पं.रामदुलारे शर्मा

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श्री पं.रामदुलारे शर्मा जी का जन्म प्रतापगढ़ ब्लाक संडवा चन्द्रिका के  पूरेभीषमशाह गाँव जो कि मकईपुर ग्रामसभा का भाग है | इसी ग्राम सभा के एक सामान्य ब्रह्मण परिवार में हुआ था | इनके पिता जी का नाम  श्री बिन्धेश्वरी प्रसाद शर्मा था | शर्मा जी को उनके गाँव के लोग बडके भैया कहकर सम्मान देते थे कोई उनका नाम नहीं लेता था | जो भी जिस प्रकार प्रभावित होता एक नाम रख लेता था, इस तरह से शर्मा जी को लोग गुरूजी, शर्माजी, बप्पा, द्रोणाचार्य, बडके भैया, पहाड़ी, हिन्दी की माई और जादूगर आदि नामों से पुकारते थे | समाज सेवा & कार्य क्षेत्र :- सन् 1943 में ही गाँव के पश्चिम तरफ थोड़ी दूरी पर सई नदी पार करते ही एक गाँव पहाडपुर है, वही के भले मानस पंडित भगवानदीन दूबे जी थे जो उस समय विदेश में रहते थे और काफी पैसे वाले एवं इज्जतदार मानिंद व्यक्ति थे | उन्होंने पहाड़पुर में ही एक विद्यालय और चिकित्सालय का निर्माण शुरू किया और उस निर्माण में आस पड़ोस के गाँव के लोगों से सहायता मांगी गई तो शर्माजी ने आरी-पड़ोस के गाँव से बच्चों के प्रवेश में मदद कराने और हिन्दी पढ़ाने के साथ-साथ व्ययाम-शिक्षक की डिउटी की जिम्मेदारी ली और बड़ी तन्मयता के साथ काम में लग गए | धीरे-धीरे काफिला बना और लोगों ने सहयोग दिया जिसकी वजह से कुछ ही दिनों में विद्यालय का नाम पूरे जनपद में होने लगा | ‘भगवानदीन दूबे इण्टर कालेज पहाड़पुर’ का नाम खेल के क्षेत्र में कई दशकों तक अग्रणी रहा जिसका सम्पूर्ण श्रेय पं.रामदुलारे शर्मा जी को जाता है | शर्मा जी हमेशा कहते थे :- “कर बहियाँ बल आपनी छांड बिरानी आश |” व्ययाम-शिक्षक के रूप में कार्य कुशलता के कारण तथा शिष्यों के प्रति अगाध प्रेम और उनको खेलने के तरीके को बताने की वजह से लोग शर्मा जी को द्रोणाचार्य के नाम से भी पुकारते थे | शर्मा जी एक उम्दा न्यायप्रिय रेफरी भी थे | जब कभी वे काली शेरवानी में रेफरी के रूप में खड़े होते तो गौर वर्ण पर काली शेरवानी अति शोभायमान होती तो लोग प्यार में उन्हें पहाड़ी भी कहते और जब कभी हांकी लेकर हाफ पैंट में मैदान में खेलने उतर जाते तो लोग बिजली   कहते | यह उनके उपनाम थे जो उनको उनके प्रिय लोग अपनी नजरों से देखकर बुलाते थे | शर्मा जी का पूरे डबरे में बहुत सम्मान था | शर्मा जी ने 60 वर्ष तक पहाड़पुर इण्टर कालेज में अपनी सेवा दी तदुपरांत नवंबर 1984 को अध्यापन कार्य से सेवानिवृति हो गए | फिर भी उन्होंने अपने कार्य को गति देते हुए समाज के उत्थान के लिए  जेंवार के ही दो विद्यालयों तेतारपुर ग्राम के पंडित शिवबरन पाण्डेय जी का विद्यालय और संकट मोचन माध्यमिक विद्यालय राजापुर रैनिया को क्रमश: चलाने में अपना योगदान प्रदान किया | शर्माजी अपनी कार्य कुशलता के कारण पूरे जनपद में बहुत प्रसिद्ध हुए | शर्मा जी ने समाज के सभी वर्गों की उन्नति के लिए अपना पूरा जीवन अर्पित कर |  सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाते हुए समाज को एक नई दिशा दी | जनमानस का चहेता  यह नायक 86 वर्ष की उम्र में 23 अप्रैल 2001 प्रातः समाज को रोता-बिलखता छोड़ दुनिया को अलविदा कह फिर कही न उठने वाली निद्रा में सो गया | शर्मा जी समाज के ऐसे अध्यापक रूपी दीपक थे जिससे न जाने कितने घरों में रोशनी हो गई है, आज लगभग दो दशक होने वाले हैं फिर भी जनपद प्रतापगढ़ के लोगों के मन में उनकी स्मृति और कार्य जीवित हैं |