निखिल रंजन बैनर्जी

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निखिल रंजन बैनर्जी (बांग्ला: নিখিল রঞ্জন ব্যানার্জী; १४ अक्टूबर १९३१ – २७ जनवरी १९८६) को १९८७ में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से हैं।



पं निखिल बैनर्जी का जन्म १४ अक्टूबर सन् १९३९ ई० को कलकत्ता में हुआ। पिता स्व० जे० एन० बैनर्जी जी संगीतज्ञ थे। प्रारम्भिक शिक्षा इन्हें अपने पिता जी से ही मिली । ९वर्ष की आयु में वे अखिल बंगााल संगीत सम्मेलन में अग्रणी रहें। पं० निखिल बैनर्जी ने गौरीपुर के महाराजा से शिक्षा पाई , जिन्होंने उन्हें उ० अलाउद्दीन खाँ साहब के पास भेजा । उ० के पास वे ६ वर्ष तक रहें औंर उसके बाद सन् १९५२ ई० में वे बंबई आए , जबकी उ० हज के लिए जा रहें थें । उस समय सें उन्होंने उ० अली अकबर खाँ से सन् १९५६ ई० तक शिक्षा पाई। सन् १९५६ ई० के अन्त में वे कलकत्ता चले गए औंर वहाँ "अली अकबर खाँ कॉलेज अॉफ म्यूजिक " में अध्यापक रहें।

पं० निखिल बैनर्जी का यह विश्वास था कि संगीत के प्रचार-प्रसार औंर संगीत-सम्मेलनों में रस पैदा करने की जिम्मेदारी उच्च कलाकारों की हैं।

सितार की भिन्न ध्वनियों के बारें में निखिल बैनर्जी जी का कहना था कि सितार को अपने आप में पूर्ण करने का प्रयास किया जाता रहा।