नीरा आर्या

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नीरा आर्या

नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) , आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था।[1] 1998 में इनका निधन हैदराबाद में हुआ। इन्हें नीरा ​नागिनी के नाम से भी जाना जाता है। इनके भाई बसंतकुमार भी आजाद हिन्द फौज में थे। नीरा नागिन और इनके भाई बसंतकुमार के जीवन पर कई लोक गायकों ने काव्य संग्रह एवं भजन भी लिखे हैं।[2]नीरा नागिनी के नाम से इनके जीवन पर एक महाकाव्य भी है। इनके जीवन पर फिल्म का निर्माण भी होने की खबर है।[3] यह एक महान देशभक्त, साहसी एवं स्वाभिवानी महिला थीं, जिन्हें गर्व और गौरव के साथ याद किया जाता है।


जन्म एवं शिक्षा—दीक्षा[संपादित करें]

इनका जन्म 5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में हुआ था।[4]इनके पिता सेठ छज्जूमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जिनका व्यापार देशभर में फैला हुआ था। खासकर कलकत्ता में इनके पिताजी के व्यापार का मुख्य केंद्र था, इसलिए इनकी शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता में ही हुई।[5] नीरा आर्य हिन्दी, अंग्रेजी, बंगाली के साथ-साथ कई अन्य भाषाओं में भी प्रवीण थीं। इनकी शादी ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के संग हुई थी।[6] श्रीकांत जयरंजन दास अंग्रेज भक्त अधिकारी थी।[7] श्रीकांत जयरंजन दास को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जासूसी करने और उसे मौत के घाट उतारने की जिम्मेदारी दी गई थी।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान[संपादित करें]

इन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अफसर अपने पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी[8] आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद जब दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया,[9] लेकिन इन्हें पति की हत्या के आरोप में काले पानी की सजा हुई थी,[10] जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गई। आजादी के बाद इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया, लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।[11]इनके भाई बसंत कुमार भी स्वतंत्रता सेनानी[12] थे, जो आजादी के बाद संन्यासी बन गए थे।[13] आजादी के जंग में अपनी भूमिका पर इन्होंने अपनी आत्मकथा भी लिखी है। उर्दू लेखिका फरहाना ताज को भी इन्होंने अपने जीवन के अनेक प्रसंग सुनाए थे। उन्होंने भी इनके जीवन पर एक उपन्यास लिखा है, जिसमें इनके आजादी की जंग में योगदान को रेखांकित किया गया है। इनकी आत्मकथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है - ‘‘मैं जब कोलकाता जेल से अंडमान पहुंची, तो हमारे रहने का स्थान वे ही कोठरियाँ थीं, जिनमें अन्य महिला राजनैतिक अपराधी रही थी अथवा रहती थी। हमें रात के 10 बजे कोठरियों में बंद कर दिया गया और चटाई, कंबल आदि का नाम भी नहीं सुनाई पड़ा।[14] मन में चिंता होती थी कि इस गहरे समुद्र में अज्ञात द्वीप में रहते स्वतंत्रता कैसे मिलेगी, जहाँ अभी तो ओढ़ने बिछाने का ध्यान छोड़ने की आवश्यकता आ पड़ी है? जैसे-तैसे जमीन पर ही लोट लगाई और नींद भी आ गई। लगभग 12 बजे एक पहरेदार दो कम्बल लेकर आया और बिना बोले-चाले ही ऊपर फेंककर चला गया। कंबलों का गिरना और नींद का टूटना भी एक साथ ही हुआ। बुरा तो लगा, परंतु कंबलों को पाकर संतोष भी आ ही गया। अब केवल वही एक लोहे के बंधन का कष्ट और रह-रहकर भारत माता से जुदा होने का ध्यान साथ में था।[15] ‘‘सूर्य निकलते ही मुझको खिचड़ी मिली और लुहार भी आ गया। हाथ की सांकल काटते समय थोड़ा-सा चमड़ा भी काटा, परंतु पैरों में से आड़ी बेड़ी काटते समय, केवल दो-तीन बार हथौड़ी से पैरों की हड्डी को जाँचा कि कितनी पुष्ट है। मैंने एक बार दुःखी होकर कहा, ‘‘क्याअंधा है, जो पैर में मारता है?’’[16] ‘‘पैर क्या हम तो दिल में भी मार देंगे, क्या कर लोगी?’’ उसने मुझे कहा था। ‘‘बंधन में हूँ तुम्हारे कर भी क्या सकती हूँ...’’ फिर मैंने उनके ऊपर थूक दिया था, ‘‘औरतों की इज्जत करना सीखो?’’ जेलर भी साथ थे, तो उसने कड़क आवाज में कहा, ‘‘तुम्हें छोड़ दिया जाएगा, यदि तुम बता दोगी कि तुम्हारे नेताजी सुभाष कहाँ हैं?’’[17] ‘‘वे तो हवाई दुर्घटना में चल बसे, ’’ मैंने जवाब दिया, ‘‘सारी दुनिया जानती है। ’’ ‘‘नेताजी जिंदा हैं....झूठ बोलती हो तुम कि वे हवाई दुर्घटना में मर गए?’’ जेलर ने कहा। ‘‘हाँ नेताजी जिंदा हैं।’’[18] ‘तो कहाँ हैं...। ’’ ‘मेरे दिल में जिंदा हैं वे। ’’ जैसे ही मैंने कहा तो जेलर को गुस्सा आ गया था और बोले, ‘‘तो तुम्हारे दिल से हम नेताजी को निकाल देंगे। ’’ और फिर उन्होंने मेरे आँचल पर ही हाथ डाल दिया और मेरी आँगी को फाड़ते हुए फिर लुहार की ओर संकेत किया...लुहार ने एक बड़ा सा जंबूड़ औजार जैसा फुलवारी में इधर-उधर बढ़ी हुई पत्तियाँ काटने के काम आता है, उस ब्रेस्ट रिपर को उठा लिया और मेरे दाएँ स्तन[19] को उसमें दबाकर काटने चला था...लेकिन उसमें धार नहीं थी, ठूँठा था और उरोजों (स्तनों) को दबाकर असहनीय पीड़ा देते हुए[20] दूसरी तरफ से जेलर ने मेरी गर्दन पकड़ते हुए कहा, ‘‘अगर फिर जबान लड़ाई तो तुम्हारे ये दोनों गुब्बारे छाती से अलग कर दिए जाएँगे...’’ उसने फिर चिमटानुमा हथियार मेरी नाक पर मारते हुए कहा, ‘‘शुक्र मानो हमारी महारानी विक्टोरिया का कि इसे आग से नहीं तपाया, आग से तपाया होता तो तुम्हारे दोनों स्तन पूरी तरह उखड़ जाते।’’[21]

