पारिस्थितिक पदचिह्न

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पारिस्थितिक पदचिह्न, पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्रों पर मानवीय माँग का एक मापक है। यह इंसान की मांग की तुलना, पृथ्वी की पारिस्थितिकी के पुनरुत्पादन करने की क्षमता से करता है। यह मानव आबादी द्वारा उपभोग किए जाने वाले संसाधनों के पुनरुत्पादन और उससे उत्पन्न अपशिष्ट के अवशोषण और उसे हानिरहित बनाकर लौटाने के लिए ज़रूरी जैविक उत्पादक भूमि और समुद्री क्षेत्र की मात्रा को दर्शाता है। इसका प्रयोग करते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अगर प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित जीवन शैली अपनाए, तो मानवता की सहायता के लिए पृथ्वी के कितने हिस्से (या कितने पृथ्वी ग्रह) की ज़रूरत होगी। 2006 के लिए मनुष्य जाति के कुल पारिस्थितिक पदचिन्ह को 1.4 पृथ्वी ग्रह अनुमानित किया गया था, अर्थात मानव जाति पारिस्थितिक सेवाओं का उपयोग पृथ्वी द्वारा उनके पुनर्सृजन की तुलना में 1.4 गुना तेज़ी से करती है।[1] प्रति वर्ष इस संख्या की पुनर्गणना की जाती है – संयुक्त राष्ट्र को आधारभूत आंकड़े इकट्ठा करने और प्रकाशित करने में समय लगने के कारण यह तीन साल पीछे चलती है।

जहां पारिस्थितिक पदचिह्न शब्द का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है, वहीं इसके मापन के तरीके भिन्न होते हैं।[2] हालांकि गणना के मानक अब ज्यादा तुलनात्मक और संगत परिणाम देने वाले बन कर उभर रहे हैं।[3]

विश्लेषण[संपादित करें]

विभिन्न राष्ट्रों के उनके मानव विकास सूचकांक की तुलना में पारिस्थितिक पदचिह्न।

इतिहास[संपादित करें]

पारिस्थितिक पदचिह्न के बारे में पहला शैक्षणिक प्रकाशन 1992 में विलियम रीस द्वारा किया गया था।[4] पारिस्थितिक पदचिह्न की अवधारणा और गणना की विधि 1990-1994 में कनाडा के वैंकुवर में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में रीस के पर्यवेक्षण में मेथिस वैकरनाजेल के PhD शोध प्रबंध में विकसित की गई।[5] मूलत: वैकरनाजेल और रीस ने इस अवधारणा को "एप्रोप्रिएटेड कैरिइंग कैपेसिटी" कहा।[6] इस अवधारणा को और सुलभ बनाने के लिए रीस ने "पारिस्थितिक पदचिह्न" नाम को पेश किया, जो एक कंप्यूटर तकनीशियन द्वारा उनके नए कंप्यूटर के "मेज पर छोटे पदचिह्न" की प्रशंसा से प्रेरित था।[7] 1996 की शुरुआत में वैकरनाजेल और रीस ने ऑवर इकोलॉजिकल फुटप्रिंट: रिड्यूसिंग ह्यूमन इंपैक्ट ऑन द अर्थ पुस्तक का प्रकाशन किया।[8]

पारिस्थितिक पदचिह्न विश्लेषण, प्रकृति पर मानव मांग की तुलना, जीवमंडल के संसाधनों के पुनरुत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता से करती है। यह प्रचलित तकनीक का उपयोग करते हुए ऐसा करती है जिसके तहत वह मानव जाति द्वारा संसाधनों के उपभोग और उनके द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट के अवशोषण के लिए आवश्यक जैविक रूप से उत्पादक भूमि और समुद्री इलाके का आकलन करती है। एक सर्वेक्षण के अंत में पदचिह्न मूल्यों को कोयला, भोजन, आवास और सामग्रियों तथा सेवाओं के लिए वर्गीकृत किया जाता है, साथ ही साथ पृथ्वी की कुल पदचिह्न संख्या जो उपभोग के उस स्तर पर विश्व की जनसंख्या को बनाये रखने के लिए आवश्यक है। यह दृष्टिकोण एक उत्पाद के निर्माण या कार को चलाने जैसी गतिविधि पर भी लागू किया जा सकता है। यह संसाधन लेखा, जीवन चक्र विश्लेषण के समान ही है जिसमें ऊर्जा, जैव ईंधन, (भोजन, रेशे), निर्माण सामग्री, जल और दूसरे संसाधनों को भूमि के सामान्यीकृत माप में परिवर्तित किया जाता है, जिसे 'वैश्विक हैक्टेयर' (gha) कहा जाता है।

