पद्मा बंदोपाध्याय

डॉ पद्मा बंदोपाध्याय (जन्म 4 नवंबर 1944) भारत की पहली महिला एयर वाइस मार्शल हैं। वह एयर कॉमॉडोर के पद पर पदोन्नत होने के लिए भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी और भारत के एयरोस्पेस मेडिकल सोसायटी की पहली हैं। वह उत्तरी ध्रुव में वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। उनकी एक और उपलब्धि यह है कि वह भी रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। 1973 में उन्हें विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुआ और 1991 में उन्हें ए एफ एच ए पुरस्कार प्राप्त हुआ। [1] इन्हे चिकित्सा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन २०२० में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
सेना में महिलाओं के योगदान पर पद्मा बंदोपाध्याय के विचार
[संपादित करें]डॉ पद्मा बंदोपाध्याय के अनुसार "सेना की वर्दी उन युवतियों के लिए नहीं है जो महज रोमांच के लिए इस सेवा में आना चाहती हैं। अगर कोई लड़की मानसिक तौर पर तैयार नहीं होगी तो यह सविर्स उसके लिए एवरेस्ट को फतह करने से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो सकती है। सेना में कई मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है। इनसे उन्हें एक आम सैनिक की तरह निबटना होता है और महिला होने के नाते वे इससे बच नहीं सकतीं। वैसे, किसी महिला अधिकारी के आत्महत्या करने से यह नहीं माना जाना चाहिए कि सेना महिलाओं को रखने में सक्षम नहीं है। इस सर्विस में आनेवाली कठिनाइयों को चैलेंज के रूप में भी लिया जा सकता है और सजा के तौर पर भी। यह सब मानसिकता पर निर्भर करता है।" [2]
इन्हे भी देखे
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Women in Science". Scientistindia.com. मूल से से 28 October 2015 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 20 September 2013.
- ↑ "संवेदनशील बने फौज". नवभारत टाइम्स. 21 September 2013 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 20 September 2013.