निहंग

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१८६० के दशक का एक चित्र जिसमें एक निहंग अपनी विशिष्ट पगड़ी में चित्रित है।

निहंग से अभिप्राय है ऐसे सिख जो दस गुरुओं के आदेशों के पूर्ण रूप से पालन के लिए हर समय तत्पर रहते हैं और प्रेरणाओं से ओतप्रोत होते हैं। दस गुरुओं के काल में ये सिख गुरु साहिबानों के प्रबल प्रहरी होते थे, व गुरु महाराजों द्वारा रची गई रचना गुरु ग्रंथ साहिब के प्रहरी अब भी होते हैं। यदि कभी सिख धर्म पर दुर्भाग्यपूर्ण प्रहार हो तो निहंग उस समय अपने प्राणों की परवाह किये बिना "सिख" और "गुरु ग्रंथ साहिब" की रक्षा आखरी सांस तक करते हैं। यह पूर्ण रूपेण सिख धर्म के लिए हर समय समर्पित होते हैं, और आम सिखों को मानवता का विशेष ध्यान रखने की ओर प्रेरित करते रहते हैं l

निहंगों को उनके आक्रामक व्यक्तित्व के लिए भी जाना जाता है। निहंग सिखों के धर्म-चिन्ह आम सिखों की अपेक्षा मज़बूत और बड़े होते हैं। जन्म से लेकर जीवन के अंत तक जितने भी जीवन संस्कार होते हैं, सिख धर्म के अनुसार ही उनका प्रेम से निर्वहन करते हैं l