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नोआखाली नरसंहार

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नोआखाली नरसंहार
स्थाननोवाखाली Edit this on Wikidata
तिथिनवम्बर 1946 Edit this on Wikidata

नोआखली नरसंहार ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी के नोआखली (वर्तमान में बांग्लादेश का हिस्सा) क्षेत्र में अक्टूबर–नवम्बर 1946 के बीच हुआ। इस हिंसा में हिन्दू समुदाय पर हमले, सामूहिक हत्याएँ, महिलाओं के साथ यौन हिंसा, अपहरण, जबरन धर्मांतरण तथा सम्पत्ति की लूटपाट की घटनाएँ दर्ज की गईं।[1]

पृष्ठभूमि

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नईम निज़ाम के अनुसार यह हिंसा उस समय हुई जब 1946 का कलकत्ता दंगा समाप्त हुआ था। उस समय नोआखली क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक तनाव मौजूद था। हिन्दू जमींदारों और मुस्लिम कृषकों के बीच वर्गीय एवं धार्मिक दूरी बढ़ रही थी। स्थानीय नेता पीर हुसैनी ने कृषक प्रजा पार्टी के मंच से लोकप्रियता हासिल की थी।[2]

हिंसा का प्रारंभ लक्ष्मीपुर सदर उपज़िला के रामगंज क्षेत्र से हुआ। समकालीन रिपोर्टों के अनुसार अफवाहों ने भी स्थिति को भड़काने में भूमिका निभाई।[1]

बलपूर्वक धर्मांतरण

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कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि हजारों हिन्दुओं को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गया।[3] जिन्होंने धर्मांतरण से इनकार किया, उनकी हत्या की घटनाएँ भी दर्ज की गईं। हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में शरण लेने को मजबूर हुए।[1]


"सबसे बुरा हाल महिलाओं का था। कईयों को अपने पतियों को मारे जाते हुए देखना पड़ा और फिर जबरन धर्मांतरण कराकर उन्हें उन्हीं लोगों से शादी करने पर मजबूर किया गया जो उनके पतियों की हत्या के ज़िम्मेदार थे। उन महिलाओं की आँखों में एक मृत-सी झलक थी। वह निराशा नहीं थी, न ही कुछ इतना सक्रिय। वह केवल अंधकार था... हज़ारों लोगों पर अपने जीवन के बदले गोमांस खाने और इस्लाम के प्रति निष्ठा की घोषणा करने के लिए मजबूरी थोपी गई।"

मिस म्यूरियल लीस्टर, जो नोआखली भेजी गई एक राहत समिति की सदस्य थीं, ने 6 नवम्बर 1946 को लिखा (वी. वी. नागरकर – जेनेसिस – पृष्ठ 446)[4]

इस हिंसा से नोआखली जिले के रामगंज, बेगमगंज, रायपुर, लक्ष्मीपुर, छगलनैया और संदीप थाना क्षेत्र तथा टिप्परा जिले के कई हिस्से प्रभावित हुए। प्रभावित क्षेत्रफल लगभग 2,000 वर्ग मील था।[1]

चित्र दीर्घा

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लीला राय ने अनेक हिन्दू महिलाओं को हिंसा से बचाने में भूमिका निभाई।
लीला राय ने अनेक हिन्दू महिलाओं को हिंसा से बचाने में भूमिका निभाई। 
सुरबाला मजूमदार, जिनकी हत्या हिंसा में हुई।
सुरबाला मजूमदार, जिनकी हत्या हिंसा में हुई। 
स्वतंत्रता सेनानी लालमोहन सेन की भी हत्या की गई।
स्वतंत्रता सेनानी लालमोहन सेन की भी हत्या की गई। 

सन्दर्भ

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  1. 1 2 3 4 Sinha, Dinesh Chandra; Dasgupta, Ashok (1 January 2011). 1946: The great Calcutta killings and the Noakhali genocide (PDF) (First ed.). Kolkata: Sri Himansu Maity. अभिगमन तिथि: 4 July 2017.
  2. निज़ाम, नईम (24 अक्टूबर, 2021). "दंगों को दबाने के लिए महात्मा गांधी ने नोआखली में अपनी बकरी खो दी". Bangla News 24. मूल से पुरालेखन की तिथि: 14 अक्तूबर 2022. अभिगमन तिथि: 14 अक्टूबर, 2022. {{cite web}}: Check date values in: |access-date= and |date= (help)CS1 maint: bot: original URL status unknown (link)
  3. https://hindugenocide.com/islamic-jihad/noakhali-massacre-of-1946-5000-hindus-killed-3-5l-forced-to-convert-to-islam
  4. Nagarkar, V. V. (1975). Genesis of Pakistan. Bombay: Allied Publishers. p. 446. Worst of all was the plight of women. Several of them had to watch their husbands being murdered and then be forcibly converted and married to some of those responsible for their death. Those women had a dead look. It was not despair, nothing so active as that. It was blackness…….the eating of beef and declaration of allegiance to Islam has been forced upon many thousands … as the price of their lives. Miss Muriel Leister, member of a relief committee sent to Noakhali, wrote on 6 November 1946.