पुस्तकालय के प्रकार

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पुस्तकालय के प्रकार विभिन्न पुस्तकालय का अपना क्षेत्र और उद्देश्य अलग अलग होता है और वह अपने उद्देश्य का पू￷त के लिए अनुकूल धारण करते है। इसी के आधार पर इसके अनेक भेद हो जाते है जैसे- राष्ट्रीय पुस्तकालय, सार्वजनिक पुस्तकालय, व्यावसा￸यक पुस्तकालय, सरकारी पुस्तकालय, ￸चिकत्सा पुस्तकालय और विश्वविध्यालयो तथा ￱शिक्षण संस्थाओं में भी पुस्तकालय होते है।

१.१ राष्ट्रीय पुस्तकालय

जिन पुस्तकालयों का उद्देश्य सम्पूर्ण राष्ट्र की सेवा करना होता है, उन्हें राष्ट्रीय पुस्तकालय कहते है। वहाँ पर हर प्रकार के पाठक की आवश्यकतानुसार पठनसामग्री का संकलन किया जाता है। अनीलड इस्डैल के मतानुसार 'राष्ट्रीय पुस्तकालय का प्रमुख कतर्व्य संपूण र्राष्ट्र के प्रग￸तशील विश्वविद्यालय को इतिहास और सािहत्य की सामग्री सुलभ करना, अध्यापक, लेखक एवं￱श￸क्षत को ￱श￸क्षत करना है'। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय पुस्तकालय के निम्नलिखित कतर्व्य होते है:

1- राष्ट्रीय ग्रंथसूची के प्रका￱शत करानेका दा￸यत्व। 2- इस पुस्तकालय से संबद्ध की एक संघीय सूची का संपदान करना। 3- पुस्तकालय में संदभर् सेवा की पूर्ण व्यवस्था करना और पुस्तकों को अंतरार्ष्ट्रीय आदान-प्रदान की सुिवधा दिलवाना। 4- अंतरार्ष्ट्रीय ग्रंथसूची के कायर् के साथ समन्वय स्थािपत करना और इय संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी रखना। 5- सम्पूर्ण राष्ट्र में स्थािपत महत्वपूर्ण संदभर्क की सूची तैयार करना। भारतीय विद्वान डाक्टर रंगनाथन के अनुसार देश की सांस्कृ￸तक अध्ययन सामग्री की सुरक्षा राष्ट्रीय पुस्तकालय का मुख्य कार्य है। साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक को ज्ञानाजर्न के समान सुिवधा प्रदान करना और जनता की ￱शिक्षा में सहायता देने के द्वारा ऐसी भावना भरना िक लोग देश के प्राकृ￸तक साधन का उपयोग कर सक। यह िनश्चय हैिक यिद देश के प्रत्येक व्यिक्त का मस्तिष्क सृजनशील नहीं होगा तो राष्ट्र का सवार्ंगीण िवकास तीव्र ग￸त सेनह हो सकेगा। कापीराइट की सुिवधा से राष्ट्रीय पुस्तकालयों के विकास में वृ￸द्ध हुई है। वास्तव में पुस्तकालय आंदोलन के इतिहास में यह क्रां￸तकारी कदम है। ब्रिटेन के राष्ट्रीय पुस्तकालय, ब्रिटिश म्यूजियम को 1709 में यह सुिवधा प्रदान की गई। इसी प्रकार फ्रांस बिब्लयोथेक नैशनल अध्याय पुस्तकालय आधुिनक शैली का एक पुस्तकालय पेरस को 1556 और ब￳लन लाइब्रेरी को 1699 ई में एवंस्वस नैशनल लाइब्रेरी को 1950 ई। में वहाँ के प्रकाशन नि:शुल्क प्राप्त होने लगे। कापीराइट की यह महत्वपूर्ण सुिवधा भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय को सन् 1954 ई में प्रदान की गई। ￸डलीवरी आंव बुक्स सन् 1954 के कानून के द्वारा प्रत्येक प्रकाशन की कुछ प्र￸तयाँराष्ट्रीय पुस्तकालय को भेजना पप्रकाशकों के लिए कानून द्वारा अिनवायर् कर दिया गया है।

१.२. सार्वजनिक पुस्तकालय आधुिनक सार्वजनिक पुस्तकालयों का विकास वास्तव में प्रजातंत्र की महान् देन है। ￱शक्षा का प्रसारण एवंजनसामान्य को सु￱श￸क्षित करना प्रत्येक राष्ट्र का कतर्व्य है। जो लोग स्कूल या कालेज में नहीं पढ़ते, जो साधारण पढ़े लिखे है, अपना निजी व्यवसाय करते है अथवा जिनकी पढ़ने की अभिलाषा है पर पुस्तके नहीं खरीद सकते तथा साहित्य पढ़ना चाहते है, ऐसे वर्गों के लोगो को ध्यान में रखकर जनसाधारण की पुस्तकों की माँग सार्वजनिक पुस्तकालय ही पूरी कर सकते है। इसके अतिरिक्त प्रदशर्नी,वादिववाद, ￱शक्षाप्रद चल￸चत्र प्रदशर्न, महत्वपूर्ण विषयों पर भाषण का भी प्रबंध सार्वजनिक पुस्तकालय करते है। इस दिशा में यूनैसको जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन ने बड़ा महत्वपूणर् योगदान किया है। प्रत्येक प्रग￸तशील देश में जन पुस्तकालय निरन्तरं प्रग￸त कर रहे है और साक्षरता का प्रसार कर रहे है। वास्तव में लोक पुस्तकालय जनता के विश्विद्यालय है, जो बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के उपयोग के लिए खुले रहते है।

