पंचम वेद

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पंचम वेद की संकल्पना बहुत प्राचीन है। वैदिक काल के उपरान्त कई ग्रन्थों को 'पंचम वेद' के रूप में मानने और उसे भी वेदों जैसा महत्व देने की बात कही गई है। यह बात सबसे पहले उपनिषदों में आई है और उसके बाद अनेक नए संस्कृत और अन्य नवीन भारतीय भाषाओं के ग्रन्थों के लिए 'पंचम वेद' की बात की गई है। पचमं वेद है शिव शक्ति शिव धर्म हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]