पीढ़ियों का एकांतरण
| पीढ़ी एकांतरण | |
|---|---|
पादप जीवन चक्र का एक आरेख: ऊपर द्विगुणित बीजाणुद्भिद और नीचे अगुणित युग्मकोद्भिद पीढ़ी। | |
| प्रकार | जैविक जीवन चक्र |
| इनमें पाया जाता है | सभी स्थलीय पादप और कुछ शैवाल |
| मुख्य अवस्थाएँ | युग्मकोद्भिद और बीजाणुद्भिद |
| कोशिका गुणिता | अगुणित तथा द्विगुणित |
| अध्ययन का क्षेत्र | वनस्पति विज्ञान और विकासवादी जीव विज्ञान |
| प्रक्रिया का हिस्सा | पादप प्रजनन |
| मुख्य खोजकर्ता | विल्हेम हॉफमिस्टर |
| विकिडाटा | Q725951 |
पीढ़ी एकांतरण (Alternation of generations) पादपों और कुछ शैवालों के जीवन चक्र में पाई जाने वाली एक प्रमुख जैविक प्रक्रिया है। इसे 'हैप्लोडिप्लॉन्टिक जीवन चक्र' भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत किसी जीव के संपूर्ण जीवनकाल में दो भिन्न बहुकोशिकीय प्रावस्थाएं एकांतर क्रम में आती हैं। इनमें से पहली प्रावस्था 'अगुणित' होती है, जिसे युग्मकोद्भिद कहा जाता है और यह समसूत्री विभाजन के माध्यम से युग्मकों का निर्माण करती है। दूसरी प्रावस्था 'द्विगुणित' होती है, जिसे बीजाणुद्भिद कहा जाता है, और यह अर्धसूत्री विभाजन के माध्यम से बीजाणुओं को उत्पन्न करती है।[1][2]
खोज
[संपादित करें]इस जैविक परिघटना की खोज जर्मन वनस्पतिशास्त्री विल्हेम हॉफमिस्टर ने वर्ष 1851 में की थी। उनके शोध ने यह स्पष्ट किया कि ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स (फर्न) और बीजीय पादप सभी अपने जीवन चक्र में इन दो सुस्पष्ट पीढ़ियों से होकर गुजरते हैं। इस खोज ने पादप आकारिकी और विकास के अध्ययन में एक नवीन आधार स्थापित किया।[3][4]
जीवन चक्र
[संपादित करें]एक प्रारूपिक पीढ़ी एकांतरण चक्र में, द्विगुणित बीजाणुद्भिद परिपक्व होने पर अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित बीजाणुओं का निर्माण करता है। अनुकूल वातावरणीय परिस्थितियां मिलने पर ये बीजाणु अंकुरित होते हैं और समसूत्री विभाजन के माध्यम से एक नए बहुकोशिकीय युग्मकोद्भिद को जन्म देते हैं। तत्पश्चात, यह युग्मकोद्भिद नर और मादा युग्मकों का उत्पादन करता है। निषेचन की प्रक्रिया के दौरान इन युग्मकों के संलयन से एक द्विगुणित युग्मनज बनता है, जो आगे चलकर विकसित होता है और पुनः एक नए बीजाणुद्भिद का निर्माण करता है।[5]
प्रकार और उद्विकास
[संपादित करें]आकारिकी के आधार पर यह चक्र मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। समरूप एकांतरण में दोनों पीढ़ियां रूप से एक समान दिखाई देती हैं, जैसा कि 'अल्वा' और क्लैडोफोरा नामक समुद्री शैवालों में देखा जाता है।[6][7] इसके विपरीत, विषमरूप एकांतरण में दोनों पीढ़ियों की संरचना और आकार भिन्न होते हैं, जो सभी स्थलीय पादपों की विशिष्टता है।
पादपों के उद्विकासीय इतिहास में बीजाणुद्भिद पीढ़ी के क्रमिक रूप से प्रभावी होने की प्रवृत्ति देखी गई है। निम्न पादपों जैसे ब्रायोफाइटा में युग्मकोद्भिद ही मुख्य, स्वतंत्र और प्रकाश-संश्लेषी पौधा होता है।[8] टेरिडोफाइटा में बीजाणुद्भिद स्वतंत्र और अधिक सुस्पष्ट हो जाता है। वहीं, उच्च विकसित बीजीय पादपों में बीजाणुद्भिद ही मुख्य पौधा होता है, जबकि युग्मकोद्भिद अत्यधिक ह्रासित होकर पूरी तरह से बीजाणुद्भिद के ऊतकों पर आश्रित हो जाता है।[9][10]
आनुवंशिक महत्व
[संपादित करें]द्विगुणित प्रावस्था में प्रत्येक जीन की दो प्रतियां मौजूद होती हैं, जो हानिकारक या अप्रभावी उत्परिवर्तनों के प्रभाव को ढकने में सहायक होती हैं।[11] इसके अतिरिक्त, बीजाणु निर्माण के दौरान होने वाले अर्धसूत्री विभाजन से जीनों का नया पुनर्योजन होता है, जिससे आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। यही विविधता पादप समष्टियों को बदलते पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होने और उद्विकास करने में सक्षम बनाती है।[12]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "alternation of generations | Definition & Examples". Encyclopedia Britannica (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-16.
