परमानन्द झा

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नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति परमानन्द झा

परमानन्द झा (जन्म :1944, दरभंगा,बिहार, भारत[1]) नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं नेपाल के उच्चतम् न्यायालय के भूतपूर्व न्यायधीश हैं। वेह नेपाल के सबसे सफल जातिवादी पार्टी मधेसी जनाधिकार फोरम से संबन्धित है। नेपाल के संविधान सभा के निर्वाचन से ठीक पहले तराई के गैह्र-नेपालीभाषी (मधेसी, आदिवासी और जनजाति) द्वारा संयुक्त रूप में मधेस आन्दोलन हुआ था। इस आन्दोलन द्वारा प्रवाहित जनउर्जा को तत्कालीन जातीय संस्था, मधेसी जनाधिकार फोरम द्वारा निर्वाचन में प्रतिस्पर्धा कर अपने पक्ष में संचित कर लिया। भाषिक राजनीति के अन्तर्गत मधेसी भाषा (मैथिली, अवधी और भोजपुरी) प्रवर्धन पर वचनवद्ध दल के नेता परमानन्द झा द्वारा उपराष्ट्रपति के रूप में हिंदी में लिया गया सपथ ने लोगों आश्चर्य चकित किया था।

शपथ विवाद[संपादित करें]

दक्षिण नेपाल के तराई क्षेत्र (जिसको परमानन्द झा के पार्टी मधेस के रुपमें वर्णन करते है) से ताल्लुक रखने वाले झा ने जुलाई 2008 में हिन्दी में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। तत्कालीन नेपाली संविधान (नेपालको अन्तरिम संविधान) अनुसार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति केवल राष्ट्रभाषा नेपाली में सपथ ले सकते थे। नेपाली भाषा में सपथ ना लेना संविधान का उल्लंघन था। अतः, उन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में कुछ नागरिक द्वारा मुकदमा चलाया गया। जव सर्वोच्च न्यायालय नें उनसे स्पष्टिकरण माग किया तो उन्हौंने नेपाल टेलेभिजन (नेपाल का राष्ट्रिय टेलेभिजन) में नेपाली भाषा में यह कहा कि उन्हे नेपाली भाषा का ज्ञान नहीं है। नेपाल में संविधान अनुरुप नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदी में लिए हुए सपथ को आधिकारिक नहीं माना और उपराष्ट्रपति पद के लिए परमानन्द झा को एक हफ्ते के अंदर फिर से संवैधानिक रूप में नेपाली भाषा में शपथ लेने के लिए निर्णय जारी किया। परमानन्द झा ने ऐसा नहीं किया। उनके निर्णय समय में दुसरे कारण से ६ माह तक माओवादी पार्टी द्वारा सदन अवरुद्ध हुआ था। अतः, ६ माह तक उनका पद निश्कृय रहा जिसका अर्थ नेपाल के विधान मन्त्री अनुसार वेह पद के लिए योग्य है और पद में आसीन करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद उप राष्ट्रपति बन सकते हैं। संविधानसभा का सदन सुचारु होने के बाद व्यवस्थापिका संसद में सपथ के भाषा सम्बन्धित अनुमोदन हुआ जिसके अनुसार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति राष्ट्रभाषा और मातृभाषा में कोही भी भाषा में सपथ लेने का अधिकार प्रदान किया गया। इस के बाद ७ फ़रवरी २०१० को उन्होने नेपाली एवं अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेकर संविधान सम्मत रूप से पदग्रहण किया।

जीवनी[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  1. http://www.gorkhapatra.org.np/detail.php?article_id=3520&cat_id=5