पद्मा बंदोपाध्याय

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डॉ पद्मा बंदोपाध्याय भारत की पहली महिला एयर वाइस मार्शल हैं। वह एयर कॉमॉडोर के पद पर पदोन्नत होने के लिए भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी और भारत के एयरोस्पेस मेडिकल सोसायटी की पहली हैं। वह उत्तरी ध्रुव में वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। उनकी एक और उपलब्धि यह है कि वह भी रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। 1973 में उन्हें विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुआ और 1991 में उन्हें ए एफ एच ए पुरस्कार प्राप्त हुआ।[1]

सेना में महिलाओं के योगदान पर पद्मा बंदोपाध्याय के विचार[संपादित करें]

डॉ पद्मा बंदोपाध्याय के अनुसार "सेना की वर्दी उन युवतियों के लिए नहीं है जो महज रोमांच के लिए इस सेवा में आना चाहती हैं। अगर कोई लड़की मानसिक तौर पर तैयार नहीं होगी तो यह सविर्स उसके लिए एवरेस्ट को फतह करने से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो सकती है। सेना में कई मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है। इनसे उन्हें एक आम सैनिक की तरह निबटना होता है और महिला होने के नाते वे इससे बच नहीं सकतीं। वैसे, किसी महिला अधिकारी के आत्महत्या करने से यह नहीं माना जाना चाहिए कि सेना महिलाओं को रखने में सक्षम नहीं है। इस सर्विस में आनेवाली कठिनाइयों को चैलेंज के रूप में भी लिया जा सकता है और सजा के तौर पर भी। यह सब माइंडसेट पर निर्भर करता है।"[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Women in Science". Scientistindia.com. अभिगमन तिथि September 20,2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. "संवेदनशील बने फौज". नवभारत टाइम्स. अभिगमन तिथि September 20,2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)