प्रतिलोम शब्दकोश

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प्रतिलोम शब्दकोश (reverse dictionary) ऐसे शब्दकोश को कहते हैं जिसमें शब्दों का क्रम परम्परागत मानक क्रम नहीं बल्कि कोई अन्य क्रम होता है। ऐसे शब्दकोश कभी-कभी बहुत उपयोगी होते हैं और परम्परागत शब्दकोशों से जो सूचना बहुत कठिनाई से मिल पाती है वह इनसे मिल जाती है। उदाहरण के लिए 'तुकान्त शब्दकोश' एक प्रतिलोम शब्दकोश है जिसमें प्रविष्ट शब्दों का क्रम उनके अन्तिम अक्षर से शुरू करके आदि अक्षर की ओर लेते हुए तैयार किया जाता है। ऐसे शब्दकोश में 'आना' और 'लाना' पास-पास हो सकते हैं जबकि 'आना' और 'आम' दूर-दूर।

उपयोगिता[संपादित करें]

शब्दों के क्रम निर्धारित करने का 'प्रतिलोम व्यवस्था' अधिक उपयोगी साबित होता है, विशेष करके कवियों हेतु। यदि इसमें सभी एक अक्षर वाले शब्दों को सबसे पहले, उसके बाद दो अक्षर वाले, फिर तीन अक्षर वाले, ... को क्रमशः रखा जाया तो उपयोगिता और बढ़ जाती है।

इतिहास[संपादित करें]

प्रतिलोम शब्दकोश की परम्परा बहुत पुरानी है, शायद संस्कृत कोश निर्माताओं से ही। सन् 1260 में केशिराज द्वारा रचित प्रसिद्ध कन्नड व्याकरण 'शब्दमणिदर्पण' में सम्मिलित धातुकोश बिलकुल इसी प्रकार का है। शब्दमणिदर्पण के आधुनिक सम्पादकों ने इसे आदिवर्णक्रमानुसार कर दिया।

ओड़िशा के प्रसिद्ध कवि सम्राट उपेन्द्र भंज ने ऐसे ही शब्दकोश का निर्माण किया था। इसके आधार पर कविता में छन्दों के तुक-मिलाने में काफी सुविधा होती थी और इसी के आधार पर वे कवि-सम्राट बन पाए थे।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]