नारायणी सेना

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नारायणी सेना का शब्दार्थ "नारायण की सेना" है, अर्थात श्रीकृष्ण की सेना। श्रीकृष्ण ने स्वमं यादवों को प्रशिक्षण कर यह सेना बनायी।दुर्योधन और अर्जुन दोनों श्रीकृष्ण से सहायता माँगने गये, तो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को पहला अवसर प्रदान किया। श्रीकृष्ण ने कहा कि वह उसमें और उसकी सेना ('नारायणी सेना') में एक चुन ले। अर्जुन ने कृष्ण का चुनाव किया। दुर्योधन ने नारायणी सेना का चुनाव किया।

इसी कारण से महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण की सेना स्वयं श्रीकृष्ण के विरुद्ध लड़ी थी।

इसे चतुरंगिणी सेना भी कहते हैं, अर्थात चार अंगों वाली (चतुः (र्) + अंगिनी), संस्कृत भाषा के नियमों के अनुसार नी को णी आदेश होता है।