नारायणी देवी वर्मा

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श्रीमती नारायणी देवी वर्मा ( -- 12 मार्च, 1977) भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं सामाजिक कार्यकर्ता थीं। वे महान स्वतंत्रता सेनानी माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी थीं।

नारायणी देवी का जन्म सिंगोली गाँव में हुआ था जो वर्तमान समय में मध्य प्रदेश में है। उनके पिता का नाम रामसहाय भटनागर था। बारह वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह माणिक्यलाल वर्मा के साथ कर दिया गया। किसानों व आम जनता पर राजा जागीरदारों के अत्याचार देखकर माणिक्यलाल वर्मा ने आजीवन किसानों, दलितों व गरीबों को सेवा का संकल्प लिया तो नारायणी देवी इस व्रत में उनकी सहयोगिनी बनीं। माणिक्यलाल वर्मा के जेल जाने पर परिवार के पालन-पोषण के साथ ही नारायणी देवी ने घर-मोहल्लों में जाकर लोगों को पढ़ाना एवं शोषण के खिलाफ महिलाओं को तैयार करने के कार्य किये। वे अपनी सहयोगिनियों के साथ घर-घर जागृति संदेश पहुँचातीं और लोगों को बेगार, नशा प्रथा एवं बाल-विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने एवं संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा देतीं।उन्होंने डूंगरपुर रियासत में खड़लाई में भीलों के मध्य शिक्षा प्रसार द्वारा जागृति पैदा करने का कार्य भी किया।

सन 1939 ई. में प्रजामण्डल के कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। इसके बाद 1942 ई. में भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने के कारण पुनः जेल जाना पड़ा। 1944 ई. में वे भीलवाड़ा आ गईं और यहाँ 14 नवम्बर, 1944 को महिला आश्रम संस्था की स्थापना की। यहाँ प्रौढ़ शिक्षा व प्रसूति गृह का संचालन भी किया।

श्रीमती नारायणी देवी 1970 से 1976 ई. तक राज्यसभा की सदस्य रहीं। 12 मार्च, 1977 को उनका निधन हो गया। इनकी स्मृति में भीलवाड़ा के विजय सिंह पथिक नगर में एक नारायणी देवी वर्मा महिला अध्यापक प्रशिक्षण महाविद्यालय स्थापित किया गया है।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]