- ↑ Bell, P.R.; Hemsley, A.R. (2000). Green Plants: their Origin and Diversity (2nd ed.). Cambridge University Press. p. 104. ISBN 978-0-521-64109-8.
- ↑ Hofmeister, W. (1851). Vergleichende Untersuchungen der Keimung, Entfaltung und Fruchtbildung höherer Kryptogamen (German भाषा में). Leipzig: F. Hofmeister.
{{cite book}}: CS1 maint: unrecognized language (link) - ↑ Haig, David (2008). "Homologous versus antithetic alternation of generations and the origin of sporophytes". The Botanical Review. 74 (3): 395–418. डीओआई:10.1007/s12229-008-9012-x. एस2सीआईडी 207403936.
- ↑ Kluge, Arnold G.; Strauss, Richard E. (1985). "Ontogeny and Systematics". Annual Review of Ecology and Systematics. 16: 247–268. डीओआई:10.1146/annurev.es.16.110185.001335. जेस्टोर 2097049.
- ↑ Kirby, A. (2001). "Ulva, the sea lettuce". Monterey Bay Aquarium Research Institute. मूल से पुरालेखन की तिथि: 16 मई 2011. अभिगमन तिथि: 16 मार्च 2026.
{{cite web}}: CS1 maint: bot: original URL status unknown (link) - ↑ Shyam, R. (1980). "On the life-cycle, cytology and taxonomy of Cladophora callicoma from India". American Journal of Botany. 67 (5): 619–24. डीओआई:10.2307/2442655. जेस्टोर 2442655.
- ↑ Watson, E.V. (1981). British Mosses and Liverworts (3rd ed.). Cambridge University Press. pp. 2–33. ISBN 978-0-521-28536-0.
- ↑ Taylor, T.N.; Kerp, H.; Hass, H. (2005). "Life history biology of early land plants: Deciphering the gametophyte phase". Proceedings of the National Academy of Sciences. 102 (16): 5892–5897. डीओआई:10.1073/pnas.0501985102. पीएमसी 556298. पीएमआईडी 15809414.
- ↑ Sporne, K.R. (1974). The Morphology of Angiosperms. London: Hutchinson. pp. 17-21. ISBN 978-0-09-120611-6.
- ↑ Michod, R.E.; Gayley, T.W. (1992). "Masking of mutations and the evolution of sex". The American Naturalist. 139 (4): 706–734. डीओआई:10.1086/285354. एस2सीआईडी 85407883.
- ↑ Bernstein, H.; Byers, G.S.; Michod, R.E. (1981). "Evolution of sexual reproduction: Importance of DNA repair, complementation, and variation". The American Naturalist. 117 (4): 537–549. डीओआई:10.1086/283734. एस2सीआईडी 84568130.
विस्तृत पठन
[संपादित करें]- Stewart, W.N.; Rothwell, G.W. (1993). Paleobotany and the Evolution of Plants (2nd ed.). Cambridge University Press. ISBN 978-0-521-38294-6.
- Bateman, R.M.; Dimichele, W.A. (1994). "Heterospory – the most iterative key innovation in the evolutionary history of the plant kingdom". Biological Reviews. 69 (3): 345–417. डीओआई:10.1111/j.1469-185x.1994.tb01276.x.
