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पॉक्सो एक्ट

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[1] भारत का संविधान 1950 में लागू हुआ। किशोरों के लिये अलग कानून की आवश्यक्ता अनुभव की गई संविधान द्वारा 1992 मैं शामिल किया गया जो अमेरिका के संविधान से लिया गया जो मूल रूप से बालको के प्रति होने वाले यौन अपराधों के प्रतिषेध कानून है 2002 मे अधिनियमित हुआ वर्ष 2012 मैं यह कानून का रूप ले चूका था लेकिन यह अपराध श्रेणी मै आता है

उपबंध 

कानून के प्रभाग इस अधिनियम के अंतर्गत यौन अपराध यौन छेड़छाड़ व अश्लील चित्र या वीडियो बनाने के अपराधों के प्रतिषेध कृत कानून है कुछ धाराओं के अंतर्गत उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है

विशेष नये संशोधन के अंतर्गत बालक अपने ऊपर हुए अपराधों की ऍफ़ आई आर करने के उपरांत आरोपी को अपने को निर्दोष साबित करना होता है बच्चे को अपराध हुआ इसके लिए सिर्फ आरोप लगाना पर्याप्त है इस कानून के अंतर्गत बालक बालिका दोनों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान की गई है विशेष न्यायलय बालक के प्रति अपराध की गम्भीरता व उसे हुए सामाजिक व मानसिक नुकसान का आकलन करता है। सामाजिक शिक्षा

भावनात्मक व शारीरिक नुकसान के अनुसार दंडात्मक कार्यवाही करता है

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 21 फ़रवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 फ़रवरी 2017.