पदयात्रा

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पदयात्रा, राजनेताओं या प्रमुख नागरिकों द्वारा समाज के विभिन्न हिस्सों के साथ अधिक निकटता से बातचीत करने, उनसे संबंधित मुद्दों के बारे में शिक्षित करने और अपने समर्थकों को प्रेरित करने के लिए की गई पैदल यात्रा होती है। पद यात्रा या 'पद तीर्थ' हिंदू धार्मिक तीर्थस्थल की ओर जाने वाले पैदल यात्रियों के लिये भी प्रयोग होता हैं।

सामाजिक कारण[संपादित करें]

सामाजिक कारण के लिये किये जाने वाले पदयात्रा का एक उदाहरण दांडी मार्च है, जिसे नमक मार्च, दांडी सत्याग्रह के रूप में भी जाना जाता है जो सन् 1930 में महात्मा गांधी के द्वारा अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया गया सविनय कानून भंग कार्यक्रम था। ये ऐतिहासिक सत्याग्रह कार्यक्रम गाँधीजी समेत ७८ लोगों के द्वारा अहमदाबाद साबरमती आश्रम से समुद्रतटीय गाँव दांडी तक पैदल यात्रा करके 06 अप्रैल १९३० को नमक हाथ में लेकर नमक विरोधी कानून का भंग किया गया था। भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के समय नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बड़ी मात्रा में कर लगा दिया था और नमक जीवन के लिए जरूरी चीज होने के कारण भारतवासियों को इस कानून से मुक्त करने और अपना अधिकार दिलवाने हेतु ये सविनय अवज्ञा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कानून भंग करने के बाद सत्याग्रहियों ने अंग्रेजों की लाठियाँ खाई थी परंतु पीछे नहीं मुड़े थे। 1930 को गाँधी जी ने इस आंदोलन का चालू किया। इस आंदोलन में लोगों ने गाँधी के साथ पैदल यात्रा की और जो नमक पर कर लगाया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]