पोतराज
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पोतराज, महाराष्ट्र में एक प्रकार के प्रसिद्ध लोक कलाकार होते हैं। इन्हें महाराष्ट्र में 'मरीआई' अथवा 'कड़क लक्ष्मी' के नाम से भी जाना जाता है।

महत्व
[संपादित करें]पोतराज, देवी माँ के उपासक होते हैं। [1]हाथ में लिये हुए चाबुक से वह अपनी ही पीठ पर प्रहार करता रहता है और घर-घर जाकर पैसे, अनाज माँगता है।[2]
वर्णन
[संपादित करें]पोतराज पुरुष होता है फिर भी वह महिला का वेश धारण करता है। उसके बाल बंधे हुए होते हैं। माथे पर हल्दी और कुमकुम लगाया हुआ होता है। कमर पर बहुत सी साड़ियाँ जोड़कर सिलाया हुआ 'घागरा' भी पहनता है। कमर पर ही घण्टावाली और घुंगरू बंधी माला लगाई होती है। ऐसी मान्यता है कि पोतराज अपने हंटर के प्रहार से लोगों की विपत्तियों को दूर करता है और देवी की कृपा भक्तजनों तक पहुँचाता है।[3][4]
पोतराज की पत्नी
[संपादित करें]पोतराज के साथ उसकी पत्नी होती है। वह हमेशा ढोलक बजाकर अपने पति के कार्य में साथ देती है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Potharaju v2.0: All hail the new age Potharaju Read more at: http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/65309532.cms?utm_source=contentofinterest&utm_medium=text&utm_campaign=cppst". ८. ८. २०१८.
{{cite news}}: Check date values in:|date=(help); External link in(help); line feed character in|title=|title=at position 48 (help) - ↑ "कामशेतमध्ये पोतराजांची पडली पालं; कर्नाटकातून कुटुंबासह दाखल, २५ वर्षांपासूनचा शिरस्ता". १२. १. २०१८. मूल से से 23 सितंबर 2018 को पुरालेखित।.
{{cite news}}: Check date values in:|date=(help) - ↑ "संग्रहीत प्रति". 23 सितंबर 2018 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 23 सितंबर 2018.
- ↑ जोशी, महादेवशास्त्री (२००१). भारतीय संस्कृति कोष. भारतीय संस्कृतिकोश मंडल प्रकाशन.