प्रति व्यक्ति पारिस्थितिक पदचिह्न (EF), उपभोग औऱ जीवन शैली की तुलना करने और इस उपभोग को प्रदान करने की प्रकृति की क्षमता जांचने का एक साधन है। यह उपकरण, कोई देश अपनी सीमा में उपलब्ध चीज़ों का किस हद तक ज्यादा (या कम) उपयोग करता है या देश की जीवन शैली किस हद तक वैश्विक स्तर पर अनुकरणीय होगी इसका परीक्षण कर, राजशासन नीति को सूचित कर सकता है। पदचिह्न, व्यक्तिगत व्यवहार को सुधारने के उद्देश्य से लोगों को प्रभार क्षमता और अधिक-खपत के बारे में शिक्षित करने के लिए भी एक उपयोगी उपकरण हो सकता है। पारिस्थितिक पदचिह्न का इस्तेमाल इस बात पर तर्क करने के लिए किया जा सकता है कि कई वर्तमान जीवन शैलियां पोषणीय नहीं हैं। इस तरह की वैश्विक तुलना इस ग्रह पर इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में संसाधनों के उपयोग में अनियमितताओं को स्पष्ट तौर पर दर्शाती है।

2006 में दुनिया भर में औसत प्रति व्यक्ति जैविक उत्पादक क्षेत्र लगभग 1.8 वैश्विक हैक्टेयर (gha) प्रति व्यक्ति था। अमेरिका का पदचिह्न प्रति व्यक्ति 9.0 gha और स्विट्जरलैंड का 5.6 gha प्रति व्यक्ति था जबकि चीन का 1.8 gha प्रति व्यक्ति था।[9][10] WWF का दावा है कि ग्रह पर मानव पदचिह्न जैवक्षमता (प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्ध आपूर्ति) से 20% ज्यादा हो गया है।[11] वैकरनाजेल और रीस ने मूल रूप से आकलित किया कि उस समय पृथ्वी के 6 अरब लोगों के लिए उपलब्ध जैविक क्षमता 1.3 हैक्टेयर प्रति व्यक्ति थी जो 2006 के लिए प्रकाशित 1.8 वैश्विक हैक्टेयर से कम थी, क्योंकि प्रारंभिक अध्ययनों में न तो वैश्विक हैक्टेयर और ना ही समुद्री क्षेत्रों की जैव-उत्पादकता को शामिल किया गया था।[8]

विभिन्न NGO वेबसाइटें किसी की पारिस्थितिकी पदचिह्न के आकलन की अनुमति देती हैं (नीचे पदचिह्म परिकलक देखें).

आजकल पारिस्थितिक पदचिह्न का पूरे विश्व में पर्यावरण स्थिरता के एक संकेतक के रूप में व्यापक तौर पर प्रयोग किया जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] ये पूरी अर्थव्यवस्था के संसाधनों के उपयोग के मापन और प्रबंधन के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनका उपयोग व्यक्तिगत जीवन शैली, वस्तुओं तथा सेवाओं, संगठनों, उद्योग क्षेत्रों, पड़ोस, शहरों, क्षेत्रों और देशों की स्थिरता का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है।[12] 2006 से, पारिस्थितिक पदचिह्न मानकों का एक प्रथम सेट मौजूद है जो संचार और गणना, दोनों विधियों का वर्णन करता है। वे www.footprintstandards.org पर उपलब्ध हैं और इन्हें Global Footprint Network और इसके partner organizations द्वारा सुलभ की गई एक सार्वजनिक प्रक्रिया में विकसित किया गया।

कार्यप्रणाली[संपादित करें]

राष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक पदचिह्न लेखा विधि का वर्णन Living Planet Report में किया गया है। [8] वैश्विक पदचिह्न तंत्र की राष्ट्रीय लेखा समिति ने भी इस विषय पर एक अनुसंधान एजेंडा प्रकाशित किया है कि कैसे इस पद्धति में सुधार किया जाए.[13]

