पीएस अप्पू

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पीएस अप्पू(1929-28 मार्च 2012) एक भारतीय सिविल सेवक थे जो लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (ला॰ब॰शा॰रा॰प्र॰अ॰) के निर्देशक पद से सेवानिवृत्त हुए।[1]

अप्पू ने अपना करियर १९५१ में भारतीय प्रशासनिक सेवा के बिहार कैडर से आरम्भ किया।[2] इस राज्य में उन्होंने दरभंगा जिले का कलेक्टर, वित्त सचिव और मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएँ दी। राज्य से संघीय सरकार में प्रतिनियुक्ति पर उन्होंने १९७० से १९७५ तक कृषि और योजना आयोग मंत्रालय में भूमि सुधार आयुक्त के रूप में कार्य किया। ला॰ब॰शा॰रा॰प्र॰अ॰ के निर्देशक नियुक्त हो जाने के बाद १९८२ में उन्होंने उपरोक्त सेवा को स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति के लिए चुना।[3]

उनके कई तरह के विशेषण नाम भी थे, यथा "विकास अर्थशास्त्री"। ऐसा इंसान जिसे नेताओं से अपनी बात साफ़ साफ़ कहने में कोई गुरेज़ नहीं था, "ऐसा शख़्स जिसे दस्तूर की कोई फ़िक्र नहीं थी।[4]

पीएस अप्पू को २००६ में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया।[5]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. जॉनसन टी॰ए॰ (30 मार्च 2012). "IAS legend who put values before protocol" [आय ए एस दिव्य चरित्र जिसने नवाचार से पूर्व मूल्यों को महत्व दिया।] (अंग्रेज़ी में). बंगलौर. अभिगमन तिथि 24 सितम्बर 2013. नामालूम प्राचल |publiser= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद)
  2. मन्दार, हर्ष (2 अप्रैल 2012). "He recognised the value of dissent" [उन्होंने असहमति का महत्व स्वीकार किया।] (अंग्रेज़ी में). द हिन्दू (समाचार पत्र). अभिगमन तिथि 24 सितम्बर 2013.
  3. आलघ,, योगिन्द्र कुमार (4 अप्रैल 2012). "A CIVIL SERVANT'S ROLE MODEL" [एक आदर्श सिविल सेवक] (अंग्रेज़ी में). द इंडियन एक्सप्रेस (समाचार पत्र). अभिगमन तिथि 24 सितम्बर 2013.
  4. रेहान फ़ज़ल (24 सितम्बर 2013). "अधिकारी जिसने झुकाया गृहमंत्री, प्रधानमंत्री को". बीबीसी हिन्दी. अभिगमन तिथि 24 सितम्बर 2013.
  5. "56 receive Padma awards" [56 को मिला पद्म भूषण] (अंग्रेज़ी में). 29 मार्च 2006. अभिगमन तिथि 24 सितम्बर 2013.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]