परीक्षागुरु

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यह लाला श्रिनिवास दास द्वारा लिखा गया उपन्यास है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में यह पश्चिमी ढंग पर लिखा गया हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास है। इसमें दिल्ली के बिगड़ैल रईस मदनमोहन के उद्धार की कथा है। इस उपन्यास का नायक मदनमोहन कुछ स्वार्थी, अर्थ लोलुप तथा चाटुकार लोगों की संगति में पड़कर लगभग बर्बाद हो जाता है। इस स्थिति से वह अपनी पत्नी और सच्चे मित्र ब्रजेश्वर की सहायता से बाहर आता है। इसकी कथावस्तु नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाली है।