न्यूरेम्बर्ग के मुकदमे
| अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण | |
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न्यूरेम्बर्ग के पैलेस ऑफ़ जस्टिस में जजों की बेंच | |
| Indictment |
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| Started | 20 नवंबर 1945 |
| फैसला किया | 1 अक्टूबर 1946 |
| Defendant | 24 |
| Transcript(s) | |
| व्यक्ति वृत्त | |
| Related action(s) |
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| न्यायालय की सदस्यता | |
| Judge(s) sitting |
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न्यूरेम्बर्ग के मुकदमे (अंग्रेज़ी: Nuremberg trials) फ्रांस, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा हारे हुए नाज़ी जर्मनी के नेताओं के खिलाफ चलाए गए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मुकदमे थे। इन नेताओं पर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यूरोप के कई देशों पर हमले की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने तथा वहां के नागरिकों पर अत्याचार करने के आरोप थे।[1]
वर्ष 1939 और 1945 के बीच, नाज़ी जर्मनी ने यूरोप के कई देशों पर हमला किया। इन हमलों से अकेले सोवियत संघ में 2.7 करोड़ लोगों की मौत हुई। हारे हुए नाज़ी नेताओं को सज़ा देने के प्रस्तावों में दिखावटी मुक़दमे (सोवियत संघ) से लेकर बिना किसी सुनवाई के तुरंत फाँसी देने (यूनाइटेड किंगडम) तक के सुझाव शामिल थे। वर्ष 1945 के मध्य में, फ्रांस, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अधिकृत जर्मनी के न्यूरेम्बर्ग इलाके में एक संयुक्त न्यायाधिकरण बुलाए जाने की सहमति जताई। इसका कानूनी आधार न्यूरेम्बर्ग चार्टर था।
20 नवंबर 1945 और 1 अक्टूबर 1946 के बीच, अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण (IMT) ने नाज़ी जर्मनी के राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों के जीवित बचे हुए 22 सबसे अहम नेताओं और छह जर्मन संगठनों पर मुक़दमा चलाया।[2]
अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण का फैसला अभियोजन पक्ष के इस कथन के अनुरूप था कि आक्रामक युद्ध की साजिश रचने और उसे छेड़ने का अपराध सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय अपराध है। ज़्यादातर आरोपियों पर युद्ध अपराध और मानवता-विरोधी अपराध के आरोप भी लगाए गए। इन मुकदमों में यहूदी नरसंहार एक प्रमुख केंद्रबिंदु था। संयुक्त राज्य अमेरिका ने निचले स्तर के अपराधियों के ख़िलाफ़ बारह और मुक़दमे चलाए, जिनमें यहूदी नरसंहार पर ज़्यादा ध्यान दिया गया। उस समय आक्रामकता को पिछली तारीख़ से अपराध घोषित करने के कारण ये मुक़दमे विवादित रहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन के लिए व्यक्तियों को ज़िम्मेदार ठहराने की इनकी नई पहल को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक क़ानून की असली शुरुआत माना जाता है।[3]
शुरूआत
[संपादित करें]वर्ष 1939 और 1945 के बीच नाज़ी जर्मनी ने पोलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे, नीदरलैंड, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, फ्रांस, यूगोस्लाविया, ग्रीस और सोवियत संघ समेत कई यूरोपीय देशों पर हमला किया।[4] जर्मनी के हमलों के साथ-साथ कब्ज़े वाले इलाकों में बहुत ज़्यादा क्रूरता भी हुई। अकेले सोवियत संघ में युद्ध के कारण 2.7 करोड़ लोगों की मौत हुई, जिनमें ज़्यादातर आम नागरिक थे। यह संख्या युद्ध से पहले की आबादी का सातवां हिस्सा थी। नाज़ी अपराधों की असाधारण प्रकृति, विशेष रूप से लाखों यहूदियों की सुनियोजित हत्या की अनोखी और भयावह घटना पर ही यह कानूनी कार्रवाई आधारित थी।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ लोक अन्तर्राष्ट्रीय विधि - भाग 2. ठाकुर पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड. 2026. pp. 52–53. अभिगमन तिथि: 12 सितम्बर 2026.
- ↑ मिगुएल एंजेल, मुनोज़ वारा. एडॉल्फ हिटलर : वह राक्षस जो कानूनी रूप से सत्ता में आया और दुनिया को तबाही में डुबो दिया।. p. 1919. अभिगमन तिथि: 12 सितम्बर 2026.
- ↑ सर्गेई, सायापिन (2014). The Crime of Aggression in International Criminal Law [अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून में आक्रामकता का अपराध] (अंग्रेज़ी भाषा में). टी.एम.सी. एसर प्रेस. p. 148. अभिगमन तिथि: 12 सितम्बर 2026.
- ↑ "World War II" [द्वितीय विश्व युद्ध]. इनसायक्लोपीडिया ब्रिटानिका (अंग्रेज़ी भाषा में). मूल से से 30 मार्च 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 12 सितम्बर 2026.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]| न्यूरेम्बर्ग के मुकदमे से संबंधित मीडिया विकिमीडिया कॉमंस पर उपलब्ध है। |
- प्रतिलिपि अन्य दस्तावेज़ एवलॉन परियोजना के
- न्यूरेम्बर्ग : आर्मी टेलीविज़न– प्रसारित संस्करण