नाभिकीय तत्वान्तरण

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एक विघटन-शृंखला के कुछ भाग
कोबाल्ट-६० के तत्वान्तरित होकर निकल-६० बनने के चरणों का निरूपण

किसी परमाणु या समस्थानिक को दूसरे परमाणु या समस्थानिक में बदल देना नाभिकीय तत्वान्तरण (न्युक्लियर ट्रान्सम्युटेशन) कहलाता है। चूंकि किसी भी तत्त्व या समस्थानिक के नाभिक में प्रोटॉनों एवं न्यूट्रॉनों की संख्या ही उसकी पहचान है, अतः ऐसे किसी भी प्रक्रम को नाभिकीय तत्वान्तरण कहते हैं जिसमें नाभिक के प्रोट्रॉनों या न्यूट्रॉनों की संख्या बदल जाती है। तत्वान्तरण, किसी नाभिकीय अभिक्रिया के द्वारा किया जा सकता है या रेडियोसक्रिय ह्रास द्वारा।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य[संपादित करें]

'ट्रान्सम्यूटेशन' या 'प्रकार्य-परिवर्तन' की परिकल्पना रसायन विज्ञान के विकास के इतिहास के कीमियागारी के कालखण्ड में भी बहुत चर्चित रही थी। मध्ययुग में अलकेमिस्ट पारस पत्थर की खोज में रहते थे जो साधारण धातुओं (बेस मेटल्स) को स्वर्ण में बदल दे। इस पर बहुत चर्चा हुई और प्रकार्य-परिवर्तन को असम्भव घोषित किया गया। बहुत से वैज्ञानिकों ने 'सोना बनाने' वाले धोखेबाजों का भण्डाफोड़ भी किया।