नागरिक संहिता
नागरिक संहिता (English: Civil code) किसी देश या राज्य के नागरिक कानून का एक व्यवस्थित, व्यापक और लिखित संग्रह होता है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के निजी अधिकारों, कर्तव्यों और उनके बीच के कानूनी संबंधों को विनियमित करना है।[1] यह 'निजी कानून' की रीढ़ है और इसमें मुख्य रूप से संपत्ति, अनुबंध, विवाह, तलाक, परिवार, उत्तराधिकार और दायित्वों से संबंधित मूल कानून शामिल होते हैं।
नागरिक संहिताओं का ऐतिहासिक आधार प्राचीन रोमन कानून में निहित है, विशेष रूप से छठी शताब्दी में बीजान्टिन सम्राट जस्टिनियन प्रथम द्वारा संकलित 'कॉर्पस ज्यूरिस सिविलिस' में। हालांकि, आधुनिक नागरिक संहिताओं के विकास में सबसे बड़ा मोड़ 1804 में आया, जब फ्रांस में नेपोलियन बोनापार्ट ने 'नेपोलियन कोड'लागू किया।[2] इस संहिता ने पुराने और जटिल सामंती कानूनों को समाप्त कर पूरे देश के लिए एक स्पष्ट, सुलभ और समान कानूनी ढांचा तैयार किया। इसके बाद, 1900 में लागू हुई जर्मनी की नागरिक संहिता ने भी दुनिया भर की कानूनी प्रणालियों, विशेषकर जापान और चीन के कानूनों को गहराई से प्रभावित किया।
'सामान्य कानून' प्रणाली (जैसे ब्रिटेन या अमेरिका में) के विपरीत, जहाँ कानून मुख्य रूप से पूर्व-न्यायिक फैसलों पर आधारित होते हैं, नागरिक संहिता वाले देशों में सभी कानून एक लिखित पुस्तक में स्पष्ट रूप से दर्ज होते हैं। इन देशों में न्यायाधीशों का प्राथमिक कार्य मामलों में अपनी तरफ से कानून बनाना नहीं, बल्कि इस लिखित संहिता की व्याख्या करके न्याय देना होता है।
भारत के संदर्भ में बात करें तो, ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास के कारण भारत मुख्य रूप से 'सामान्य कानून' प्रणाली का पालन करता है। भारत में व्यापार और अनुबंधों के लिए तो एक समान कानून है, लेकिन विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे नागरिक और पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग धर्मों के अपने 'पर्सनल लॉ' हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को निर्देश दिया गया है कि वह पूरे देश के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे, जो भारत में एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का विषय है।[3] वर्तमान में केवल गोवा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पुर्तगाली शासन के समय से ही एक प्रकार की समान नागरिक संहिता लागू है।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Civil code". Encyclopedia Britannica.
{{cite web}}: Text "jurisprudence" ignored (help) - ↑ "Civil Law Systems". Legal Information Institute (LII) - Cornell Law School.
- ↑ "Directive Principles of State Policy (Article 44)". National Portal of India.