पुष्पा गुजराल साइंस सिटी

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पुष्पा गुजराल साइंस सिटी
सिद्धांत विज्ञान प्रसार
स्थापना 19 मार्च 2005
प्रकार विज्ञान केंद्र
वैधानिक स्थिति सरकारी
उद्देश्य शैक्षणिक
मुख्यालय कपूरथला
स्थान
क्षेत्र served
कपूरथला, जालंधर
निदेशक
डॉ॰ आर. एस. खांडपुर
पैतृक संगठन
भारत सरकार और पंजाब सरकार की संयुक्त परियोजना.
जालस्थल pgsciencecity.org/index.htm
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पुष्पा गुजराल साइंस सिटी, भारत में सबसे बड़ी विज्ञान नगरियों में से एक है। इस विज्ञान नगरी का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री इन्द्र कुमार गुजराल की मां के नाम पर रखा गया है। यह भारत के राज्य पंजाब के कपूरथला जिले में जालंधर-कपूरथला मार्ग पर स्थित है और यह विज्ञान नगरी भारत के दूसरी सबसे बड़ी विज्ञान नगरी है। इस विज्ञान नगरी का मुख्य उद्देश्य मज़े और मनोरंजन के साथ साथ शिक्षा प्रदान करना है। यह नगरी सीखने के आनन्द का अनुभव करने के लिए संग्रहालय में आने वाले सभी उम्र के लोगों को आकर्षित करती है। पुष्पा गुजराल साइंस सिटी जिज्ञासा और शिक्षा का एक लोकप्रिय मिश्रण है। जालंधर में पुष्पा गुजराल साइंस सिटी को 72 एकड़ के क्षेत्र में बनाया गया है।

उत्तरी भारत में पुष्पा गुजराल साइंस सिटी अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना है। यहां के प्रमुख आकर्षणों में एक 18 फुट ऊँचा डायनासोर और एक जीएसएलवी प्रक्षेपास्त्र का मॉडल शामिल हैं। संग्रहालय में 26 लाख टाइल्स से बना है एक विशाल ग्लोब भी स्थित है। यहाँ पर बच्चों का पार्क भी है जिसमें विभिन्न झूले, सवारियां, ट्रेम्पोलिन आदि बच्चों को आकर्षित करतें हैं। इसके अलावा यहां एक कृत्रिम झील भी है जिसमें पर्यटक नौका विहार का आनन्द ले सकते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

साइंस सिटी की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री श्री इन्द्र कुमार गुजराल द्वारा 17 अक्टूबर 1997 को रखी गयी थी। साइंस सिटी के पहले चरण का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल महामहिम लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) एस एफ रोड्रिग्स ने 19 मार्च 2005, को किया था। पहले चरण के प्रमुख आकर्षणों में अंतरिक्ष थिएटर, लेजर थिएटर, 3 डी थिएटर, फ्लाइट सिम्युलेटर और विज्ञान संबंधी मजेदार प्रदर्श शामिल थे।

साइंस सिटी परियोजना की कुल लागत 100 करोड़ रुपए है। यह भारत सरकार और पंजाब सरकार की एक संयुक्त परियोजना है। भारत सरकार ने जहां पूंजी व्यय (इमारतें और प्रदर्श) के लिए 70 करोड़ रुपये का योगदान दिया है वहीं पंजाब सरकार ने भूमि और अन्य बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के रूप में 30 करोड़ की राशि प्रदान की है।[1]


सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]