१.३ अनुसंधान पुस्तकालय उस संस्था को कहते है जो ऐसे लोगों की सहायता एवं मागर्दशर्न करती है जो ज्ञान की सीमाओं को विकसित करने में कार्य करता है। ज्ञान की विभिन्न शाखाएँ है और उनकी पू￷त विभिन्न प्रकार के संग्रहों से ही संभव हो सकती है, जैसे कृिष से सम्बंधित किसी विषय पर अनुसंधानात्मक लेख लिखने के लिए कृिष विश्विद्यालय या कृषि कार्य से सम्बंधित किसी संस्था का ही पुस्तकालय अ￸धक उपयोगी सद्ध होगा। ऐसे पुस्तकालयों की कायर्पद्ध￸त अन्य पुस्तकालयों से ￱भिन्न होती है। यहाँ कार्य करने वाले का अत्यंत दक्ष एवं अपने विषय का पं￸डत होना अिनवायर् है, नहींतो अनुसंधान कर्ताओ को ठीक मागर्दशर्न उपलब्ध न हो सकेगा।

१.४. व्यावसा￸यक पुस्तकालय इन पुस्तकालयों का उद्देश्य किसी विशेष व्यावसा￸यक संस्था अथवा वहाँ के करमचारियों की सेवा करना होता है। इनके आवश्यकता नुसारि वशेष पठनसामग्री का इन पुस्तकालयों में संग्रह किया जाता है, जैसे व्यवसाय से संबं￸धत डायरेक्टरोज, व्यावसा￸यक पित्रकाएँ, समयसार￱णयाँ, महत्वपूणर् सरकारी प्रकाशन, मान￸चत्र, व्यवसाय से संबं￸धत एवं संदभर्ग्रंथ, सािहत्य इत्यािद।

१.५. सरकारी पुस्तकालय वैसेतो सरकार अनेक पुस्तकालयों को वितीय सहायता देती है, परंतु जिन पुस्तकालयों का सम्पूर्ण व्यय सरकार वहन करती है उन्हें सरकारी पुस्तकालय कहते है, जैसे राष्ट्रीय पुस्तकालय, विभागतीय पुस्तकालय,विव￱भन्न मंत्रालयों के पुस्तकालय, प्रांतीय पुस्तकालय। संसद और विधानभवनों के पुस्तकालय भी सरकारी पुस्तकालय की श्रेणी में आते है।

१.६.￸चिकत्सा पुस्तकालय यह पुस्तकालय किसी ￸चिकत्सा संबंधी संस्था, विद्यालय, अनुसंधान की अथवा ￸चिकत्सालय से संबद्ध होते है। ￸चिकत्सा संबंधी पुस्तकों का संग्रह इनमे रहता है और इनका सावर्जिनक न होकर विवशेष वर्ग की सेवा मात्र तक ही सिमित होता है।

१.७ ￱शक्षण संस्थाओं के पुस्तकालय ￱शक्षण संस्थाओं के पुस्तकालयों को इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है, जैसे विश्वविद्यालय पुस्तकालय, विद्यालय पुस्तकालय, माध्यिमक शाला पुस्तकालय, बेशक शाला पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संस्थाओंऔर खोज संस्थाओं के निजी पुस्तकालय आदि। हरविश्वविद्यालय के साथ एक िवशाल पुस्तकालय का होना प्राय: अनिवार्य ही है। बेशक शालाओं एवं जूिनयर हाई स्कूलों मेंतो अभी पुस्तकालयों का विकास नहीं हुआ है, परंतुमाध्यिमक शालाओं एवं विद्यालय के पुस्तकालयों का सवार्ंगीणि वकास हो रहा है। इसके अतिरिक्त पुस्तकालयों के और भी अनेक भेद है जैसे ध्वनि पुस्तकालय, जिसमें ग्रामोफोन रिकॉर्ड औरफिल्में आिद का संग्रह रहता है, कानून पुस्तकालय, समाचारपत्र पुस्तकालय, जेल पुस्तकालय, संगीत पुस्तकालय, बाल पुस्तकालय एवंसचल पुस्तकालय आदि।

१.८ सेना पुस्तकालय ये पुस्तकालय विशिष्ट प्रकार के होते है और संग्रह की सेतो इनका प्राय: अन्य पुस्तकालयों से￱भन्न होता है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय ऐसे पुस्तकालयों की आवश्यकता की ओर ध्यान दिया गया था और दुसरे विश्व युद्ध के समय तो सेना के अधिकारिय को पठन-पाठन की सुिवधा देने हेतुिमत्र-राष्ट्र ने अनेकानेक पुस्तकालय स्थािपत किए। अकेले अमरीका में नभ सेना के लिए 1600 पुस्तकालय है जिनमे नभ सेना के उपयोग के लिए नई से नई सामग्री का संग्रह किया जाता है। ये पुस्तकालय बहुत से जलपोती और सैिनक छाविनय के साथ स्थािपत किए गए है। इसी प्रकार वायुसेना और स्थल सेना के भी अनेक पुस्तकालय विश्व के अनेक देशों में है। अमेरिकन पेटागेन में सेना का एक विशाल पुस्तकालय है। भारत में रक्षा मंत्रालय, सेना प्रधान कायार्लय एवं￸डफसे साइंस आर्गेनाईजेशन के लिए विशाल पुस्तकालय है।