पहलवी साम्राज्य

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पहलवी साम्राज्य

247 ईसा पूर्व–224 ईस्वी
 

पहलवी साम्राज्य का अधिकतम विस्तार क्षेत्र
राजधानी तेसीफोन,[1] एक्बताना, हेकाटॉमप्य्लोस, सुसा, मिथरदअतकिर्त, असाक, रागेस
भाषाएँ यूनानी (आधिकारिक),[2] पहलवी (आधिकारिक),[3] पारसी भाषा, आरामी भाषा (लोकभाषा),[2][4] अक्कादी[1]
धर्म
शासन सामन्त राजवंश[6]
शहंशाह
 -  247–211 ईसा पूर्व अश्क प्रथम (प्रथम)
 -  208–224 ईस्वी अर्ताबनुस पंचम (अंतिम)
विधानमंडल मेगास्थनीज
ऐतिहासिक युग शास्त्रीय प्राचीनकाल
 -  स्थापित 247 ईसा पूर्व
 -  अंत 224 ईस्वी
क्षेत्रफल
 -  1 ईस्वी[7][8] 28,00,000 किमी ² (10,81,086 वर्ग मील)
मुद्रा द्राच्मा

पहलवी साम्राज्य (अंग्रेज़ी: Parthian Empire 247 ईसा पूर्व – 224 ईस्वी), प्राचीन ईरान और ईराक का प्रमुख राजनैतिक और सांस्कृतिक केन्द्र था।[9] इसका संस्थापक पार्थिया का अश्क प्रथम, जो कि पर्णि कबीले का प्रमुख भी था, ने तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व में पार्थिया क्षेत्र को जीत कर की थी। मिहर्दत प्रथम (शासनकाल 171–138 ईसा पूर्व) ने सेल्युकसी साम्राज्य से मीदिमेसोपोटामिया छीनकर और अधिक विस्तार किया। अपने उत्कर्ष काल में यह साम्राज्य फ़रात नदी तक फैल गया था, जो क्षेत्र वर्तमान में उत्तर-पूर्वी तुर्की से लेकर पूर्वी ईरान तक है। यह साम्राज्य रेशम मार्ग पर स्थित था, जो कि उस समय रोमन साम्राज्यहान राजवंश के मध्य प्रमुख व्यापारिक मार्ग था। इस कारण से यह साम्राज्य व्यापारिक व वाणिज्यिक केन्द्र बन गया था।

पहलवों ने कला, वास्तु-कला, धार्मिक मान्यताएँ और राजचिह्न वृहत स्तर पर अपने समकालीन सांस्कृतिक साम्राज्यों सी ली थी, जो कि पर्शियनहेलिनिस्टिक कालखण्ड को परलक्षित करते हैं। इस साम्राज्य के प्रथम अर्ध कालखण्ड पर यूनानी संस्कृति की छाप दिखती हैं, जो कि धीरे-धीरे अंत तक ईरानी संस्कृति में परिवर्तित हो जाती है। पहलवी साम्राज्य के शासकों को "राजाधिराज" को उपाधि प्राप्त थी क्योंकि ये स्वयं को हख़ामनी साम्राज्य का वास्तविक उत्तराधिकारी मानते थे।

प्रारम्भ में पहलवों के शत्रु पश्चिम में सेल्युकसी साम्राज्य व पूर्व में शक थे। जैसे-जैसे इनके साम्राज्य का पश्चिम की ओर विस्तार हुआ, उनका सीधा संघर्ष आर्मेनियाई साम्राज्यरोम गणतन्त्र से होने लगा। रोमनों व पहलवों में आर्मेनिया के राजाओं को अपने कठपुतली के रूप में स्थापित करने की होड़ लगी रहती थी। पहलवों ने रोमन गवर्नर मार्कस लिसीनियस क्रास्सस को 53 ईसा पूर्व में कार्रहाए के युद्ध में निर्णायक रूप से हराकर 40–39 ईसा पूर्व तक टायर को छोड़कर पूरे लेवांट क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। तथापि मार्क एन्टोनी ने जवाबी आक्रमण करके एक सीमित सफलता प्राप्त की। इस तरह से कुछ शताब्दियों तक रोमन-पहलव युद्ध चलता रहा। इन युद्धों में कई बार रोमनों ने सेल्युसिया व तेसीफोन नगरों पर नियंत्रण तो किया परन्तु वे लम्बे समय तक इसे अपने हाथ में नहीं रख पाये। इसी बीच सिंहासन के लिये पहलवों के मध्य ही गृह युद्ध होने लग गये जो कि विदेशी आक्रमण से भी अधिक खतरनाक थे। पहलव साम्राज्य का पतन तब हुआ जब फ़ार्स के इश्तकिर के शासक अर्दशीर प्रथम ने पहलवों के विरुद्ध बगावत कर दी व अंतिम शासक अर्ताबनुस पंचम की हत्या करके सासानी साम्राज्य की स्थापना की, जो कि ईरान पर मुस्लिम आक्रमण के पहले सातवीं शताब्दी तक अस्तित्व में रहा।