जीवन के अंतिम दिन[संपादित करें]

इन्होंने जीवन के अंतिम दिनों में फूल बेचकर गुजारा किया और फलकनुमा, हैदराबाद में एक झोंपड़ी में रही। अंतिम समय में इनकी झोंपड़ी को भी तोड़ दिया गया था, क्योंकि वह सरकारी जमीन में बनी हुई थी। वृद्धावस्था में बीमारी की हालत में चारमीनार के पास उस्मानिया अस्पताल में इन्होंने रविवार 26 जुलाई, 1998 में एक गरीब, असहाय, निराश्रित, बीमार वृद्धा के रूप में मौत का आलिंगन कर लिया। एक पत्रकार ने अपने साथियो संग मिलकर इनका अंतिम संस्कार किया।

ग्रन्थ[संपादित करें]

नीरा आर्य द्वारा रचित[संपादित करें]

  • मेरा जीवन संघर्ष, हिन्द पाकेट बुक्स, प्रथम संस्करण 1968[22]
  • मेरे गुमनाम साथी, हिन्द पाकेट बुक्स, प्रथम संस्करण 1964
  • अंडमान की अनोखी प्रथाएं, संस्करण 1952
  • सागर के उस पार, उपन्यास, संस्करण 1977

नीरा आर्य के बारे में[संपादित करें]

