नीतिपरायणता
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नीतिपरायणता (righteousness) अथवा आर्जव (rectitude) उस अवस्था अथ्वा गुण को कहते हैं जो नैतिक रूप से सही और तर्कसंगत हो।[1] इसे न्यायसंगत या खरा निकलना या दृश्य और प्रकाशमान के पर्याय के रूप में माना जाता है।[1] यह भारतीय, चीन और इब्राहीमी धर्मों व परम्पराओं में धर्ममीमांसा की अवधारणा के रूप में देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए पारसी, हिन्दू, बौद्ध, इस्लाम, ईसाई, कंफ्युशसवाद, ताओ, यहूदी धर्मों के विभिन्न दृष्टिकोंणों से एक विशेषता समान मानी जाती है जिसके अनुसार किसी व्यक्ति के कार्य उचित हैं और उसके जीवनभर के कार्यों के लिए ईश्वर उसके साथ न्याय अथवा कार्यों की गणना के आधार निर्णय लेगा।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 "righteousness". Oxford Living Dictionaries. मूल से से दिसम्बर 1, 2017 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 24 नवम्बर 2017.