लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी रसपुंज

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पं. लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी रसपुंज मूल रूप से वाराणसी के निवासी थे। वे पूजा-पाठ और यज्ञ-कथा करवाने के लिए मारीशस आया जाया करते थे। उन्होंने इसी देश में १९२३ में प्रथम काव्य संग्रह रसपुंज की कुंडलियाँ की रचना की। १९३५ में उनकी दूसरी पुस्तक शताब्दी सरोज प्रकाशित हुई।[1]


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. पांडेय, राकेश (जनवरी अक्टूबर-दिसम्बर २००५). मारीशस में हिन्दी एक सिंहावलोकन. गीता कालोनी, नई दिल्ली: प्रवासी संसार. पृ॰ १३-१९. |year= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)