  • आजाद हिन्द फौज के गुमनाम सैनिक, मन्मथनाथ गुप्त, हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण 1968
  • भूली बिसरी ऐतिहासिक कहानियां, तेजपाल सिंह धामा, सूर्या भारती प्रकाशन चावड़ी बाजार नई दिल्ली, संस्करण 2012,
  • आजाद हिन्द की पहली जासूस, हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण 2004
  • आजाद हिन्द की पहली जासूस, मधु धामा, सागर प्रकाशन, शाहदरा दिल्ली, संस्करण 2018
  • ये जासूस महिलाएं, सत्यदेव नारायण सिन्हा हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण 1968
  • ये जासूस महिलाएं, सत्यदेव नारायण सिन्हा, पेंगुइन रेंडम हाउस, संस्करण 2019
  • भारतीय किसान यूनियन, हुक्के से हक तक, डॉ. रणजीत सिंह, सागर प्रकाशन, संस्करण 2018
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अज्ञात साथी, निर्मल बोस, अक्षरा प्रकाशन, संस्करण 1978


इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. आजाद हिन्द फौज के गुमनाम सैनिक, मन्मथनाथ गुप्त, हिन्द पाकेट बुक्स, संस्करण 1968
  2. "नीरा नागिनी पर लोकगीत". यूट्यूब. यूट्यूब. अभिगमन तिथि 23 अप्रैल 2016.
  3. "देश की पहली महिला जासूस नीरा आर्य". जागरण. दैनिक जागरण. अभिगमन तिथि 18 जनवरी 2019.
  4. "एक थी नीरा". makingindiaonline.in. मेकिंग इंडिया आनलाइन. अभिगमन तिथि 27 सितंबर 2018.
  5. "आजाद हिन्द फ़ौज की एक अल्पज्ञात सैनानी". www.krantidoot.in. क्रांतिदूत. अभिगमन तिथि 26 अक्टूबर 2018.
  6. मेरा जीवन संघर्ष, नीरा आर्य, पृष्ठ 45
  7. "नीरा आर्या की आपबीती". http://breakinguttarakhand. ब्रेकिंग उत्तराखंड. अभिगमन तिथि 1 नवंबर 2018.
  8. भूली बिसरी ऐतिहासिक कहानियां, सूर्या भारती प्रकाशन चावड़ी बाजार नई दिल्ली, संस्करण 2012,
  9. "देशप्रेमी नीरा आर्य की अनोखी कहानी". प्रतिलिपि. प्रतिलिपि. अभिगमन तिथि 18 जनवरी 2019.
  10. "कितनों को याद होगा उनका नाम!". yourstory. यूअर स्टोरी. अभिगमन तिथि 29 जुलाई 2018.
  11. * आजाद हिन्द की पहली जासूस, मधु धामा, सागर प्रकाशन, शाहदरा दिल्ली, संस्करण 2018
  12. "जेल में जब मेरे स्तन काटे गए !". अटल हिंद. अटल हिंद राष्ट्रीय समाचार पत्र. अभिगमन तिथि 2 फरवरी 2019.
  13. "भारत माता की वीरांगना नीरा नागिनी के काटे गए थे जेल ही में स्तन". www.alphanewsindia. अल्फा न्यूज. अभिगमन तिथि 2 नवंबर 2018.
  14. "नीरा आर्य का दर्दभरा जीवन". dailyhunt.in. स्वतंत्र प्रभात. अभिगमन तिथि 10 फरवरी 2019.
  15. "नीरा आर्या". lookchup. लुकछुप. अभिगमन तिथि 2 नवंबर 2018.
  16. "कौन कहता है चरखे से आजादी मिली". gyanapp.in. ज्ञान एप्प. अभिगमन तिथि 12 फरवरी 2017.
  17. "जेल में कहर की दास्तान". www.coverageindia.com. कवरेज इंडिया. अभिगमन तिथि 10 सितंबर 2017.
  18. "नीरा आर्य की आत्मकथा का एक अंश". sinewstoday.com. सी न्यूज टूडे. अभिगमन तिथि 2 अगस्त 2018.
  19. "जेल में जब मेरे स्तन काटे गए". www.mangaljyoti.in. मंगल ज्योति. अभिगमन तिथि 10 सितंबर 2017.
  20. "जेल में जब मेरे स्तन काटे गए". bindashbol.com. बीबी न्यूज. अभिगमन तिथि 27 अप्रैल 2019.
  21. "मातृशक्ति वीरगाथा : छुपाया गया इतिहास". sanskritiabhibhaashak.net.in. संस्कृतिअभिभाषक. अभिगमन तिथि 10 फरवरी 2019.
  22. "नीरा आर्य की कहानी". awadhhindisahitya. अवध हिन्दी साहित्य. अभिगमन तिथि 6 नवंबर 2018.