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निचली पृथ्वी कक्षा

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भू-स्थिर, जीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो, कम्पास (मीओ), अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी और इरीडियम नक्षत्र के कक्षाओं की, पृथ्वी और वैन एलेन विकिरण पट्टी के पैमाने पर तुलना।[a] चंद्रमा की कक्षा भू-स्थिर कक्षा से 9 गुना ज्यादा है। [b] (विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिये चित्र, में किसी शब्द के उपर माउस घुमाएँ।)

लो अर्थ ऑर्बिट या पृथ्वी की निचली कक्षा (Leo) 400km किलोमीटर (कक्षीय अवधि 88 मिनट), और 2,000 किलोमीटर (1,200 मील) के बीच ऊंचाई पर स्थित पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा (ऑर्बिट) है। लगभग 160 किलोमीटर (99 मील) या उससे नीचे वस्तुएँ बहुत तेजी से कक्षीय क्षय (ऑर्बिटल डीकेय) और ऊंचाई नुकसान (एल्टीट्यूड लॉस) का अनुभव करती हैं।[1][2]

सन्दर्भ

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  1. "IADC Space Debris Mitigation Guidelines" (PDF). Inter-Agency Space Debris Coordination Committee. 15 October 2002. मूल से (PDF) से 3 दिसंबर 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 20 फ़रवरी 2017.
  2. "NASA Safety Standard 1740.14, Guidelines and Assessment Procedures for Limiting Orbital Debris" (PDF). Office of Safety and Mission Assurance. 1 August 1995. मूल से (PDF) से 15 फ़रवरी 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 20 फ़रवरी 2017.
  1. कक्षीय अवधि व वेग की निम्न सूत्रों की मदद से गणना की जाती है 4π²R³ = T²GM और V²R = GM, जहाँ R = कक्षा की त्रिज्या मीटर में है, T = सेकेन्डों में कक्षीय अवधि, V = कक्षीय वेग मी/से में, G = गुरुत्व बल 6.673×10-11 Nm²/kg², M = धरती का द्रव्यमान 5.98×1024 kg.
  2. लगभग 8.6 गुणा (त्रिज्या और लंबाई में) जब चंद्रमा धरती के सबसे नजदीक होता है (363104 किमी ÷ 42164 किमी) से लकर 9.6 गुणा जब ये अधिकतम दूरी पर होता है (405696 किमी ÷ 42164 किमी)।
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