विभिन्न पारिस्थितिक पदचिह्न अध्ययनों द्वारा प्रयोग की गई कार्यप्रणालियों में अंतर रहा है। उदाहरणों में शामिल है, कैसे समुद्री क्षेत्र की गणना की जाए, कैसे जीवाश्म ईंधन का हिसाब रखा जाए, परमाणु शक्ति का लेखा कैसे रखा जाए (कई अध्ययन[weasel words] साधारण रूप से इसे, जीवाश्म ईंधन के पारिस्थितिक पदचिह्न के समान ही मानते हैं),[कृपया उद्धरण जोड़ें]किस आंकड़ा स्रोत का उपयोग किया गया, विशेष क्षेत्र पर ध्यान दिए जाने की स्थिति में वैश्विक संख्याएं या स्थानीय संख्याएं कब प्रयोग की जानी चाहिए, कैसे जैवविविधता का क्षेत्र शामिल किया जाना चाहिए और कैसे आयातों/निर्यातों का लेखा रखा जाना चाहिए। [9]林士坚 论文. Doc[मृत कड़ियाँ] हालांकि नए footprint standards के साथ विधियां बदल रही हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

2003 में जेसन वेनेटॉलिस, PhD, कार्ल मास, क्रिस्टोफर गुडोएट, डाहलिआ शेज़ान और जॉन टालबर्थ – पुनर्परिभाषित करने पर लगे शोधकर्ताओं के एक दल ने पदचिह्न 2.0 विकसित किया। पदचिह्न 2.0 मानक पदचिह्न दृष्टिकोण के लिए सैद्धांतिक और प्रक्रियात्मक सुधार उपलब्ध कराता है। प्राथमिक प्रगति में, पृथ्वी की पूरी सतह की जैवक्षमता आकलन, दूसरी (गैर मानव) जातियों के लिए स्थान आबंटन, कृषि भूमि से कुल प्राथमिक उत्पादकता (NPP) से समानीकरण कारकों के बदलाव का आधार और पदचिह्न के कार्बनिक अवयवों के बदलाव, जो कि वैश्विक कार्बन मॉडलों पर आधारित थे, को समाहित किया जाना था। प्रगति की सामूहिक समीक्षा की गई और कई पुस्तकों में इसे प्रकाशित किया गया और इसे शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा पैरवी करने वाले संगठनों से अच्छी स्वीकार्यता मिली जो मानवीय पदचिह्न के पारिस्थितिक निहितार्थों के प्रति सचेत थे।[14][15]

यूनाइटेड किंगडम में अध्ययन[संपादित करें]

ब्रिटेन का औसत पारिस्थितिक पदचिह्न 5.45 वैश्विक हैक्टेयर प्रति व्यक्ति (gha) है जो कि क्षेत्रों के बीच परिवर्तित होकर 4.8 gha (वैल्स) से 5.56 gha (पूर्वी इंग्लैंड) के बीच रहता है।[10] हाल ही में संपन्न दो अध्ययनों ने तुलनात्मक रूप से कम-असर वाले छोटे समुदायों की जांच की। दक्षिण लंदन में पीबॉडी ट्रस्ट के लिए बिल डंस्टर वास्तुकार और स्थिरता सलाहकार बायोरीजनल ने BedZED, एक 96 घरों वाले मिश्रित आय वाले आवास विकसित किए। संबंधित "मुख्यधारा" से जुड़े घर खरीदारों द्वारा बसे होने के बावजूद वहां मौजूद पुनर्नवीनीकृत ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा कुशल वास्तुकला और एक सघन हरी जीवन शैली कार्यक्रम जिसमें लंदन के पहले कार साझा करने वाले क्लब के शामिल होने के कारण BedZED का पदचिह्न 3.20 gha पाया गया। रिपोर्ट ने उन 15000 आगंतुकों के पदचिह्न का आकलन नहीं किया जो BedZED के 2002 में पूरा होने के बाद पहुंचे। स्कॉटलैंड के मोरे के एक ग्रामीण अभिप्रेत समुदाय फिंधोर्न ईकोविलेज का कुल पदचिह्न 2.56 gha था जिसमें कई अतिथि और आगंतुक भी शामिल हैं जो समुदाय में और नज़दीकी क्लूनी हिल कॉलेज के परिसर में आवासीय पाठ्यक्रम अपनाने आते हैं। हालांकि निवासियों का खुद का पदचिह्न 2.71 gha था जो ब्रिटेन के राष्ट्रीय औसत से आधे से ज़रा ज्यादा था और औद्योगिक विश्व के किसी भी समुदाय के तब तक के आकलित पारिस्थितिक पदचिह्नों में सबसे कम में से एक था।[16][17] कॉर्नवाल में जैविक कृषि का एक समुदाय, Keveral Farm का पदचिह्न 2.4 gha पाया गया यद्यपि समुदाय के सदस्यों के पदचिह्नों में काफी अंतर पाया गया।[18]

