पादप भूगोल

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सन् १९४७ में गुड द्वारा परिभाषित पृथ्वी के वनस्पति महाक्षेत्र

पादप भूगोल (Phytogeography) या वनस्पति भूगोल (botanical geography) जैव भूगोल की वह शाखा है जो पृथ्वी के भिन्न क्षेत्रों पर विभिन्न वनस्पति जातियों के फैलाव के अध्ययन पर केन्द्रित है। इसमें मौसम, भूमीय व समुद्री स्थलाकृति, नदियों-झीलों और मिट्टी की उन परिस्थितियों का भी अध्ययन किया जाता है जिनका प्रभाव इन जातियों पर देखा जाता है।[1][2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Polunin, N. 1960. Introduction to plant geography and some related sciences. New York, McGraw-Hill
  2. Brown, J.H. & Lomolino, M.V. 1998. Biogeography. 2nd edition. Chapter 1.