफल रही?". मूल से 28 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 सितंबर 2018.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]