चर्चा[संपादित करें]

1999 में वेन डेन बर्घ और वरब्रुगेन द्वारा आरंभिक आलोचनाओं को प्रकाशित किया गया था।[19] एक और समीक्षा का प्रकाशन 2008 में किया गया।[20] पर्यावरण के लिए निदेशालय-जनरल (यूरोपीय आयोग) द्वारा अधिकृत और जून 2008 में प्रकाशित एक और सम्पूर्ण समीक्षा, पद्धति का सर्वाधिक अद्यतन स्वतंत्र मूल्यांकन प्रदान करती है।[21] इस विधि की वैधता का परीक्षण करने के लिए अनेक देश अनुसंधान सहयोग में लगे हुए हैं। इसमें स्विट्जरलैंड, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात और बेल्जियम शामिल हैं।[22]

ग्राज़ी व अन्य ने (2007) स्थानिक कल्याण विश्लेषण के साथ, जिसमें पर्यावरण संबंधी बहिर्मुखता, जमाव प्रभाव और व्यापार लाभ शामिल हैं, पारिस्थितिकी पदचिह्न विधि की व्यवस्थित तुलना को प्रदर्शित किया है।[23] वे पाते हैं कि आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न स्थानिक पैटर्न में दोनों तरीके काफी भिन्न दर्जा फलित करते हैं, यहां तक कि बिलकुल विपरीत। हालांकि, यह आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए चूंकि दोनों नियम विभिन्न अनुसंधान सवालों को उठाते हैं।

सघन आबादी वाले क्षेत्रों के लिए पारिस्थितिक पदचिह्न की गणना, जैसे एक शहर की या अपेक्षाकृत बड़ी आबादी वाले छोटे देश की - उदाहरण के लिए क्रमशः न्यूयॉर्क और सिंगापुर - इन आबादियों के बारे में "परजीवी" की धारणा को जन्म दे सकती है। ऐसा इसीलिए है क्योंकि इन समुदायों के पास कम मात्रा में आंतरिक जैविक क्षमता होती है और इसके बजाए वृहद भीतरी प्रदेश पर भरोसा करना चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि यह एक संदिग्ध वर्णन है क्योंकि विकसित देशों में यंत्रीकृत ग्रामीण किसान, शहरी निवासियों की तुलना में अधिक संसाधन का उपभोग कर सकते हैं, जिसकी वजह है परिवहन आवश्यकताएं और स्तरीय अर्थव्यवस्था की अनुपलब्धता। इसके अलावा, इस तरह के नैतिक निष्कर्ष आत्मनिर्भर अर्थतंत्र के लिए एक तर्क प्रतीत होते हैं। कुछ लोग विचारों की इस श्रृंखला को एक कदम और आगे ले जाते हैं, इस दावे के साथ कि पदचिह्न, व्यापार के लाभ से इनकार करते हैं। इसलिए, आलोचकों का तर्क है कि केवल विश्व स्तर पर पदचिह्न को लागू किया जा सकता है।[24]

ऐसा प्रतीत होता है कि यह विधि मूल पारिस्थितिकी को उच्च-उत्पादकता वाले कृषि सम्बन्धी एकल-कृषि से प्रतिस्थापित करने को पुरस्कृत करती है जिसके लिए यह ऐसे क्षेत्रों को एक उच्च जैविक-क्षमता निर्धारित करती है। उदाहरण के लिए, एकल उपज वन या वृक्षारोपण के साथ प्राचीन वनप्रदेश या उष्णकटिबंधीय वन पारिस्थितिक पदचिह्न में सुधार ला सकते हैं। इसी प्रकार, यदि जैविक कृषि की पैदावार, पारंपरिक विधियों की तुलना में कम होती है, तो हो सकता है कि इस कारण से जैविक को वृहद पारिस्थितिक पदचिह्न के साथ "दण्डित" किया जाए।[25] बेशक, वैध होते हुए यह अंतर्दृष्टि, किसी के लिए एकमात्र मेट्रिक के रूप में पदचिह्न का उपयोग करने के विचार से उपजी थी। अगर पारिस्थितिक पदचिह्न के उपयोग को अन्य संकेतको के साथ जोड़ा जाता है तो, जैसे जैव विविधता के लिए, इस समस्या को हल किया जा सकता है। वास्तव में, WWF की लिविंग प्लानेट रिपोर्ट, जैव विविधता की लिविंग प्लानेट सूचकांक के द्विवार्षिक पदचिह्न गणना का पूरक बनती है।[26] मनफ्रेड लेंज़ेन और शौना मूर्रे ने एक संशोधित पारिस्थितिक पदचिह्न का निर्माण किया है जो ऑस्ट्रेलिया में इस्तेमाल किए जाने के लिए जैव विविधता को समाहित करता है।[27]

