पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (भारत)

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पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो, The Petroleum and Explosives Safety Organisation),

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अंतर्गत है जो कि अभी भारत सरकार, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन है। इसका मुख्यालय नागपुर में है। इस संस्था ने 9 सितम्बर 1998 में अपने सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं।

उद्देश्य[संपादित करें]

  • विस्फोटक अधिनियम, 1884 तथा पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 के अनुसार विस्फोटकों, पेट्रोलियम पदार्थो तथा संपिडीत गॅसेस के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, कब्जा, विक्रय तथा प्रयोग का संचालन तथा विनियमन।
  • केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय संस्थाओ, विधि विषयक अभिकरणों, उद्योगों तथा उपरोक्त पदार्थों के सभी उपभोक्ताओं को सुरक्षा के सम्बन्ध में तकनिकी परामर्श प्रदान देना।
  • जनता के साथ मित्रवत व्यवहार अपनाते हुये पारदर्शिता और कार्य कुशलता की वचनबध्दता को बनाये रखना।
  • अपने लक्ष्य को पाने के लिए सजग, नव परिवर्तित तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करना।
  • भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सतत प्रयास एवं परिवर्तन के अनुरूप अपने को ढालना।
  • निम्नलिखित अधिनियमों का संचालन-
  1. विस्फोटक अधिनियम, 1884
  2. विस्फोटक नियम, 2008
  3. गॅस सिलेंडर नियम, 2004
  4. स्थिर तथा गतिशील दाबपात्र (अज्वलित) नियम, 1981
  5. पेट्रोलियम अधिनियम, 1934
  6. पेट्रोलियम नियम, 2002
  7. कॅलशियम कार्बाईड नियम, 1987
  8. चलचित्र फिल्म नियम, 1948
  9. अज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952
  • विस्फोटकों, पेट्रोलियम, कॅलशियम कार्बाईड, अज्वलनशील पदार्थों तथा संपिडीत गॅसेस केउत्पादन, परिवहन, भंडारण, संभालने आदि के क्षेत्र में जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • सरकारी तथा अर्ध सरकारी संस्थांए जैसे की बन्दरगाहों, रेल्वे, रक्षा संगठनों और सडक परिवहन मंत्रालय, पर्यावरण और वन मंत्रालय, पेट्रोलियम नैसर्गिक गॅस मंत्रालय, प्रदुषण नियंत्रक प्राधिकरणों इत्यादि को सुरक्षा संबंधी मामलों में परामर्शकारी भूमिका निभाना।
  • बीआयएस, ओआयएसडी तथा अन्य प्रमुख संस्थाओं के सहयोग से जन सुरक्षा संबंधित राष्ट्रीय मानकों का निर्धारण तथा भारतीय मानकों का अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ समन्वय करना।
  • सुरक्षा के संबंध में जन जागृती उत्पन्न करना।
  • पेसो, वर्तमान में पूरे भारत में 2,56,000 से भी ज्यादा जोखिम भरे परिसरों में सुरक्षा सुनिश्चित करने में सलग्न है।

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