पहलवीयूनानी में लिखे मूल पहलव स्रोत सासानीहख़ामनी की तुलना में बहुत ही दुर्लभ है। फैले हुए कीलाकर फलकों, शिलालेखों, द्राच्मा सिक्कों तथा कुछ चर्मपत्रों के अतिरिक्त पहलवों का इतिहास बाहरी स्रोतों से ही प्राप्त हुए हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. फतह, हाला मुन्धिर (2009). A Brief History Of Iraq. इन्फोबेस प्रकाशन. प॰ 46. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-8160-5767-2. "One characteristic of the Parthians that the kings themselves maintained was their nomadic urge. The kings built or occupied numerous cities as their capitals, the most important being Ctesiphon on the Tigris River, which they built from the ancient town of Opis." 
  2. ग्रीन 1992, पृष्ठ 45
  3. स्काजेर्वो, प्रोड्स ओक्टर. "IRAN vi. IRANIAN LANGUAGES AND SCRIPTS (2) Doc – Encyclopaedia Iranica" (अंग्रेजी में). इनसाइकलोपीडिया ईरानिका. http://www.iranicaonline.org/articles/iran-vi2-documentation. अभिगमन तिथि: 8 फरवरी 2017. "Parthian. This was the local language of the area east of the Caspian Sea and official language of the Parthian state (see ARSACIDS) and is known from inscriptions on stone and metal, including coins and seals, and from large archives of potsherd labels on wine jars from the Parthian capital of Nisa, as well as from the Manichean texts." 
  4. चयेत, माइकल एल॰ (1997). अफसरुद्दीन, अस्मा; क्रोटकॉफ़, जॉर्ज; ज़हनिसर, ए॰ एच॰ मथियास. eds. Humanism, Culture, and Language in the Near East: Studies in Honor of Georg Krotkoff. एइसेन्ब्रौन्स. प॰ 284. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-57506-020-0. "In the Middle Persian period (Parthian and Sasanian Empire), Aramaic language was the medium of everyday writing, and it provided scripts for writing Middle Persian, Parthian, Sogdian, and Khwarezmian." 
  5. ब्रोसियस, मारिया (2006). The Persians. रौटेलेज. प॰ 125. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-203-06815-1. "The Parthians and the peoples of the Parthian empire were polytheistic. Each ethnic group, each city, and each land or kingdom was able to adhere to its own gods, their respective cults and religious rituals. In Babylon the city-god Marduk continued to be the main deity alongside the goddesses Ishtar and Nanai, while Hatra's main god, the sun-god Shamash, was revered alongside a multiplicity of other gods." 
  6. शेल्डन 2010, पृष्ठ 231
  7. तुर्चिन, पीटर; एडम्स, जोनाथन एम॰; हॉल, थॉमस डी॰ (दिसम्बर 2006). "East-West Orientation of Historical Empires". Journal of world-systems research 12 (2): 223. ISSN 1076-156X. http://jwsr.pitt.edu/ojs/index.php/jwsr/article/view/369/381. अभिगमन तिथि: 16 सितम्बर 2016. 
  8. तागेपेरा, रेन (1979). "Size and Duration of Empires: Growth-Decline Curves, 600 B.C. to 600 A.D.". Social Science History 3 (3/4): 121. doi:10.2307/1170959. https://www.jstor.org/stable/1170959. अभिगमन तिथि: 16 सितम्बर 2016. 
  9. वाटर्स 1974, पृष्ठ 424

और अधिक पढ़ें[संपादित करें]

  • नयूस्नेर, जे॰ (1963), "Parthian Political Ideology", ईरानिका एंटीकुआ, 3: 40–59 
  • शिपमैन, क्लॉस (1987), "Arsacid ii. The Arsacid dynasty", ईरानिका एनक्लोपीडिया, 2, न्यू यॉर्क: रूटलेज और केगन पॉल, pp. 526–535 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]