परम कंचनजंगा

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सुपरकंप्यूटर 'परम कंचनजंगा' का सिक्किम एनआईटी में शुभारंभ हुआ है।

परिचय[संपादित करें]

17 अप्रैल 2016 को सिक्किम के राज्यपाल श्रीनिवास पाटिल ने औपचारिक रूप से परम कंचनजंगा नाम के सुपरकंप्यूटर का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी– एनआईटी) सिक्किम में शुभारंभ किया। इसका नाम कंचनजंगा पर्वत (8586 मी) के नाम पर रखा गया है। यह पर्वत दुनिया का तीसरा सबसे ऊँचा पर्वत है।

31 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में उपलब्ध सभी सुपरकंप्यूटर के मुकाबले परम कंजनजंगा सबसे शक्तिशाली और तेज है।

इसे पुणे की सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी–डैक) और एनआईटी सिक्किम ने मिल कर बनाया है। इस सुपर कंप्यूटर को बनाने में कुल तीन करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

सुपरकंप्यूटर क्या होता है[संपादित करें]

सुपरकंप्यूटर एक ऐसा कंप्यूटर होता है जिसमें सामान्य– उद्देश्य वाले कंप्यूटर की तुलना में उच्च– स्तर की संगणनन क्षमता होती है। सुपरकंप्यूटर का पर्फॉर्मेंस मिलियन इंस्ट्रक्शंस पर सेकेंड (MIPS) की बजाय फ्लोटिंग– प्वाइंट ऑपरेशंस प्रति सेकेंड (FLOPS) में मापा जाता है। 2015 तक ऐसे सुपरकंप्यूटर थे जो क्वाड्रिलियन (एक करोड़ शंख) FLOPS तक पर्फॉर्म कर सकते थे। सुपरकंप्यूटर 1960 के दशक में अस्तित्व में आए। शुरुआत में और प्राथमिक रूप से कई दशकों तक इसे कंट्रोल डाटा ऑपरेशन (सीडीसी) पर सेमोर क्रे, क्रे रिसर्च और अनुवर्ती कंपनियां अपने नाम या मोनोग्राम के साथ बनाती थीं।

जून 2013 में शुरुआत के बाद से चीन की टियान–2 (Tianhe-2 ) सुपरकंप्यूटर विश्व का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर बन गया। यह 33.86 पेटा FLOPS या 33.86 क्वाड्रिलियंस ऑफ FLOPS का प्रदर्शन करता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]