न्यायालयिक दंत विज्ञान

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न्यायालियिक दंतचिकित्सा (Forensic dentistry), दन्तविज्ञान का वह उपयोग है जिसकी सहायता से पुलिस अपराधी या अभियुक्तों पर आपराधिक न्याय प्रणाली लागू की जाती है। न्यायालियिक दंतचिकित्सक उन जांच संस्थाओं के साथ काम करते हैं जो मानव अवशेष के साथ साथ बाकि नष्ट हुए शरीर से व्यक्ति की जाती, पेशा,उम्र, लिंग आदि का पता लगाते हैं।[1] इस विज्ञान में दांतों के आकार, प्रकार, बनावट एवम अनियमितताओं के आधार पर व्यक्ति की पहचान की जाती है। यह विधि तब अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होती है जब किसी मनुष्य का केवल कंकाल ही प्राप्त होता है![2]

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प्रयुक्त शेत्र[संपादित करें]

  • मानव अवशेष की जांच में
  • सामूहिक नरसंहार और विस्फोट में हुई मृत्यु का पता लगाने में
  • बलात्कार व् हत्या के प्रकरणों में 'bite marks' का अध्यन और तुलना करने में
  • किसी भी मनुष्य की उम्र का पता लगाने में
  • बाल शोषण या फिर किसी भी प्रकार के अत्याचार का पता लगाने में भी यव विज्ञानं इस्तेमाल किया जाता है।[3]

न्ययालियिक दंतचिकित्सा सबसे जादा जरूरी तब हो जाती है जब किसी भी पीड़ित के शरीर पर केवल दाँत के निशान मिलते है! उस समय यह पता करना बेहत जरूरी हो जाता है की यह निशान किसके द्वारा बनाए गए है! उस स्तिथि में दांतों के निशान को अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति से मिला कर हम यह साबित क्र सकते है की यह दांत के निशान किसके है।[4]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Graduate Diploma in Forensic Odontology. Adelaide.edu.au (2016-12-13). Retrieved on 2016-12-19.
  2. Forensic Odontology MFOdont. Retrieved 25 September 2014.
  3. "Bureau of Legal Dentistry". boldlab.ubc.ca. Retrieved 2013-09-06
  4. "Graduate Diploma in Forensic Odontology : Melbourne Dental School". Dent.unimelb.edu.au. Retrieved 2013-09-06