हालांकि 2008 के पूर्व के पारिस्थितिक पदचिह्न मॉडल, नाभिकीय ऊर्जा के साथ कोयला ऊर्जा के समान ही व्यवहार करते हैं,[28] वास्तव में दोनों का वास्तविक विश्व प्रभाव मूलतः अलग है। स्वीडिश फ़ोर्समार्क न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के इर्द-गिर्द केन्द्रित एक जीवन चक्र विश्लेषण ने 2002 में टोर्नेस न्यूक्लियर पॉवर स्टेशन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 3.10 g/kWh[29] और 5.05 g/kWh अनुमानित किया।[30] यह हाइड्रोलेक्ट्रिक पॉवर के लिए 11 g/kWh, स्थापित कोयला के लिए 950 g/kWh, तेल के लिए 900 g/kWh और 1999 में संयुक्त राज्य में प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए 600 g/kWh है।[31]

वेट्टनफॉल अध्ययन ने दर्शाए गए अन्य स्रोतों की तुलना में परमाणु, जल और पवन को काफी कम ग्रीनहाउस उत्सर्जन करने वाला पाया।

स्वीडिश वेटनफॉल सुविधा ने नाभिकीय, हाइड्रो, कोयला, गैस, सौर सेल, पीट और पवन के सम्पूर्ण जीवन चक्र के उत्सर्जन का अध्ययन किया, जिसका उपयोग यह सुविधा बिजली के उत्पादन के लिए करती है। अध्ययन का शुद्ध परिणाम यह था कि नाभिकीय ऊर्जा ने उत्पादित ऊर्जा के प्रति KW-Hr में 3.3 ग्राम के कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन किया। यह प्राकृतिक गैस के लिए 400 और कोयला के लिए 700 है (अध्ययन के अनुसार). इस अध्ययन में यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि नाभिकीय ऊर्जा उनके किसी भी ऊर्जा स्रोतों के CO2 की न्यूनतम मात्रा का उत्पादन करती है।[32]

ऐसे दावे हैं कि नाभिकीय अपशिष्ट की समस्याएं, जीवाश्म ईंधन अपशिष्ट की समस्या के आस-पास नहीं पहुंचती हैं।[33][34] 2004 में BBC के एक लेख में कहा गया: "विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन से होने वाले बाह्य वायु प्रदूषण से दुनिया भर में सालाना 3 लाख लोग मरते हैं और ठोस ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले घरेलू प्रदूषण से 1.6 मिलियन लोग मरते हैं।"[35] केवल U.S. में जीवाश्म ईंधन के अपशिष्ट से प्रति वर्ष 20,000 लोगों की मौत होती है।[36] नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र के समान वाट क्षमता वाला एक कोयला ऊर्जा संयंत्र, उससे 100 गुना अधिक विकिरण उत्सर्जित करता है।[37] यह अनुमान लगाया गया है कि 1982 के दौरान, US की कोयला जलाने की घटना ने थ्री माइल आइसलैंड की घटना की तुलना में, वातावरण में 155 गुना अधिक रेडियोधर्मिता छोड़ी.[38] इसके अलावा, जीवाश्म ईंधन अपशिष्ट ग्लोबल वार्मिंग का कारण होता है जिससे तूफान, बाढ़ और अन्य मौसमी घटनाओं से होने वाली मृत्यु संख्या में वृद्धि हुई है। विश्व परमाणु संघ ने ऊर्जा उत्पादन के विभिन्न रूपों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं की वजह से मरने वालों की संख्या की तुलना पेश करता है। उनकी इस तुलना में, 1970 से 1992 के बीच बिजली उत्पादन की प्रति TW-yr (UK और USA में) मृत्यु, हाइड्रोपॉवर के लिए 885, कोयला के लिए 342, प्राकृतिक गैस के लिए 85 और नाभिकीय के लिए 8 उद्धृत की गई है।[39]

देश के अनुसार[संपादित करें]

