पुष्टि पूर्वाग्रह

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पुष्टि पूर्वाग्रह (अंग्रेज़ी: Confirmation bias) एक तरह का कुतर्क है। इसमें व्यक्ति जानकारी को इस तरह से भाषान्तरित करता है, इस तरह से याद करता है जिस से उसकी धारणाओं और परिकल्पनाओं की पुष्टि होती हो, और जो जानकारी उसकी धारणाओं और परिकल्पनाओं के विपरीत हो उसे बहुत कम महत्व देता है।[1] यह एक तरह का संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह है और आगमनात्मक तर्क की व्यवस्थित त्रुटि है। लोग ये त्रुटि तब दर्शाते है जब वे जानकारी को चुनिंदा रूप से इकट्ठा करते हैं या जानकारी की चुनिंदा रूप से व्याख्या करते हैं। इसका प्रभाव भावनात्मक रूप से संवेदनशील मुद्दों और गहरी जड़ें जमा चुके विश्वासों में ज्यादा देखने को मिलता है। यह पूर्वाग्रह तब भी देखने को मिलला है जब लोग अस्पष्ट सबूत को अपनी मौजूदा स्थिति का समर्थन करने के लिए प्रयोग करते हैं। रवैया ध्रुवीकरण (जब एक ही सबूत देखने पर विभिन्न दलों में असहमति और अधिक उग्र हो जाती है), विश्वास दृढ़ता (जब किसी विश्वास के खिलाफ सबूत दिखाए जाने पर भी विश्वास कायम रहता है), तर्कहीन प्रधानता प्रभाव (पहले देखी गयी सूचना पर अधिक निर्भरता) और भ्रामक सह-संबंध (जब दो घटनाओं या स्थितियों के बीच संबंध न होने पर भी लोग संबंध मानते हैं) को समझाने के लिए पक्षपातपूर्ण खोज, व्याख्या और स्मृति को लागू किया गया है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Plous, Scott (१९९३ ई.). The Psychology of Judgment and Decision Making. पृ. २३३.