देशों के लिए प्रति व्यक्ति पारिस्थितिक पदचिह्न मानचित्र

कुल विश्व पारिस्थितिक पदचिह्न 2.6 वैश्विक हेक्टेयर प्रति व्यक्ति है। पारिस्थितिक आरक्षण, या जैविकक्षमता - उत्पादन के लिए उपलब्ध भूमि की मात्रा, प्रति व्यक्ति 0.8 वैश्विक हेक्टेयर के घाटा पर प्रति व्यक्ति 1.8 वैश्विक हेक्टेयर है।[40]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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अतिरिक्त पठन[संपादित करें]

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  • रीस, W. E. और M. वेकरनागेल (1994) इकोलॉजिकल फुटप्रिंट्स एंड एप्रोप्रिएटेड केरिंग कैपासिटी: मेज़रिंग द नेचुरल कैपिटल रिक्वायरमेंट ऑफ द ह्यूमन इकोनॉमी, जेनसोन में, A. व अन्य . इन्वेस्टिंग इन नैचुरल कैपिटल: द इकोलॉजिकल इकोलॉमिक्स टू सस्टेनबिलिटी . वॉशिंगटन D.C.:आइसलैंड प्रेस ISBN 1-55963-316-6
  • वेकरनागेल, M. (1994), इकोलॉजिकल फुटप्रिंट्स एंड एप्रोप्रिएटेड केरिंग कैपासिटी: ए टूल फॉर प्लानिंग टूआर्ड्स सस्टेनबिलिटी . पीएच.डी. शोध प्रबंध. समुदाय और क्षेत्रीय योजना के स्कूल. ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय.
  • वेकरनागेल, एम. और रीस. 1996. अवर इकोलॉजिकल फूटप्रिंट: रिड्युसिंग ह्यूमन इंपेक्ट ऑन द अर्थ . गेबरियोला द्वीप, BC: न्यू सोसायटी प्रकाशक. ISBN 0-86571-312-X.
  • वेकरनागेल व अन्य. (2002) "Tracking the ecological overshoot of the human economy". राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही, वॉल्यूम. 99 (14) 9266-9271.
  • WWF, ग्लोबल पदचिह्न नेटवर्क, लंदन जीव विज्ञान सोसाइटी (2006) लिविंग प्लानेट रिपोर्ट 2006 . WWF ग्लांड, स्विट्जरलैंड. (https://web.archive.org/web/20070808043056/http://www.footprintnetwork.org/newsletters/gfn_blast_0610.html के माध्यम से 11 भाषाओं में डाउनलोड किया जा सकता है)
  • लेनजेन, एम. और एस. ए. मूर्रे, 2003. द इकोलॉजिकल फूटप्रिंट - इसुस एण्ड ट्रेंड्स ISA Research Paper 01-03
  • चेम्बर्स, N., सीमन्स, C. और वेकरनागेल, M. (2000), शेरिंग नेचर्स इंटेरेस्ट: इकोलॉजिकल फूटप्रिंट्स एज एन इंडिकेटर ऑफ सस्टेनबिलिटी अर्थस्केन, लंदन ISBN 1-85383-739-3 (https://web.archive.org/web/20190905180551/http://ecologicalfootprint.com/ भी देखें)
  • J.C.J.M. वैन डेन बेर्घ और H. वरब्रुग्गेन (1999), 'स्पाशिएल सस्टेनेविलिटी, ट्रेड एण्ड इंडिकेटर्स: एन इवालुशन ऑफ द 'इकोलॉजिकल फूटप्रिंट, 'इकोलॉजिकल इकोनॉमिक्स, Vol. 29 (1): 63-74.
  • ऍफ़. ग्रजी, जे.सी.जे.एम. वैन डेन बेर्घ और पी. रिटवेल्ड (2007). वेलफेयर इकोनॉमिक्स वर्सेज इकोलॉजिकल फूटप्रिंट: मॉडलिंग एग्गलोमेरेशन, एक्सटरनालिटिज एम्ड ट्रेड. एन्वायरनमेंटल एण्ड रिसौर्स इकोलॉमिक्स, Vol. 38 (1): 135-153.
  • ओहल, B., वोल्फ, S., & एंडरसन, W. 2008. ए मोडेस्ट प्रोपोजल: ग्लोबल रेशनलाइजेशन ऑफ इकोलॉजिकल फूटप्रिंट टू एलिमिनेट इकोलॉजिकल डेब्ट. सस्टेनबिलिटी: साइस, प्रेक्टिस, विज्ञान, & पोलिसी 4 (1) :5-16. https://web.archive.org/web/20090124063632/http://ejournal.nbii.org/archives/vol4iss1/0707-016.ohl.html. 3 अप्रैल 2008 में ऑनलाइन प्रकाशित

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